बहुल मुस्लिम क्षेत्र में बायोगैस प्लांट के प्रस्ताव पर विरोध

इकबाल साहिल का आरोप-कंपोस्ट डिपो, मल शुद्धिकरण केंद्र के बाद अब बायोगैस प्लांट भी इसी क्षेत्र में क्यों?

अमरावती/दि.2 – बहुल मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र में प्रस्तावित बायोगैस प्लांट को लेकर विरोध के स्वर उठने लगे हैं. एआईएमआईएम से नगरसेविका कुबरा बानो करामात अली के पुत्र इकबाल साहिल ने प्रस्तावित प्लांट का विरोध करते हुए प्रशासन से इस परियोजना पर पुनर्विचार करने की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि शहर की विभिन्न कचरा एवं अपशिष्ट प्रबंधन संबंधी परियोजनाओं के लिए बार-बार इसी क्षेत्र का चयन किया जा रहा है.
इकबाल साहिल का कहना है कि लालखड़ी स्थित कंपोस्ट डिपो के कारण लालखड़ी, रहमत नगर, रोशन नगर, सागर नगर सहित आसपास के इलाकों के नागरिकों को दुर्गंध और धुएं की समस्या का सामना करना पड़ता है. उनका आरोप है कि कंपोस्ट डिपो में आग लगने की घटनाओं के दौरान धुआं आसपास की बस्तियों तक पहुंचता है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी होती है.
* कंपोस्ट डिपो के बाद मल शुद्धिकरण केंद्र का मुद्दा
इकबाल साहिल ने कहा कि इसी क्षेत्र में पहले से कंपोस्ट डिपो के साथ मल शुद्धिकरण केंद्र भी मौजूद है. अब उनकी जानकारी के अनुसार सर्वे क्रमांक 153/2 और 153/3 में बायोगैस प्लांट स्थापित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है. उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में इस परियोजना से स्थानीय नागरिकों को पर्यावरण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, इन स्वास्थ्य संबंधी आशंकाओं और परियोजना के संभावित प्रभावों की पुष्टि के लिए संबंधित विभाग की पर्यावरणीय एवं तकनीकी रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी.
* भोपाल गैस त्रासदी का दिया उदाहरण
इकबाल साहिल ने अपनी आपत्ति के समर्थन में भोपाल गैस त्रासदी का उदाहरण देते हुए कहा कि औद्योगिक एवं अपशिष्ट संबंधी परियोजनाओं के स्थान का चयन करते समय आबादी और स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि बायोगैस प्लांट अथवा इस तरह के प्रशिक्षण केंद्रों को घनी आबादी से दूर स्थापित किया जाना चाहिए.
* ‘विकास के खिलाफ नहीं, लेकिन आबादी से दूर हो प्लांट’
इकबाल साहिल ने स्पष्ट किया कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं. उन्होंने कहा कि वे विकसित भारत, विकसित महाराष्ट्र और विकसित अमरावती के पक्ष में हैं, लेकिन ऐसी परियोजनाओं की स्थापना घनी आबादी से दूर और पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि कचरा, मल शुद्धिकरण और बायोगैस जैसी परियोजनाओं के लिए बार-बार बहुल मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र को ही क्यों चुना जा रहा है.
* जन आंदोलन और न्यायालय जाने की चेतावनी
इकबाल साहिल ने कहा कि यदि प्रस्तावित बायोगैस प्लांट का निर्णय वापस नहीं लिया गया तो वे इसके खिलाफ जन आंदोलन करने के साथ न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए भी तैयार हैं. उन्होंने शहर के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से इस मुद्दे पर नागरिकों के साथ खड़े होने की अपील की. उन्होंने स्थानीय प्रशासन से मांग की कि परियोजना को अंतिम मंजूरी देने से पहले क्षेत्र की आबादी, पर्यावरणीय प्रभाव, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और नागरिकों की आपत्तियों का विस्तृत अध्ययन किया जाए.

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