अवैध रेत खनन से गर्मियों में गहराएगा जल संकट
किसानों पर कुएं-बोरवेल की पाबंदी, लेकिन रेत तस्करों पर लगाम नहीं

धारणी में प्रशासन की कार्रवाई पर भी उठे सवाल
धारणी/दि.2 – महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात के बीच जहां किसानों को पानी की उपलब्धता को देखते हुए नए कुएं और बोरवेल खोदने पर पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं धारणी तहसील में नदियों से बड़े पैमाने पर अवैध रूप से रेत निकालने का मामला सामने आया है. तापी नदी के पात्र से जेसीबी और एक्सकेवेटर के जरिए लगातार रेत निकाले जाने से आने वाले गर्मी के मौसम में जलसंकट और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है. रेत तस्करी रोकने में राजस्व विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं.
धारणी तहसील में बड़ी संख्या में सरकारी निर्माण कार्य चल रहे हैं. इसके अलावा निजी मकानों का निर्माण भी जारी है. रेत की उपलब्धता सीमित होने से कई निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं. दूसरी ओर आरोप है कि रेत तस्कर रात के समय ऊंची कीमतों पर अवैध रेत की आपूर्ति कर रहे हैं.
* आधी रात को कार्रवाई, तीन वाहन जब्त
तापी नदी से निकाली गई रेत को मध्य प्रदेश के दानलाई से महाराष्ट्र के खापरखेड़ा तक ले जाने का आरोप है. इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में डंपरों के जरिए अवैध रेत परिवहन किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं. पिछले सप्ताह सोमवार को तड़के करीब 1.30 बजे सब-डिविजनल ऑफिसर एवं सहायक जिलाधिकारी सिद्धार्थ शुक्ला ने कार्रवाई करते हुए तीन वाहनों को पकड़ा. कार्रवाई के बाद जब्त जेसीबी, ट्रैक्टर और टिपर कार्यालय परिसर के सामने खड़े हैं. बताया जाता है कि संबंधित वाहन मालिकों ने सरकारी जुर्माना भरने के बजाय अपील का रास्ता अपनाया है.
* कार्रवाई को लेकर भी उठे सवाल
इस मामले में आरोप लगाया जा रहा है कि कार्रवाई के बाद अधिकारियों की ओर से मामले को मध्य प्रदेश की सीमा से जोड़कर दिखाने का प्रयास किया गया. इससे कार्रवाई की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
* किसानों पर पाबंदी, रेत माफिया पर कार्रवाई क्यों नहीं?
जलसंकट के कारण किसानों को नए कुएं और बोरवेल खोदने की अनुमति नहीं मिल रही है. किसान सिंचाई और पीने के पानी की व्यवस्था को लेकर परेशान हैं. ऐसे समय में तापी जैसी नदियों के पात्र से दिन-रात मशीनों के जरिए बड़े पैमाने पर रेत निकालने का आरोप गंभीर है. पर्यावरणीय दृष्टि से भी नदी पात्र में अत्यधिक रेत खनन का असर भूजल पुनर्भरण और नदी की जलधारण क्षमता पर पड़ सकता है. यदि नदी तल से लगातार प्राकृतिक रूप से जमा रेत हटाई जाती रही, तो गर्मियों में नदी और आसपास के क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है.
* सूखे के बीच दोहरी व्यवस्था का आरोप
धारणी में एक ओर प्रशासन जलसंकट को देखते हुए किसानों पर पाबंदियां लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर अवैध रेत खनन और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने के आरोप लग रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पानी की हर बूंद बचाने की जरूरत है, तो नदी के प्राकृतिक जलस्रोतों को नुकसान पहुंचाने वाले अवैध रेत खनन पर सख्ती कब होगी? स्थानीय स्तर पर मांग की जा रही है कि तापी नदी में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की निष्पक्ष जांच, जब्त वाहनों पर नियमानुसार कार्रवाई तथा नदी पात्र में हो रहे खनन की वास्तविक स्थिति का सर्वे कराया जाए.





