एसआईआर में स्थलांतरीत मतदाताओं को मिली बडी राहत

मूल पते पर पंजीयन को निर्वाचन आयोग ने दी मंजूरी

* मतदाता सूचि से नाम कटने की आशंका हुई दूर
मुंबई /दि.4- महाराष्ट्र में चल रहे मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-एसआईआर) अभियान के बीच चुनाव आयोग ने लाखों मतदाताओं को बड़ी राहत प्रदान की है. पुनर्विकास परियोजनाओं, स्लम पुनर्वसन योजनाओं, जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण तथा अन्य कारणों से अस्थायी रूप से विस्थापित हुए मतदाताओं को अब उनके मूल निवास स्थान पर ही एसआईआर प्रक्रिया पूरी करने की अनुमति दे दी गई है. इस निर्णय से मुंबई, ठाणे, पुणे, नागपुर और अन्य महानगरों में रहने वाले लाखों ऐसे मतदाताओं की चिंता दूर हो गई है, जिन्हें अपने नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का डर सताने लगा था.
चुनाव आयोग के इस फैसले को शहरी क्षेत्रों में चल रही व्यापक पुनर्विकास परियोजनाओं के कारण प्रभावित नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है. अब ऐसे मतदाता, जो अस्थायी रूप से किसी अन्य स्थान पर रह रहे हैं लेकिन परियोजना पूर्ण होने के बाद पुनः अपने मूल पते पर लौटने वाले हैं, उन्हें अपने मूल क्षेत्र का ही मतदाता माना जाएगा.
* 8 अगस्त तक बढ़ाई गई है एसआईआर की अवधि
राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष सघन पुनरीक्षण का कार्य बड़े पैमाने पर चल रहा है. मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में जुलाई के पहले सप्ताह में हुई भारी वर्षा और बाढ़ जैसी परिस्थितियों को देखते हुए चुनाव आयोग ने इस अभियान की समय-सीमा बढ़ाकर 8 अगस्त कर दी है. इस अवधि में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करने, मतदाता सत्यापन करने तथा मतदान केंद्रों के पुनर्गठन का कार्य किया जा रहा है. इसके बाद 17 अगस्त को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी, जबकि सभी दावों और आपत्तियों के निपटारे के बाद 19 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी.
* राज्य के 9.78 करोड़ मतदाताओं का हो रहा है पुनरीक्षण
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में कुल 9 करोड़ 78 लाख 54 हजार मतदाताओं का विशेष पुनरीक्षण किया जा रहा है. अब तक आयोग ने 9 करोड़ 17 लाख 79 हजार मतदाताओं, अर्थात लगभग 93.79 प्रतिशत मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचाने में सफलता प्राप्त की है. इनमें से 7 करोड़ 13 लाख 21 हजार मतदाताओं यानी लगभग 72.89 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने गणना प्रपत्र भरकर संबंधित मतदाता पंजीकरण अधिकारियों को जमा भी कर दिए हैं.
* मुंबई-ठाणे समेत बड़े शहरों में अपेक्षाकृत कम प्रतिसाद
जहां ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान को उत्साहजनक प्रतिसाद मिल रहा है, वहीं महानगरों में अपेक्षाकृत कम भागीदारी दर्ज की गई है. चुनाव आयोग के अनुसार, ठाणे जिले में 46.55 प्रतिशत मतदाताओं ने गणना प्रपत्र जमा किए हैं. वहीं मुंबई शहर में यह आंकड़ा 53.21 प्रतिशत है. इसके अलावा मुंबई उपनगर में 54.67 प्रतिशत, पुणे में 59.67 प्रतिशत, नागपुर में 59.77 प्रतिशत, पालघर में 61.34 प्रतिशत, रायगढ़ में लगभग 70 प्रतिशत, नाशिक में 72.24 प्रतिशत मतदाताओं ने प्रपत्र जमा किए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में कम प्रतिसाद का एक प्रमुख कारण पुनर्विकास और पुनर्वसन परियोजनाओं के चलते बड़ी संख्या में नागरिकों का अस्थायी रूप से अन्य स्थानों पर चले जाना है.
* नाम कटने का था खतरा
