कोणार्क के पार्ट-बी ठेके को मंजूरी

अभी जांच अधर में, स्थायी समिति के फैसले पर उठे सवाल

* 45 दिन तक रोके गए प्रस्ताव को मिली हरी झंडी, बकाया भुगतान का रास्ता साफ
* सफाई व्यवस्था, विभागीय जांच और राजनीतिक आरोपों के बीच गरमाया मामला
अमरावती/दि.18 – अमरावती महानगरपालिका की बहुचर्चित और लंबे समय से विवादों में घिरी सफाई ठेकेदार कंपनी कोणार्क इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. को आखिरकार बड़ी राहत मिल गई है. मनपा की स्थायी समिति ने सोमवार को कंपनी के सफाई ठेके के पार्ट-बी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. इस निर्णय के साथ ही कंपनी के लंबित बिलों के भुगतान का रास्ता भी लगभग साफ हो गया है. हालांकि यह मंजूरी ऐसे समय दी गई है, जब कंपनी के कामकाज को लेकर विभागीय जांच के आदेश जारी होने के बावजूद जांच प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है. इसी कारण स्थायी समिति के इस फैसले पर सवाल भी उठने लगे हैं.
* चार प्रमुख जोनों में लागू रहेगा नया करार
स्थायी समिति द्वारा मंजूर किए गए करार के तहत मनपा के जोन क्रमांक-1 (रामपुरी कैंप), जोन-2 (राजापेठ), जोन-4 (बडनेरा) और जोन-5 (भाजी बाजार) क्षेत्र में घर-घर कचरा संकलन, परिवहन तथा स्वच्छता कार्यों की जिम्मेदारी कोणार्क कंपनी के पास रहेगी. इससे पहले कंपनी के पास पार्ट-ए के तहत घनकचरा परिवहन का कार्य था, जबकि अब पार्ट-बी की मंजूरी के बाद सफाई और कचरा संकलन की जिम्मेदारी भी उसी कंपनी के पास रहेगी.
* 29 जून को रोका गया था प्रस्ताव, अब बदल गया फैसला
गौरतलब है कि 29 जून को हुई स्थायी समिति की बैठक में इसी प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार कर दिया गया था. उस समय कंपनी के खिलाफ उठे आरोपों और विभागीय जांच की मांग को देखते हुए प्रस्ताव रोक दिया गया था. लेकिन 17 अगस्त की बैठक में वही प्रस्ताव मंजूर कर दिया गया. इस बदलाव को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं.
* विभागीय जांच के आदेश, लेकिन समिति तक नहीं बनी
कोणार्क कंपनी पर करार के अनुसार वाहन उपलब्ध नहीं कराने, सफाई कार्यों में अनियमितता बरतने तथा अन्य शर्तों के उल्लंघन के आरोप लगे थे. इस मुद्दे को विधान परिषद में विधायक संजय खोडके और विधायक धीरज लिंगाडे ने भी उठाया था. इसके बाद 10 जुलाई को विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए थे. वहीं विधायक रवि राणा की शिकायत के आधार पर 10 अगस्त को संभागीय आयुक्त कार्यालय ने जांच संबंधी पत्र मनपा आयुक्त को भेजा. लेकिन एक माह बीत जाने के बावजूद अब तक जांच समिति का गठन नहीं हो पाया है. ऐसे में जांच लंबित रहने के बावजूद ठेके के पार्ट-बी को मंजूरी मिलने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
* स्थायी समिति बोली- शर्तों का पालन नहीं हुआ तो होगी कार्रवाई
स्थायी समिति के सभापति अविनाश मार्डीकर ने कहा कि प्रस्ताव को मंजूरी देते समय कंपनी पर कई सख्त शर्तें लगाई गई हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि शहरवासियों की सफाई संबंधी शिकायतों को देखते हुए यह प्रस्ताव 45 दिनों तक रोका गया था. यदि कंपनी ने करार की किसी भी शर्त का उल्लंघन किया तो प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी होगी. मार्डीकर के अनुसार कंपनी को अनुबंध के अनुरूप पर्याप्त घंटागाड़ियां, सफाई कर्मचारी और वाहन उपलब्ध कराने होंगे. इसके साथ ही प्रत्येक जोन में कार्यालय तथा वाहनतल की व्यवस्था करना भी अनिवार्य होगा.
* रोजाना 54 सफाई कर्मियों की अनिवार्यता
