कोणार्क को दंड में कोई छूट नहीं, मार्च से पहले वसूला गया 71.40 लाख रुपये का जुर्माना
मार्च पश्चात 67.40 लाख रुपये की नई दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित

* अप्रैल-जून की समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर स्वच्छता समिति ने अतिरिक्त जुर्माने की सिफारिश की
* कोणार्क को 40 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष के हिसाब से सात वर्षों के लिए मिला है शहर की सफाई का ठेका
* साफसफाई के कामों को लेकर लगातार निगरानी और कार्रवाई जारी
अमरावती /दि.4- अमरावती महानगरपालिका के बहुचर्चित सफाई ठेकेदार कोणार्क इंफ्रा को लेकर शहर में एक बार फिर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है. कंपनी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई, भुगतान, कार्यप्रदर्शन और अनुबंध की शर्तों को लेकर विभिन्न स्तरों पर दावे-प्रतिदावे किए जा रहे हैं. इस बीच मनपा के उपलब्ध रिकॉर्ड और संबंधित विभागीय जानकारी से यह स्पष्ट हुआ है कि कोणार्क कंपनी को किसी भी प्रकार की दंडात्मक राहत नहीं दी गई है. उलटे, कंपनी के कार्यों में पाई गई कमियों के आधार पर लगातार आर्थिक दंड लगाया गया है और उसकी वसूली की प्रक्रिया भी अपनाई गई है. मनपा सूत्रों के अनुसार, मार्च 2026 से पहले कंपनी पर लगाए गए 71.40 लाख रुपये के जुर्माने की वसूली पहले ही की जा चुकी है, जबकि मार्च के बाद के तीन महीनों में कार्यों की समीक्षा के आधार पर 67.40 लाख रुपये के अतिरिक्त दंड की सिफारिश की गई है. यह प्रस्ताव फिलहाल आयुक्त कार्यालय में विचाराधीन है और अंतिम मंजूरी के बाद उक्त राशि भी कंपनी से वसूल की जाएगी.
बता दे कि, अमरावती शहर में सफाई व्यवस्था एवं कचरा संकलन व ढुलाई के लिए एजेंसी के तौर पर नियुक्त कोणार्क कंपनी के कार्यों की नियमित समीक्षा के दौरान विभिन्न स्तरों पर कई कमियां दर्ज की गई थीं. निर्धारित मानकों के अनुरूप सड़क सफाई, कचरा संकलन, वाहन संचालन, मानव संसाधन उपलब्धता तथा अन्य सेवाओं में कमी पाए जाने पर मनपा प्रशासन ने अनुबंध की शर्तों के अनुसार आर्थिक दंड लगाया था. इन मामलों में मार्च 2026 तक कुल 71.40 लाख रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया था. अधिकारियों के अनुसार यह राशि कंपनी के देय भुगतान से समायोजित कर वसूल भी की जा चुकी है. इससे यह स्पष्ट होता है कि मनपा प्रशासन ने केवल नोटिस जारी करने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि आर्थिक दंड की वास्तविक वसूली भी सुनिश्चित की.
वहीं इस दौरान मनपा की आमसभा में कोणार्क के साथ हुए ठेका करार व कंपनी द्वारा किए जा रहे कामों की समिक्षा करने हेतु स्वच्छता अध्ययन समिती का गठन किया था. जिसके द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि, सफाई ठेके को लेकर जारी निविदा तथा कोणार्क कंपनी के साथ किए गए ठेका करार में उल्लेखित नियमों व शर्तों में काफी अधिक फर्क है. साथ ही कोणार्क कंपनी द्वारा नियमों व शर्तों के अनुकूल काम नहीं किए जा रहे. जिसके चलते मार्च माह के बाद भी कोणार्क कंपनी के कार्यों की समीक्षा जारी रही. विभिन्न जोनों से प्राप्त निरीक्षण रिपोर्ट, अधिकारियों की टिप्पणियों तथा मैदानी स्तर पर किए गए मूल्यांकन के आधार पर कंपनी के कार्यों में कई कमियां दर्ज की गईं. इन रिपोर्टों पर विचार करने के बाद मनपा की स्वच्छता समिति ने तीन महीनों के लिए अलग-अलग दंड निर्धारित करने की सिफारिश की है.
