शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में शिक्षक का ही प्रतिनिधित्व जरूरी
विमाशि प्रत्याशी दिलीप कडू का कथन

* ‘अमरावती मंडल’ को दिया विशेष साक्षात्कार
* चुनाव में पुरानी पेंशन, सेवा सुरक्षा, वेतन, अनुदान और गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति को बताया प्रमुख मुद्दे
अमरावती/दि.2- अमरावती संभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. विदर्भ माध्यमिक शिक्षक संघ (विमाशि) के प्रत्याशी दिलीप कडू ने भी विधान परिषद की इस सीट के लिए अपनी दावेदारी पेश की है. उनका कहना है कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद में शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि का होना आवश्यक है, ताकि शिक्षकों की समस्याओं को प्रभावी ढंग से सदन में उठाया जा सके. पुरानी पेंशन योजना, वेतन, चयन एवं वरिष्ठ वेतनश्रेणी, अनुदानित विद्यालयों के प्रश्न, सेवा सुरक्षा और शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति को उन्होंने प्रमुख मुद्दे बताया.
विमाशि प्रत्याशी दिलीप कडू ने दैनिक ‘अमरावती मंडल’ से विशेष बातचीत में अपनी दावेदारी और शिक्षक हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से अपनी भूमिका रखी. उन्होंने कहा कि अमरावती संभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लंबे समय तक शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि विधान परिषद में चुनकर आते रहे हैं. उनके अनुसार, 2014 के बाद इस स्थिति में बदलाव आया और पिछले वर्षों में कई महत्वपूर्ण शिक्षक प्रश्न लंबित रहे. कडू का कहना है कि इस बार शिक्षकों के बीच स्वयं शिक्षक प्रतिनिधि को आगे लाने की भावना दिखाई दे रही है.
* सेवा सुरक्षा को बताया महत्वपूर्ण उपलब्धि
अमरावती संभाग में विमाशि द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कडू ने कहा कि संगठन ने शिक्षकों को सेवा सुरक्षा दिलाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उनके अनुसार, पहले कई मामलों में वर्षों की सेवा के बावजूद शिक्षक को अचानक सेवा से हटाए जाने की स्थिति में पर्याप्त कानूनी संरक्षण उपलब्ध नहीं था. स्कूल कोड तथा संबंधित प्रावधानों के माध्यम से सेवा सुरक्षा का ढांचा मजबूत किया गया. उन्होंने कहा कि शिक्षकों का वेतन बैंक खाते में और प्रत्येक माह की पहली तारीख को देने की व्यवस्था के लिए शासन निर्णय और उसकी कार्यपद्धति निर्धारित की गई है. मार्च माह का वेतन भी 1 अप्रैल को देने की कार्यपद्धति निर्धारित होने का उन्होंने उल्लेख किया. हालांकि प्रशासनिक देरी के कारण कई बार वेतन समय पर नहीं मिलने की शिकायतें सामने आती हैं. ऐसे में शासन निर्णयों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकताओं में रहेगा.
* चरणवृद्धि और अनुदान व्यवस्था की समीक्षा की मांग
अनुदानित विद्यालयों तथा चरणवृद्धि के प्रश्न को गंभीर बताते हुए कडू ने कहा कि अक्तूबर 2011 की अनुदान व्यवस्था में चरणबद्ध तरीके से अनुदान बढ़ाने का प्रावधान था. उनके अनुसार, 20 प्रतिशत अनुदान मिलने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत चरण बढ़ते हुए विद्यालयों को कुछ वर्षों में 100 प्रतिशत अनुदान तक पहुंचने का मार्ग था. दिलीप कडू के मुताबिक, 2016 में इस व्यवस्था में बदलाव किए जाने से वर्षों से बिना अनुदान काम कर रहे विद्यालयों और शिक्षकों को नुकसान हुआ. उन्होंने चरणवृद्धि की पुरानी व्यवस्था की समीक्षा और आवश्यकतानुसार उसे बहाल करने की मांग की. साथ ही बिना अनुदान वाले विद्यालयों को नियमानुसार अनुदान उपलब्ध कराने को उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया.
