ब्लिंकिट और अजित बेकरी के खिलाफ मामला दर्ज

एफडीए की अमरावती में ब्राउन ब्रेड को लेकर बड़ी कार्रवाई

* 90 फीसदी मैदा मिलाकर बेची जा रही थी ‘ब्राउन ब्रेड’
* एफएसएसएआई मानकों के उल्लंघन का खुलासा
* खाद्य विश्लेषण रिपोर्ट में उपभोक्ताओं को गुमराह करने की पुष्टि
* फूड सेफ्टी एक्ट की धारा 52 और 66 के तहत न्यायनिर्णय हेतु प्रकरण दाखिल, प्रत्येक आरोपी पर 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान
अमरावती/दि.4 – ऑनलाइन ग्रोसरी प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट के माध्यम से ग्राहकों को बेची जा रही एक ब्राउन ब्रेड के मामले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बड़ी कार्रवाई की है. जांच में सामने आया कि ‘अजित ब्रांड’ की ब्राउन ब्रेड में लगभग 90 प्रतिशत मैदा पाया गया, जबकि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मानकों के अनुसार ब्राउन ब्रेड में गेहूं के आटे का निर्धारित अनुपात होना आवश्यक है. खाद्य विश्लेषण रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि उक्त उत्पाद को ब्राउन ब्रेड के रूप में बेचकर उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा रहा था. इस मामले में अमरावती स्थित ब्लिंकिट के दो केंद्रों तथा नागपुर की अजित बेकरी के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के तहत न्यायालयीन कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
* उपभोक्ता बनकर मंगवाया गया था उत्पाद
सूत्रों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा विभाग को जानकारी मिली थी कि ब्लिंकिट के माध्यम से ग्राहकों को बेची जा रही ब्राउन ब्रेड में गुणवत्ता और संरचना को लेकर गंभीर संदेह हैं. प्रारंभिक जानकारी के बाद अधिकारियों ने निजी तौर पर उक्त उत्पाद का ऑर्डर मंगवाकर उसकी जांच-पड़ताल की. जांच के दौरान यह पाया गया कि जिस उत्पाद को ब्राउन ब्रेड के रूप में बेचा जा रहा है, उसमें मैदे का अनुपात अत्यधिक अधिक है. इसके बाद विभाग ने औपचारिक कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया.
* ब्लिंकिट के दो केंद्रों पर छापा
12 फरवरी 2026 को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने अमरावती के शंकर नगर स्थित ब्लिंकिट केंद्र तथा राठी नगर स्थित ब्लिंकिट केंद्र पर निरीक्षण किया. जांच के दौरान वहां उपलब्ध अजित ब्रांड ब्राउन ब्रेड के नमूने विश्लेषण के लिए लिए गए. इसके साथ ही संबंधित उत्पाद का लगभग 750 रुपये मूल्य का शेष स्टॉक जब्त कर लिया गया. अधिकारियों ने मामले की जानकारी उत्पाद निर्माता अजित बेकरी, नागपुर के संबंध में नागपुर स्थित विभागीय कार्यालय को भी दी.
* नागपुर में भी हुई कार्रवाई
अमरावती से प्राप्त जानकारी के आधार पर नागपुर कार्यालय ने भी कार्रवाई करते हुए संबंधित उत्पाद और उत्पादन प्रक्रिया की जांच शुरू की. अधिकारियों ने नागपुर में चार अलग-अलग स्थानों पर छापामार कार्रवाई की और आवश्यक दस्तावेज एवं नमूने एकत्र किए. इस कार्रवाई के बाद उत्पाद की विस्तृत प्रयोगशाला जांच कराई गई.
* विश्लेषण रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
जून 2026 में प्राप्त खाद्य विश्लेषण रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया कि संबंधित उत्पाद को ब्राउन ब्रेड के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा था, जबकि उसकी वास्तविक संरचना उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाली पाई गई. रिपोर्ट के अनुसार ब्राउन ब्रेड के नाम पर बेचे जा रहे उत्पाद में लगभग 90 प्रतिशत मैदा पाया गया. विशेषज्ञों का कहना है कि ब्राउन ब्रेड खरीदने वाले उपभोक्ता सामान्यतः यह मानकर उत्पाद खरीदते हैं कि उसमें गेहूं के आटे की मात्रा अधिक होगी और वह स्वास्थ्य की दृष्टि से अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प होगा. ऐसी स्थिति में उत्पाद की वास्तविक संरचना और उसके विपणन के तरीके को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं.
* उपभोक्ताओं को गुमराह करने का आरोप
खाद्य विश्लेषण रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि उत्पाद की प्रस्तुति और वास्तविक संरचना के बीच अंतर होने के कारण उपभोक्ताओं के भ्रमित होने की संभावना है. इसी आधार पर इसे खाद्य सुरक्षा कानून के तहत गंभीर मामला माना गया है. खाद्य सुरक्षा विभाग का मानना है कि यदि किसी उत्पाद को ऐसे नाम या स्वरूप में बेचा जाता है जिससे उपभोक्ता उसकी गुणवत्ता, संरचना या पोषण मूल्य को लेकर गलत धारणा बना लें, तो यह खाद्य सुरक्षा कानून का उल्लंघन माना जा सकता है.
* ब्लिंकिट और अजित बेकरी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने मामले में ब्लिंकिट अमरावती तथा अजित बेकरी नागपुर के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट की धारा 52 और धारा 66 के तहत न्यायनिर्णय के लिए प्रकरण दाखिल किया है. अधिकारियों के अनुसार, धारा 52 के तहत भ्रामक या गलत ब्रांडिंग एवं लेबलिंग संबंधी मामलों में प्रत्येक पक्ष पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. मामले का अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी अथवा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होगा.
* ऑनलाइन खाद्य बिक्री पर भी बढ़ी निगरानी
इस कार्रवाई को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से बेचे जा रहे खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता पर निगरानी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग को देखते हुए अब ऐसे उत्पादों की नियमित जांच की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं को मानक अनुरूप और सही जानकारी वाले खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जा सकें. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक ब्रेड उत्पाद तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य उत्पादों की ब्रांडिंग, गुणवत्ता और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है. यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित संस्थानों पर आर्थिक दंड के साथ अन्य नियामकीय कार्रवाई भी की जा सकती है.

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