अकोला के भारत शिक्षण प्रसारक मंडल पर 5 हजार रुपए का जुर्माना
फर्जी पत्र पर विश्वास रखने पर हाईकोर्ट का झटका

नागपुर/दि.14 – वॉट्सएप ग्रुप पर वायरल होने वाले एक फर्जी शासकीय पत्र पर विश्वास रख गलत वक्तव्य करने से मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने अकोला के भारत शिक्षण प्रसारक मंडल पर 5 हजार रुपए जुर्माना ठोका है. न्यायमूर्ति अनिल पानसरे व न्यायमूर्ति निवेदिता मेहता ने यह फैसला सुनाया.
भारत शिक्षण प्रसारक मंडल द्वारा शिक्षकों की पदभर्ती के लिए बिंदू नामावली प्रमाणित कर मिलने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. इसमें मंडल द्वारा पवित्र पोर्टल पर शिक्षकों के विज्ञापन अपलोड करने की अंतिम अवधी 31 जुलाई 2026 तक बढाई गई है, ऐसा दावा शिक्षा विभाग के एक पत्र का संदर्भ देकर किया था. लेकिन संबंधित पत्र शासन ने कभी जारी नहीं किया और वह फर्जी रहने की बात सरकारी वकील ने न्यायालय के प्रकाश में ला दी. पश्चात न्यायालय ने इस फर्जी पत्र का उगम कहां से हुआ, इस बाबत मंडल से पूछताछ करते हुए शपथ पत्र प्रस्तुत करने के आदेश दिये थे. इस पर जवाब देते हुए मंडल ने शिक्षा से संबंधित वॉट्सएप ग्रुप पर यह पत्र वायरल हुआ था और उसी वॉट्सएप ग्रुप से लिया रहने की जानकारी मंडल ने दी. इस कारण न्यायालय ने मंडल पर जुर्माना ठोंकते हुए इस लापरवाही पर नाराजी व्यक्त की. कोई भी कागजपत्र शोसल मीडिया पर अथवा अन्य किसी भी मार्ग से मिला रहा तो उसकी सत्यता की जांच करना यह शिक्षा संस्था की जिम्मेदारी थी. संस्था द्वारा इसमें पूरी तरह लापरवाही बरती गई. ऐसा न्यायालय ने कहा.
* बिना शर्त मांगी माफी
गलती होने का पता चलते ही संस्था संचालक ने उच्च न्यायालय में बिना शर्त माफी मांगी. न्यायालय ने उनकी माफी स्वीकार की. साथ ही संस्था चालक द्वारा यह याचिका आगे न बढाने का अनुरोध किया रहने से न्यायालय ने इस याचिका का निपटारा किया.





