अमरावती में कितने किलो सोना है गिरवी?
जानकारों के अपने-अपने अनुमान

* मुथुट का फ्रॉड उजागर होने से ग्राहकों में हडकंप
* सोने की तेजी से साहूकारों के हाथ-पांव फूले
अमरावती/दि.14 – मुथुट नामक निजी वित्तीय कंपनी के सोना गिरवी घोटाले ने अमरावती के कई लोगों को हिलाकर रख दिया है. पहले केवल सराफा मार्केट में सोने के आभूषण और वस्तुएं गिरवी रखकर पैसों का काम पूरा किया जाता था. हाल के वर्षों में निजी वित्तीय कंपनियों और बैंकों द्वारा भी सोने के मॉर्गेज लोन शुरु किए जाने से यह प्रश्न उपस्थित किया जा रहा है कि, आखिर अमरावती में कितने किलो सोना गिरवी है? जानकार अपने-अपने अंदाज बता रहे हैं. वहीं सराफा मार्केट के साहूकारो के हाथ-पांव सोने की तेजी के कारण फूल गए हैं.
* मुथुट के कारण सर्वत्र हलचल
मुथुट कंपनी के कथित सोना गिरवी घपले के उजागर होने से अमरावती में खलबली मची है. सर्वत्र हलचल देखी जा रही है. अपने स्वर्णकार और सराफ के पास सोने का दागिना रेहन (गिरवी) रखकर पैसे लेनेवाले छोटे-मोटे लोग चिंतित हो उठे हैं. सोने के रेट एक बार फिर प्रति 10 ग्राम डेढ लाख रुपए पार कर गए हैं. जिससे अपना सोना छुडाने के लिए त्यौहारों के पहले सामान्य लोगों में हडबडी देखी जाती है. वह हलचल स्थानीय सराफा मार्केट के साथ-साथ शहर के विभिन्न भागों में मौजूद स्वर्णकारों और ज्वेलरी दुकानों पर नजर आ रही है.
* सराफा में होता मुख्य कारोबार
स्थानीय सराफा मार्केट में सोने के रेहन रखे जाने का मुख्य कारोबार होता है. पीढियों से अनेक प्रतिष्ठान यह काम कर रहे हैं. कई बडे कारोबारी है, जिन्हें साहूकार कहा जाता है. उनके पास शासन द्वारा प्रदत्त साहूकारी लाईसेंस होते हैं. ऐसे 100 से अधिक अधिकृत परवानाधारक साहूकार अमरावती में रहने की जानकारी उपनिबंधक ने दी. उन्होंने बताया कि, साहूकार को केवल सोना गिरवी रखने का अधिकार होता है. उसकी वह अधिकृत रसीद भी देता है. इस रसीद का आदर्श प्रारुप, मॉडल रहता आया है. जिस पर साहूकार का पूरा नाम और गिरवी व्यवहार की संपूर्ण डिटेल होती है. वर्ष में एक बार उपनिबंधक इस सभी व्यवहार का लेखा-जोखा अपने सामने मंगाकर उसकी जांच कर उस पर सिक्के लगाकर अधिकृत करते हैं. उसका निर्धारित शुल्क भी साहूकार सरकारी खजाने में जमा करते हैं.





