चामोर्शी में बनेगा विभागीय मत्स्यव्यवसाय प्रशिक्षण केंद्र
मंत्री नीतेश राणे ने दी मंजूरी

गडचिरोली/दि.18 – जिले में मत्स्यव्यवसाय को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और स्थानीय मछुआरों, आदिवासी समुदाय तथा बेरोजगार युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चामोर्शी में विभागीय मत्स्यव्यवसाय प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा. इस केंद्र को स्थापित करने की मंजूरी मत्स्यव्यवसाय एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे की अध्यक्षता में सोमवार को मंत्रालय में हुई बैठक में दी गई. मंत्री राणे ने केंद्र का काम तेजी से पूरा कर जल्द उद्घाटन के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए.
* 6,500 हेक्टेयर से अधिक जलक्षेत्र उपलब्ध
गडचिरोली जिला जलसंपदा से समृद्ध है. जिले में जिला परिषद के 1,645 तालाब, 23 सिंचाई तालाब, 2,000 से अधिक खेत तालाब और अन्य निजी जलस्रोत उपलब्ध हैं. इन जलस्रोतों के कारण 6,500 हेक्टेयर से अधिक जलक्षेत्र मत्स्यपालन के लिए उपलब्ध है. हालांकि, जिले के अधिकांश मछुआरे आज भी पारंपरिक तरीकों से मत्स्यव्यवसाय करते हैं. मत्स्य उत्पादन बढ़ाने और उपलब्ध जलसंपदा का प्रभावी उपयोग करने के लिए आधुनिक तकनीक के साथ कौशल विकास प्रशिक्षण आवश्यक है. इसी उद्देश्य से चामोर्शी में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है.
* 2.89 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराने को मंजूरी
प्रशिक्षण केंद्र, आधुनिक मत्स्यबीज केंद्र और अन्य संबंधित सुविधाओं के निर्माण के लिए कनेरी स्थित शासकीय दूध शीतकरण केंद्र के अधीन 2.89 हेक्टेयर अनुपयोगी जमीन मत्स्यव्यवसाय विभाग को उपलब्ध कराने की सरकार ने मंजूरी दी है. जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसे जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं.
* नागपुर की सुविधाओं का भी होगा उपयोग
नागपुर स्थित महाराष्ट्र पशु एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय के मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय परिसर में विभागीय मत्स्यव्यवसाय प्रशिक्षण एवं सुविधा केंद्र का काम मई 2026 से शुरू है. ऐसे में नागपुर विभाग के लिए अलग केंद्र बनाने के बजाय गडचिरोली जैसे आदिवासीबहुल जिले में प्रशिक्षण केंद्र विकसित करने पर बैठक में जोर दिया गया.
* मछुआरों और युवाओं को मिलेगा लाभ
चामोर्शी भौगोलिक रूप से सुविधाजनक स्थान होने के कारण गडचिरोली सहित नागपुर विभाग के मछुआरों और मत्स्यपालकों के लिए प्रशिक्षण लेना आसान होगा. केंद्र के माध्यम से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, मछुआरों की आय में वृद्धि करने तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
* आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा केंद्र
प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्र में आधुनिक प्रशिक्षण सभागृह, ऑडियो-विजुअल शिक्षण सुविधा, मत्स्य आहार एवं पोषण प्रयोगशाला, मिट्टी और पानी परीक्षण प्रयोगशाला, किसान मार्गदर्शन केंद्र, प्रशिक्षणार्थियों के लिए छात्रावास, तकनीकी सूचना केंद्र, मत्स्य रोग निदान प्रयोगशाला, पुनर्चक्रित जलसंवर्धन प्रणाली का प्रदर्शन केंद्र और लघु मत्स्य प्रसंस्करण केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.





