प्रसव के बाद बिगड़ी हालत, 32 से अधिक ब्लड यूनिट और कंपोनेंट देकर बचाई मां की जान

प्रसूति के बाद हालत हुई थी गंभीर

अमरावती /दि.14 – मेलघाट के बहुल क्षेत्र की 24 वर्षीय मनीषा ढांडे ने जिला महिला अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया. प्रसव के कुछ ही घंटों बाद उनकी हालत गंभीर हो गई और प्लेटलेट्स की संख्या खतरनाक स्तर तक गिर गई. ऐसे समय में डॉक्टरों, ब्लड बैंक कर्मचारियों, आशा सेविकाओं और रक्तदाताओं ने मिलकर मनीषा के लिए रक्त और विभिन्न ब्लड कंपोनेंट्स की व्यवस्था की. पांच दिनों में उन्हें 30 से अधिक यूनिट रक्त एवं रक्तघटक दिए गए. बाद में सुपर स्पेशालिटी अस्पताल में भी उन्हें आवश्यक रक्त उपलब्ध कराया गया. अब उनकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है.
मनीषा को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था. प्रसव के बाद प्लेटलेट काउंट तेजी से गिरने पर 3 अगस्त को उन्हें दोपहर करीब 2 बजे इर्विन के आईसीयू में स्थानांतरित किया गया. स्थिति गंभीर होने के कारण तत्काल रक्त और ब्लड कंपोनेंट्स की जरूरत पड़ी. इर्विन ब्लड बैंक के प्रमुख डॉ. आशीष वाघमारे, जनसंपर्क अधिकारी मिलिंद तायडे और काउंसलर योगेश पानझाड़े ने मेलघाट की आशा सेविका बबीता बावनेकर की मदद से रक्तदाताओं से संपर्क किया. अपील मिलते ही अलग-अलग क्षेत्रों के रक्तदाता आगे आए और जरूरत के अनुसार रक्त व कंपोनेंट्स उपलब्ध कराए.
* पांच दिनों में 30 से अधिक यूनिट
जिला सामान्य अस्पताल में उपचार के दौरान मनीषा को पांच दिनों में एफएफपी की 12, प्लेटलेट्स की 10, पीसीवी की 5, होल ब्लड की 1 और एसडीपी की 2 यूनिट दी गईं. इस तरह कुल 30 यूनिट रक्त एवं विभिन्न ब्लड कंपोनेंट्स दिए गए. इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं होने पर 8 अगस्त को उन्हें सुपर स्पेशालिटी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया. यहां भी तत्काल दो पीसीवी यूनिट उपलब्ध कराई गईं. लगातार उपचार के बाद अब मनीषा की हालत खतरे से बाहर बताई गई है. अस्पताल प्रशासन के अनुसार उनका उपचार अभी जारी है.
* डॉक्टरों से लेकर रक्तदाताओं तक सभी जुटे
मनीषा की जान बचाने के लिए सीएस डॉ. विनोद पवार के मार्गदर्शन में फिजिशियन डॉ. प्रीति मोरे, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुषमा शेंद्रे सहित स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लगातार प्रयास किए. वहीं आशा सेविका बबीता बावनेकर, नर्स सुरेश तायडे, नम्रता सोनवणे, शहीद भगत सिंह राजपुर, आशीष बनसोड़, रोशन जांभेकर, फैजान, संदीप वरघट सहित कई रक्तदाताओं ने जरूरत के अनुसार रक्त एवं विभिन्न कंपोनेंट्स उपलब्ध कराकर मानवता की मिसाल पेश की.

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