मराठा-ओबीसी आरक्षण पर उदय सामंत का स्पष्ट रुख
किसी का आरक्षण कम कर दूसरे को नहीं देंगे

रत्नागिरी/दि.15 – मराठा आरक्षण के मुद्दे पर राज्य के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने सरकार की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा कि मराठा समाज को आरक्षण देने के लिए किसी अन्य समाज के आरक्षण में कटौती नहीं की जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि मराठा और ओबीसी, दोनों समाजों के साथ न्याय हो. रत्नागिरी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सामंत ने कहा कि मनोज जरांगे और लक्ष्मण हाके दोनों को सरकार का स्पष्ट संदेश है कि किसी का आरक्षण कम करके दूसरे समाज को आरक्षण देने की नीति सरकार की नहीं है. उन्होंने कहा कि भविष्य में भी सरकार इसी भूमिका पर कायम रहेगी. साथ ही उन्होंने कहा कि मनोज जरांगे दोबारा मुंबई में आंदोलन करने के लिए न आएं, इसके लिए सरकार आवश्यक प्रयास करेगी.
* शिंदे के उच्च पद पर पहुंचने की इच्छा में गलत क्या?
उदय सामंत ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ और एकनाथ शिंदे को लेकर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि एकनाथ शिंदे उच्च पद पर बैठें, यह शिवसेना के कार्यकर्ताओं और नेताओं की इच्छा है. इसमें गलत क्या है? उन्होंने कहा कि भाजपा को भी लगता है कि देवेंद्र फडणवीस उच्च पद पर रहें, उसी तरह शिवसेना को अपने नेता के बारे में ऐसी इच्छा रखने का अधिकार है. सामंत ने दावा किया कि कांग्रेस के 18 नगरसेवक और नगराध्यक्ष शिवसेना में शामिल हो रहे हैं और यह एकनाथ शिंदे के नेतृत्व का प्रभाव है. उन्होंने कहा कि एनडीए में एकनाथ शिंदे का महत्वपूर्ण स्थान है.
* आदित्य ठाकरे और अंबादास दानवे पर निशाना
सामंत ने शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के नेता आदित्य ठाकरे पर भी कटाक्ष किया. उन्होंने कहा कि आदित्य ठाकरे का घर से बाहर निकलकर किसी उद्योग को देखने जाना अच्छी बात है. चाकण के उद्योगपतियों से मिलने की इच्छा होना भी अच्छी बात है. अंबादास दानवे की आलोचना पर सामंत ने कहा कि राजनीति में इतनी ‘जलन’ और चिड़चिड़ापन ठीक नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर दानवे को उनके दौरे और कामकाज से परेशानी नहीं है तो वे उनके साथ आकर बैठें. सामंत ने आलोचकों को 2029 के चुनाव में पहले अपना विधानसभा क्षेत्र संभालने की चुनौती भी दी. उन्होंने एकनाथ शिंदे पर हो रही आलोचना को लेकर कहा कि शिंदे की तुलना ऐसे लोगों से करना ‘काजवे और सूर्य’ की तुलना करने जैसा है. सामंत ने दावा किया कि एकनाथ शिंदे और श्रीकांत शिंदे ने अब तक चुनावी हार नहीं देखी है, जबकि उनके आलोचकों के कई रिश्तेदार चुनाव हार चुके हैं.