चिखलदरा में पार्किंग शुल्क को लेकर विवाद, पर्यटकों ने उठाए सवाल
50 रुपये वसूली का आरोप, सुविधाओं के अभाव और वैकल्पिक पार्किंग पर रोक के दावों से बढ़ा विवाद

चिखलदरा /दि.4– विदर्भ के प्रमुख पर्यटन स्थल चिखलदरा में मानसून के दौरान बढ़ती पर्यटकों की भीड़ के बीच पार्किंग व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. कुछ पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि एक निजी खेत में वाहन पार्किंग के नाम पर प्रति वाहन 50 रुपये लिए जा रहे हैं, जबकि वहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
शिकायतों के अनुसार, पार्किंग स्थल पर कीचड़, पानी भराव और उचित व्यवस्था नहीं होने से वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. आरोप यह भी है कि पर्यटकों को अन्य स्थानों पर वाहन खड़ा करने से रोका जा रहा है और उन्हें एक ही पार्किंग स्थल का उपयोग करने के लिए कहा जाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्किंग स्थल के आसपास आदिवासी किसानों की निजी जमीन भी है, जहां वैकल्पिक पार्किंग की व्यवस्था से स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकता है. आरोप है कि पर्यटकों को उन स्थानों की ओर वाहन ले जाने से भी रोका जा रहा है. इस पूरे मामले में पुलिस और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं.
* 50 रुपये की वसूली पर उठे सवाल
पर्यटकों ने मांग की है कि यदि पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है तो प्रशासन यह स्पष्ट करे कि, यह शुल्क किस अधिकृत आदेश के तहत वसूला जा रहा है? क्या पर्यटकों को इसकी रसीद दी जा रही है? वसूली गई राशि किस खाते में जमा होती है? यदि यह अधिकृत पार्किंग है तो वहां आवश्यक सुविधाएं क्यों उपलब्ध नहीं हैं?
* पर्यटन व्यवस्था पर असर की आशंका
चिखलदरा की अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन पर निर्भर है. होटल व्यवसायी, छोटे दुकानदार, वाहन चालक और स्थानीय विक्रेता पर्यटकों पर आश्रित हैं. ऐसे में यदि पार्किंग व्यवस्था को लेकर भ्रम, असुविधा या कथित अनियमितताओं की स्थिति बनी रहती है तो इससे पर्यटन की छवि प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है. स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों ने प्रशासन से पार्किंग शुल्क की वैधता, वसूली की प्रक्रिया, रसीद व्यवस्था, बैरिकेड लगाने के आदेश तथा वैकल्पिक पार्किंग को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है.