स्वच्छता अध्ययन समिति की अनुशंसा के अनुसार, कोणार्क कंपनी पर अप्रैल माह के लिए 11.92 लाख रुपये, मई माह के लिए 28.96 लाख रुपये तथा जून माह के लिए 26.52 लाख रुपये का जुर्माना प्रस्तावित किया गया है. इन तीनों महीनों की कुल राशि 67.40 लाख रुपये होती है. समिति ने यह प्रस्ताव प्रशासन को भेज दिया है और अब इस पर अंतिम निर्णय मनपा आयुक्त द्वारा लिया जाना है. मनपा की प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार, स्थायी समिति अथवा विषय समितियों द्वारा की गई सिफारिशें अंतिम आदेश नहीं मानी जातीं. संबंधित प्रस्तावों को आयुक्त की स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही वे लागू होते हैं. इसी कारण 67.40 लाख रुपये की दंड राशि अभी वसूली के चरण में नहीं पहुंची है. प्रस्ताव वर्तमान में आयुक्त कार्यालय में लंबित है. प्रशासनिक मंजूरी मिलते ही उक्त राशि भी कंपनी के बिलों से समायोजित कर वसूल की जा सकती है. मनपा अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया पूरी होने से पहले यह कहना कि दंड माफ कर दिया गया है या कंपनी को राहत दी जा रही है, वस्तुस्थिति के अनुरूप नहीं है.
गौरतलब है कि कोणार्क इंफ्रा को अमरावती शहर की सफाई व्यवस्था का ठेका लगभग 40 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की दर से दिया गया है. यह अनुबंध सात वर्षों के लिए है. इस प्रकार पूरे अनुबंध का अनुमानित मूल्य करीब 280 करोड़ रुपये बैठता है. कंपनी को शहर में घर-घर कचरा संकलन, सड़क सफाई, सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता, कचरा परिवहन, डंपिंग प्रबंधन तथा अन्य स्वच्छता संबंधी सेवाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई है. शहर की स्वच्छता व्यवस्था का बड़ा हिस्सा इसी ठेके के माध्यम से संचालित किया जा रहा है. * ठेका मिलने के बाद से लगातार विवादों में रही कंपनी
1 दिसंबर 2025 से कार्यभार संभालने के बाद से ही कोणार्क इंफ्रा विभिन्न कारणों से विवादों और चर्चाओं के केंद्र में रही है. शहर के अनेक क्षेत्रों से समय-समय पर सफाई व्यवस्था को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं. कहीं कचरा समय पर नहीं उठने, कहीं सफाई कर्मचारियों की अनुपस्थिति, तो कहीं वाहनों की संख्या और कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए. कई सामाजिक संगठनों और नागरिक मंचों ने भी सफाई व्यवस्था में सुधार की मांग की थी. इन शिकायतों के आधार पर कई बार प्रशासनिक निरीक्षण हुए और जहां कमियां पाई गईं वहां अनुबंध के प्रावधानों के तहत दंड लगाने की कार्रवाई की गई.
* मनपा की आमसभा में कई बार गूंज चुका है मामला
कोणार्क कंपनी का मुद्दा मनपा की आमसभा में भी कई बार गरमाया. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के पार्षदों ने अलग-अलग बैठकों में कंपनी के कार्यप्रदर्शन पर सवाल उठाए. कई जनप्रतिनिधियों ने नागरिकों से प्राप्त शिकायतों का हवाला देते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की. कुछ पार्षदों ने दंडात्मक कार्रवाई बढ़ाने, जबकि कुछ ने अनुबंध की शर्तों की पुनर्समीक्षा की आवश्यकता भी जताई थी. इस कारण कोणार्क का मुद्दा केवल प्रशासनिक न रहकर राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया
* निगरानी, मूल्यांकन और जवाबदेही की प्रक्रिया जारी
मनपा प्रशासन का कहना है कि सफाई जैसी मूलभूत नागरिक सेवा में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती. इसी कारण कंपनी के कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है. प्रत्येक जोन से प्राप्त रिपोर्ट, निरीक्षण टिप्पणियां और नागरिक शिकायतों का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाती है. अधिकारियों के अनुसार अनुबंध में स्पष्ट रूप से दंडात्मक प्रावधान शामिल हैं और उन्हीं के आधार पर कार्रवाई की जा रही है. यदि आगामी महीनों में भी कमियां पाई जाती हैं तो आगे भी दंडात्मक कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता.
* तथ्य बताते हैं, दंड माफ नहीं, कार्रवाई जारी
उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कोणार्क इंफ्रा पर मार्च 2026 तक लगाए गए 71.40 लाख रुपये के जुर्माने की वसूली हो चुकी है, जबकि 67.40 लाख रुपये के अतिरिक्त दंड का प्रस्ताव आयुक्त की मंजूरी की प्रतीक्षा में है. इस प्रकार कुल मिलाकर कंपनी के खिलाफ एक करोड़ रुपये से अधिक की दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया चल चुकी है. ऐसे में यह स्पष्ट होता है कि मनपा प्रशासन द्वारा कोणार्क कंपनी को किसी प्रकार की विशेष राहत या छूट नहीं दी गई है. उलटे, कार्यों में पाई गई कमियों के आधार पर लगातार समीक्षा, दंड और जवाबदेही की प्रक्रिया जारी रखी गई है. अब सबकी निगाहें आयुक्त के निर्णय पर टिकी हैं, जिसके बाद आगामी दंडात्मक कार्रवाई का स्वरूप स्पष्ट होगा.