* पुरानी पेंशन योजना को प्रमुख मांग बताया
पुरानी पेंशन योजना को अपनी प्रमुख मांग बताते हुए दिलीप कडू ने कहा कि 1 नवंबर 2005 से पहले नियुक्त, लेकिन उस समय 100 प्रतिशत अनुदानित नहीं रहे शिक्षकों का पेंशन संबंधी प्रश्न अलग स्वरूप का है. उनकी भूमिका के अनुसार, नियुक्ति के समय जो नियम लागू थे, उन्हीं के आधार पर संबंधित शिक्षकों को पुरानी पेंशन का लाभ मिलना चाहिए. उन्होंने बताया कि इस विषय में न्यायालयीन लड़ाई चल रही है और उन्हें सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है. इसके साथ ही 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए भी पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग की जा रही है. दिलीप कडू ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद जीवन-निर्वाह और सामाजिक सुरक्षा के लिए पेंशन महत्वपूर्ण है तथा शिक्षकों को सम्मानजनक और सुरक्षित सेवानिवृत्ति व्यवस्था मिलनी चाहिए.
* टीईटी पर सेवांतर्गत शिक्षकों के लिए व्यावहारिक समाधान
इन दिनों शिक्षक वर्ग में टीईटी को लेकर बनी चिंता पर अपनी भूमिका रखते हुए दिलीप कडू ने कहा कि कार्यरत शिक्षकों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान आवश्यक है. उन्होंने सेवांतर्गत शिक्षकों के लिए अलग और अपेक्षाकृत सरल परीक्षा व्यवस्था का विकल्प सुझाया, जिससे वे निर्धारित अवसरों में टीईटी उत्तीर्ण कर सकें. उन्होंने पात्र पुराने शिक्षकों को उपयुक्त नियमों के तहत छूट देने के विकल्प पर भी विचार करने की बात कही.
* चयन और वरिष्ठ वेतनश्रेणी का प्रश्न
चयन एवं वरिष्ठ वेतनश्रेणी के लंबित प्रश्न का उल्लेख करते हुए दिलीप कडू ने कहा कि केंद्र और राज्य के वेतनमान में समानता का विषय महत्वपूर्ण है. उनके अनुसार, यदि केंद्रीय शिक्षकों को चयन वेतनश्रेणी का लाभ व्यापक स्तर पर उपलब्ध है और महाराष्ट्र में यह सीमित है, तो इस विसंगति पर विचार होना चाहिए. पात्र शिक्षकों को चयन वेतनश्रेणी का लाभ व्यापक रूप से मिले, इसके लिए प्रयास करने की बात उन्होंने कही.
* मराठी माध्यम की शालाओं के संरक्षण की मांग
मराठी माध्यम की शालाओं के बंद होने और संच मान्यता के नियमों पर दिलीप कडू ने कहा कि विद्यार्थी संख्या के आधार पर नियमों में लगातार बदलाव का ग्रामीण और मराठी माध्यम की कई शालाओं पर प्रभाव पड़ रहा है. उनके अनुसार, यदि किसी विद्यालय में शिक्षक संख्या शून्य हो जाती है तो केवल कागजों पर स्कूल बंद नहीं होने की स्थिति बताना पर्याप्त नहीं है. ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच कायम रखने के लिए ऐसे विद्यालयों की स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है.
* गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ कम करने की जरूरत
शिक्षकों पर बढ़ते गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ को भी उन्होंने प्रमुख मुद्दा बताया. दिलीप कडू ने कहा कि शिक्षक का मूल कार्य अध्यापन है. पिछले वर्षों में गैर-शैक्षणिक कार्यों का दायरा बढ़ने से शिक्षकों के समय और ऊर्जा पर असर पड़ता है. विद्यार्थियों के अध्यापन के साथ उनके व्यक्तित्व विकास पर ध्यान देने के लिए शिक्षकों को पर्याप्त समय मिलना आवश्यक है.
