बावनकुले ने जाति प्रमाणपत्र रद्द करने का कोई आदेश नहीं दिया

मनोज जरांगे के आरोपों पर बीड के निवासी उपजिलाधिकारी की रिपोर्ट

* माजलगांव की पार्षद के ‘सैंपल-33’ रिकॉर्ड की प्रक्रिया नियमानुसार पूरी
बीड /दि.12 माजलगांव की पार्षद रेखा अंकुशराव अंबुरे के कुनबी जाति प्रमाणपत्र को लेकर मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटील द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है. बीड के निवासी उपजिलाधिकारी शिवकुमार स्वामी द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में कहा गया है कि राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बीड जिले में किसी भी व्यक्ति का कुनबी प्रमाणपत्र रद्द करने का कोई आदेश नहीं दिया है. दो दिन पहले जरांगे पाटील ने आरोप लगाया था कि राजस्व मंत्री बावनकुले ने माजलगांव की पार्षद रेखा अंबुरे का जाति प्रमाणपत्र रद्द करने का आदेश दिया है. इसके बाद प्रशासन की ओर से मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की गई.
* पार्षद ने ‘सैंपल-33’ रिकॉर्ड अपलोड करने का किया था अनुरोध
रिपोर्ट के अनुसार, ओबीसी श्रेणी से निर्वाचित पार्षद रेखा अंकुशराव अंबुरे ने मौजे खलवत लिमगांव, तहसील वडवणी से संबंधित कुनबी रिकॉर्ड का ‘सैंपल-33’ जिले की वेबसाइट पर अपलोड करने का अनुरोध किया था. इस आवेदन की जिला अधीक्षक भूमि अभिलेख कार्यालय द्वारा विस्तृत जांच की गई. आवेदक का शपथपत्र और आवश्यक दस्तावेज भी लिए गए. सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित ‘सैंपल-33’ रिकॉर्ड को 24 जून को जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस स्तर पर संबंधित कोई दस्तावेज लंबित नहीं है.
* पूर्व महापौर ने भी की थी शिकायत
इस बीच माजलगांव की पूर्व महापौर सुमन मुंडे ने 1 मई को राजस्व मंत्री को एक आवेदन दिया था. मंत्री कार्यालय से यह आवेदन बीड जिलाधिकारी कार्यालय को भेजा गया और नियमों के अनुसार मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए थे. जांच के बाद निवासी उपजिलाधिकारी शिवकुमार स्वामी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि बावनकुले की ओर से किसी का जाति प्रमाणपत्र रद्द करने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया था.
* क्या है ‘सैंपल-33’?
‘सैंपल-33’ पुराने राजस्व अथवा भूमि अभिलेखों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है. इसमें जमीन के पुराने रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्ति अथवा परिवार से जुड़ी जानकारी दर्ज हो सकती है. कुनबी प्रमाणपत्र के दावे से जुड़े मामलों में ऐसे पुराने अभिलेखों को महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है. मामले में प्रशासन की रिपोर्ट सामने आने के बाद अब जाति प्रमाणपत्र रद्द करने के आदेश के संबंध में लगाए गए आरोपों पर स्थिति स्पष्ट हो गई है.

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