ब्रैडीकार्डिया: जब दिल की धड़कन हो जाए धीमी, तो कब जरूरी है इलाज?
नियमित व्यायाम आवश्यक, कम पल्स रेट पर बीमारी का निष्कर्ष निकालना गलत

अमरावती/दि.14 – आम तौर पर स्वस्थ वयस्क व्यक्ति के दिल की धड़कन एक मिनट में 60 से 100 बार होती है. यदि हृदय की गति लगातार 60 बीट प्रति मिनट से कम हो, तो इसे ब्रैडीकार्डिया कहा जाता है. हालांकि, नियमित रूप से व्यायाम करने वाले एथलीटों में कम हार्ट रेट सामान्य भी हो सकता है. इसलिए केवल कम पल्स रेट के आधार पर बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जाता.
* क्यों होता है ब्रैडीकार्डिया?
बढ़ती उम्र, हृदय के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में बदलाव, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, अंडरएक्टिव थायरॉइड और कुछ दवाएं इसके कारण हो सकती हैं. हृदय की धड़कन बहुत धीमी होने पर शरीर के अंगों तक पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन पहुंचने में परेशानी हो सकती है.
* इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
लगातार थकान और कमजोरी, सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना, थोड़ी दूर चलने पर थक जाना, काम में ध्यान न लगना, पर्याप्त नींद के बावजूद ऊर्जा की कमी, चक्कर आना या अचानक बेहोशी जैसे लक्षण ब्रैडीकार्डिया से जुड़े हो सकते हैं.
* किन लोगों में खतरा अधिक?
60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के अलावा हृदय रोग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और थायरॉइड संबंधी समस्या वाले लोगों में इसका जोखिम अधिक हो सकता है.
* जांच और इलाज
यदि हार्ट रेट कम रहने के साथ चक्कर, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है. ईसीजी और आवश्यक हृदय जांच के जरिए कारण का पता लगाया जाता है. गंभीर इलेक्ट्रिकल कंडक्शन समस्या या लक्षणों वाले कुछ मरीजों में पेसमेकर लगाने की आवश्यकता पड़ सकती है.
* क्या सावधानी रखें?
ब्लड प्रेशर और पल्स की नियमित निगरानी करें. डॉक्टर की सलाह के बिना हृदय संबंधी दवाएं बंद या उनकी मात्रा में बदलाव न करें. धूम्रपान और शराब से बचें तथा संतुलित आहार लें. डॉ. अक्षय ढोरे, कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार, हार्ट रेट कम होने के साथ लगातार थकान, चक्कर, सांस लेने में तकलीफ या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो समय पर ईसीजी और हृदय की जांच करवाना बेहद जरूरी है.