* तीन मुद्दे तत्काल प्राथमिकता में
शिक्षक विधायक चुने जाने के बाद की प्राथमिकताओं के बारे में दिलीप कडू ने कहा कि पात्र शिक्षकों को चयन वेतनश्रेणी का लाभ दिलाना, चरणवृद्धि की प्रभावी नीति बहाल कराना और बिना अनुदान वाले विद्यालयों को नियमानुसार अनुदान दिलाना तत्काल प्राथमिकताओं में रहेंगे. इसके साथ पुरानी पेंशन, सेवा सुरक्षा, समय पर वेतन तथा गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति के प्रश्न भी लगातार उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि यह चुनाव केवल किसी एक व्यक्ति का चुनाव नहीं, बल्कि शिक्षक प्रतिनिधित्व से जुड़ा विषय है. शिक्षकों को अपने मुद्दों, सेवा सुरक्षा, पेंशन, वेतन और शिक्षा व्यवस्था के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मतदान करने का उन्होंने आह्वान किया. दिलीप कडू ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की आवाज विधान परिषद में प्रभावी ढंग से उठे और शिक्षक संगठनों की भूमिका मजबूत हो.
* विमाशि की अमरावती में पुरानी उपस्थिति
महाराष्ट्र में शिक्षक संगठनों की भूमिका पर चर्चा करते हुए विमाशि प्रत्याशी दिलीप कडू ने कहा कि विदर्भ माध्यमिक शिक्षक संघ और महाराष्ट्र शिक्षक परिषद का शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है. विमाशि को राज्य के पुराने शिक्षक संगठनों में से एक बताते हुए उन्होंने संगठन के छह दशक से अधिक पुराने इतिहास का उल्लेख किया. उनके अनुसार, नागपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में विमाशि के सुधाकर अडबाले वर्तमान में शिक्षक विधायक हैं. अमरावती संभाग में भी विमाशि के दो प्रतिनिधि शिक्षक विधायक रह चुके हैं. दिलीप कडू के मुताबिक, 1983-84 में विमाशि के बाबासाहेब सोमवंशी शिक्षक विधायक निर्वाचित हुए थे, जबकि वसंतराव खोटरे ने 2002 और 2008 में लगातार दो बार अमरावती संभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीता था. इस तरह उनके अनुसार, अलग-अलग कार्यकालों को मिलाकर लंबे समय तक इस निर्वाचन क्षेत्र में विमाशि का प्रतिनिधित्व रहा है.
* नागपुर में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन, अमरावती में अपना उम्मीदवार
विमाशि की राजनीतिक भूमिका का उल्लेख करते हुए दिलीप कडू ने कहा कि संगठन को सामान्यतः कांग्रेस समर्थक शिक्षक संगठन के रूप में देखा जाता है. इसी क्रम में नागपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के घोषित प्रत्याशी अभिजीत वंजारी को विमाशि द्वारा समर्थन दिए जाने का उन्होंने उल्लेख किया. हालांकि अमरावती संभाग में विमाशि ने दिलीप कडू को अपना प्रत्याशी बनाया है. दूसरी ओर, कांग्रेस ने अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से प्रा. अदिती पोहरे को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. इससे अमरावती में शिक्षक संगठनों और राजनीतिक दलों की अलग-अलग दावेदारियों के कारण चुनावी समीकरण बहुकोणीय होने की स्थिति बन रही है.
* अमरावती संभाग में करीब 33 हजार शिक्षक मतदाता, 5 से 6 हजार विमाशि के साथ
अमरावती संभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 33 हजार मतदाता होने का दावा करते हुए दिलीप कडू ने कहा कि इनमें विमाशि से जुड़े लगभग 5 से 6 हजार मतदाता होने की जानकारी है. उनका कहना है कि संगठन की यह उपस्थिति चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. हालांकि अंतिम चुनावी तस्वीर नामांकन, नामांकन वापसी और मैदान में बने रहने वाले प्रत्याशियों के बाद ही स्पष्ट होगी.