नई शर्तों के तहत शहर की सफाई व्यवस्था सुचारू रखने के लिए प्रतिदिन कम से कम 54 सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी. कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी प्रभागवार तय की गई है ताकि किसी क्षेत्र में सफाई व्यवस्था प्रभावित न हो.
* कचरे के वजन और बिलों पर रहेगी कड़ी नजर
चूंकि मनपा द्वारा भुगतान प्रति टन कचरे के आधार पर किया जाता है, इसलिए कचरा संकलन और परिवहन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए कई तकनीकी उपाय लागू किए गए हैं. इसके तहत कंपोस्ट डिपो में पहुंचने वाले प्रत्येक वाहन का स्कैनिंग रिकॉर्ड रखा जाएगा. सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य होगी. जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली लागू रहेगी. बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली स्थापित की जाएगी. घर-घर कचरा संकलन के दौरान जियो-टैगिंग और डिजिटल स्कैनिंग की जाएगी. स्थायी समिति ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक दो दिन में संबंधित अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया जाए.
* फॉगिंग और स्प्रिंकलिंग पर भी सवाल
कोणार्क कंपनी के करार में बदलाव के लिए गठित अध्ययन समूह ने शहर में फॉगिंग और स्प्रिंकलिंग की जिम्मेदारी भी कंपनी को देने की सिफारिश की थी. हालांकि बाद में इसके लिए अलग निविदा निकालने की बात सामने आई. मनपा प्रशासन ने दावा किया था कि सभी 22 प्रभागों में स्प्रिंकलिंग पंप उपलब्ध करा दिए गए हैं, लेकिन स्थायी समिति के अनुसार अभी तक अधिकांश क्षेत्रों में फॉगिंग और स्प्रिंकलिंग का काम प्रभावी रूप से शुरू नहीं हो पाया है.
* आवारा पशु और श्वानों पर नियंत्रण के लिए अलग ठेका
बैठक में शहर में बढ़ती आवारा पशु और श्वानों की समस्या पर भी चर्चा हुई. मनपा ने इसके लिए जोनवार अलग कंत्राट प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है. अभियान को गति देने के लिए पशु चिकित्सा विभाग में सेवानिवृत्त सहायक आयुक्त की नियुक्ति भी की जाएगी. कोणार्क के पार्ट-बी को मिली मंजूरी ने एक ओर जहां सफाई व्यवस्था को लेकर नई उम्मीदें जगाई हैं, वहीं लंबित विभागीय जांच और कंपनी के खिलाफ उठ रहे सवालों के कारण यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक तथा प्रशासनिक बहस का विषय बनने की संभावना है.
* अब 20 अगस्त की आमसभा पर टिकी निगाहें
स्थायी समिति की मंजूरी के बाद अब सभी की निगाहें 20 अगस्त को होने वाली मनपा की आमसभा पर लगी हैं. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि पहली आमसभा में कोणार्क के मुद्दे पर जोरदार हंगामा करने वाले कई सत्तापक्ष और विपक्षी पार्षद अब तक चुप हैं. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आमसभा में इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया जाता है.


* ‘जांच भी हो और सफाई भी’
स्थायी समिति सभापति अविनाश मार्डीकर का कहना है कि कोणार्क को एकल सफाई ठेका प्रशासक शासनकाल में दिया गया था और निविदा प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी थी. इसलिए भुगतान रोकना संभव नहीं है, क्योंकि इससे शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो सकती है. हालांकि समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि कंपनी ने अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया तो मनपा के पास दंडात्मक कार्रवाई करने और जुर्माना वसूलने का पूरा अधिकार रहेगा.

Back to top button