530 करोड़ की लागत से बने नांदगांवपेठ-पांढुर्णा राष्ट्रीय महामार्ग की थातूरमातूर मरम्मत
घटिया काम बंद कर गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य कराने की रुपेश वालके की मांग

मोर्शी/दि.17– करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए नांदगांवपेठ-मोर्शी-वरुड़-पांढुर्णा राष्ट्रीय महामार्ग पर जगह-जगह गड्ढे और दरारें पड़ने के बावजूद अब उनकी केवल ऊपरी तौर पर मरम्मत किए जाने का मामला सामने आया है. राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस के मोर्शी तहसील अध्यक्ष रुपेश वालके ने आरोप लगाया है कि दरारों और गड्ढों में केवल डस्ट, जला हुआ ऑयल तथा अन्य सामग्री डालकर थातूरमातूर मरम्मत की जा रही है. उन्होंने इस प्रकार के घटिया काम को तत्काल बंद कर सड़क की तकनीकी पद्धति से नए सिरे से मरम्मत कराने की मांग राष्ट्रीय महामार्ग विभाग के कार्यकारी अभियंता से की है.
अमरावती जिले के नांदगांवपेठ से मोर्शी, वरुड़ होते हुए मध्यप्रदेश के पांढुर्णा को जोड़ने वाले करीब 96 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय महामार्ग की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं. करीब 530 करोड़ रुपये की लागत से कुछ वर्ष पहले बनाए गए सीमेंट मार्ग पर कई स्थानों पर बड़ी-बड़ी दरारें, गड्ढे, सड़क धंसने और सीमेंट पैनल खराब होने की शिकायतें सामने आ रही हैं. इससे वाहन चालकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा हो गया है. इस राष्ट्रीय महामार्ग पर करीब साढ़े चार मीटर के कई सीमेंट पैनल बनाए गए हैं. इनमें से अनेक पैनलों में दरारें पड़ गई हैं. कुछ स्थानों पर सड़क धंसने से वाहनों को अचानक झटका लगता है. विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति खतरनाक बनी हुई है. रात के समय गड्ढे और धंसी हुई सड़क दुर्घटना का बड़ा कारण बन सकती है.
नागरिकों का सवाल है कि जिस उद्देश्य से पुराने गड्ढों से भरे डामरी मार्ग को हटाकर करोड़ों रुपये खर्च कर सीमेंट का नया राष्ट्रीय महामार्ग बनाया गया था, यदि वह कुछ ही वर्षों में खराब होने लगा है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? नागरिकों ने राष्ट्रीय महामार्ग विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है. वालके ने कहा कि महामार्ग की समस्याओं को लेकर विभाग और संबंधित ठेकेदार से बार-बार शिकायत करने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई. यदि नागरिकों की जान से खिलवाड़ जारी रहा तो राष्ट्रीय महामार्ग पर तीव्र आंदोलन किया जाएगा, ऐसी चेतावनी भी उन्होंने दी है.
* 530 करोड़ के काम की गुणवत्ता की हो जांच
नांदगांवपेठ से पांढुर्णा महामार्ग के निर्माण कार्य को दो चरणों में पूरा किया गया. नांदगांवपेठ से मोर्शी तक करीब 43 किलोमीटर के चरण पर लगभग 240 करोड़ रुपये, जबकि मोर्शी से पांढुर्णा तक करीब 53 किलोमीटर के चरण पर लगभग 290 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है. इतनी बड़ी राशि खर्च कर बनाए गए मार्ग पर अल्पावधि में ही दरारें और गड्ढे पड़ना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है. इसलिए पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए तथा खराब हो चुके सीमेंट मार्ग को केवल खानापूर्ति के तौर पर पैबंद लगाने के बजाय तकनीकी मानकों के अनुसार खोदकर नए सिरे से तैयार किया जाए, ऐसी मांग रुपेश वालके ने की है.