मुंबई, ठाणे, पुणे और नागपुर जैसे शहरों में बड़ी संख्या में इमारतें पुनर्विकास के दौर से गुजर रही हैं. स्लम पुनर्वसन प्राधिकरण (एसआरए), म्हाडा, महानगरपालिकाओं तथा अन्य एजेंसियों द्वारा चलाए जा रहे परियोजनाओं के कारण हजारों परिवारों को अस्थायी रूप से अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित होना पड़ा है. कई मामलों में बूथ स्तर के अधिकारियों ने संबंधित मतदाताओं को उनके मूल पते पर निवासरत नहीं पाए जाने के कारण गणना प्रपत्र देने से इनकार कर दिया था. इससे आशंका पैदा हो गई थी कि सत्यापन के दौरान ऐसे लाखों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं.
* विधानसभा में भी उठा था मुद्दा
मानसून सत्र के दौरान विभिन्न दलों के विधायकों ने यह मुद्दा विधानसभा में जोरदार तरीके से उठाया था. सभी दलों ने मांग की थी कि पुनर्विकास के कारण अस्थायी रूप से विस्थापित हुए नागरिकों को उनके मूल क्षेत्र का मतदाता ही माना जाए. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी चुनाव आयोग से अनुरोध किया था कि एसआरए अथवा पुनर्विकास परियोजनाओं के कारण अस्थायी रूप से अन्यत्र रहने वाले और भविष्य में वापस अपने मूल निवास पर लौटने वाले नागरिकों के मताधिकार को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए. राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भी इसी आशय का प्रस्ताव केंद्रीय चुनाव आयोग को भेजा था.
* आयोग ने जारी किए विशेष निर्देश
इन मांगों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद केंद्रीय चुनाव आयोग ने पुनर्विकास परियोजनाओं के कारण अस्थायी रूप से विस्थापित मतदाताओं को उनके मूल पते पर ही मतदाता के रूप में मान्यता देने का निर्णय लिया है. इसके तहत संबंधित मतदाता को यह घोषणा देनी होगी कि वह अस्थायी रूप से अन्यत्र रह रहा है और परियोजना पूर्ण होने के बाद पुनः अपने मूल निवास स्थान पर लौटेगा.
* कौन-कौन से दस्तावेज देने होंगे?
ऐसे मतदाताओं को गणना प्रपत्र के साथ जो दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, उनमें पुनर्विकास अथवा पुनर्वसन संबंधी घोषणा पत्र, एसआरए, म्हाडा, महानगरपालिका, एमएमआरडीए अथवा अन्य सक्षम प्राधिकरण द्वारा प्रमाणित पात्रता सूची, किरायेदार अथवा कब्जाधारक प्रमाणित सूची, निष्कासन नोटिस की प्रति, खरीद-बिक्री दस्तावेज (सेल डीड), सोसायटी का शेयर प्रमाणपत्र, किराया रसीद अथवा अन्य स्वामित्व/निवास संबंधी प्रमाण का समावेश किया गया है.
* जिलाधिकारियों को जारी किए गए निर्देश
चुनाव आयोग ने मुंबई, ठाणे, पुणे, नागपुर और अन्य संबंधित जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों तथा जिलाधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने को कहा है. मुंबई के जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा भी संबंधित निर्देश जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है.
* लाखों मतदाताओं की चिंता हुई दूर
चुनाव आयोग के इस फैसले से उन लाखों नागरिकों को बड़ी राहत मिली है जो पुनर्विकास परियोजनाओं के कारण अपने मूल निवास स्थान से अस्थायी रूप से दूर रह रहे हैं. अब उन्हें केवल इस आधार पर मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाएगा कि वे फिलहाल किसी अन्य स्थान पर रह रहे हैं. राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों तथा नागरिक मंचों ने चुनाव आयोग के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है. माना जा रहा है कि इस फैसले से विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रह सकेंगे और उन्हें अपने मताधिकार से वंचित नहीं होना पड़ेगा.

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