2 करोड़ की अत्याधुनिक मॉलिक्यूलर लैब ठप

किट के अभाव में बंद हुई कोविड और स्वाइन फ्लू जांच

* दस दिनों से नहीं हो रही आरटी-पीसीआर जांच
* एक लाख रुपये की किट के अभाव में करोड़ों की व्यवस्था बेकार
अमरावती/दि.17-कोरोना महामारी के दौरान स्थापित की गई अमरावती की अत्याधुनिक कोविड-19 मॉलिक्यूलर लैब इन दिनों आवश्यक जांच किटों के अभाव में लगभग ठप पड़ी है. स्थिति यह है कि कोविड-19 के साथ-साथ स्वाइन फ्लू और अन्य वायरल संक्रमणों की जांच भी पिछले करीब दस दिनों से बंद है. इससे जिले में संक्रामक रोगों की निगरानी और समय पर निदान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इस प्रयोगशाला में अत्याधुनिक आरटी-पीसीआर मशीनें और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ उपलब्ध है, लेकिन आवश्यक जांच किट उपलब्ध नहीं होने के कारण पूरी व्यवस्था निष्क्रिय बनी हुई है.

* तीन बार पत्राचार, फिर भी नहीं मिली किट
मॉलिक्यूलर लैब के नोडल अधिकारी ने किट उपलब्ध कराने के लिए जिला शल्य चिकित्सक कार्यालय को कई बार पत्र भेजे हैं. जानकारी के अनुसार 24 जुलाई को पहली बार किट की मांग की गई थी. इसके बाद 29 जुलाई और 13 अगस्त को स्मरण पत्र भी भेजे गए, लेकिन अब तक किट उपलब्ध नहीं कराई गई है. लैब प्रशासन का कहना है कि लगातार पत्राचार और अनुवर्ती कार्रवाई के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया है, जिसके कारण मरीजों की जांच प्रभावित हो रही है.

* स्वाइन फ्लू संदिग्ध की मौत के बाद बढ़ी चिंता
इसी बीच धामनगांव रेलवे तहसील के एक 50 वर्षीय व्यक्ति की मृत्यु ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. मृतक की निजी प्रयोगशाला में हुई जांच रिपोर्ट में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी. हालांकि सरकारी प्रयोगशाला में जांच नहीं हो पाने के कारण शासकीय रिकॉर्ड में उसे स्वाइन फ्लू पॉजिटिव के रूप में दर्ज नहीं किया गया. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मरीज के संपर्क में आए अन्य लोगों के नमूने निजी माध्यम से जांचे गए और उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है. इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर जांच सुविधा बंद होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

* 70 से 80 जांच के लिए चाहिए सिर्फ एक लाख की किट
विशेषज्ञों के अनुसार लगभग एक लाख रुपये मूल्य की जांच किट से 70 से 80 मरीजों के कोविड-19 या स्वाइन फ्लू परीक्षण किए जा सकते हैं. ऐसे में अपेक्षाकृत कम लागत की किट उपलब्ध न होने के कारण करोड़ों रुपये की प्रयोगशाला और महंगी मशीनें उपयोग से बाहर हो गई हैं. स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि समय पर किट उपलब्ध नहीं कराई गई तो संक्रामक रोगों की निगरानी और नियंत्रण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

* क्या कहते हैं अधिकारी?
मॉलिक्यूलर लैब के नोडल अधिकारी प्रा. डॉ. प्रशांत ठाकरे ने बताया कि पिछले दस दिनों से लैब में आवश्यक किट उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए किसी भी मरीज के नमूने की जांच नहीं की जा सकती. किट उपलब्ध कराने के लिए जिला शल्य चिकित्सक को लिखित मांग भेजी गई है और लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. वहीं जिला शल्य चिकित्सक डॉ. विनोद पवार ने कहा कि किट उपलब्ध कराने के लिए विभागीय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. लैब प्रशासन भी इस संबंध में अनुवर्ती कार्रवाई कर रहा है और जल्द ही किट उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा.

* सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना महामारी के दौरान बड़ी लागत से स्थापित की गई प्रयोगशालाओं का उद्देश्य आपात परिस्थितियों में स्थानीय स्तर पर त्वरित जांच सुविधा उपलब्ध कराना था. ऐसे में मात्र किटों की कमी के कारण जांच व्यवस्था बंद होना स्वास्थ्य प्रशासन की तैयारी और संसाधन प्रबंधन पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. वर्तमान में जिले में वायरल बुखार, स्वाइन फ्लू और श्वसन संबंधी संक्रमणों के मामले सामने आ रहे हैं. ऐसे समय में सरकारी जांच व्यवस्था का बाधित होना मरीजों और स्वास्थ्य तंत्र दोनों के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वास्थ्य विभाग कब तक किट उपलब्ध कराकर इस महत्वपूर्ण प्रयोगशाला को पुनः शुरू करता है.

 

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