अब खाद्य तेल में मिलावट पर एफडीए की सख्ती
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे का बड़ा अभियान शुरू

* खुला तेल बेचने और खरीदने को लेकर दी चेतावनी
* नियम तोड़ने वालों को 7 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा
* सरसों तेल में मिलावट, एक्सपायर्ड तेल की री-पैकिंग और बार-बार इस्तेमाल होने वाले तलने के तेल पर कसा जाएगा शिकंजा
मुंबई/दि.20 – दूध, पनीर, चीज एनालॉग और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ लगातार कार्रवाई के बाद अब खाद्य एवं औषध प्रशासन (एफडीए) ने अपना ध्यान खाद्य तेल क्षेत्र की ओर केंद्रित कर दिया है. एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने गुरुवार को स्पष्ट संकेत दिए कि राज्यभर में खाद्य तेल के उत्पादन, भंडारण, पैकेजिंग और बिक्री की व्यापक जांच शुरू की जाएगी. उन्होंने खुले तेल की बिक्री और खरीद से बचने की अपील करते हुए कहा कि खाद्य तेल में मिलावट और नियमों के उल्लंघन के मामलों में कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें 7 वर्ष के कारावास से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है.
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने पत्रकार परिषद में बताया कि एफडीए की ‘सेव फूड, सेव ड्रग, सेव महाराष्ट्र’ मुहिम के तहत खाद्य तेल क्षेत्र के लिए एक विशेष अनुपालन आदेश (कम्प्लायंस ऑर्डर) जारी किया जा रहा है. राज्य में खाद्य तेल के उत्पादन से लेकर अंतिम बिक्री तक जुड़े सभी प्रतिष्ठानों को इस आदेश का पालन करना होगा.
* खाद्य तेल उद्योग में मिली गंभीर अनियमितताएं
एफडीए की प्रारंभिक जांच में कई चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं. आयुक्त मुंढे ने बताया कि विभाग को कुछ ऐसी खाद्य तेल उत्पादक कंपनियां मिली हैं, जिनका विधिवत पंजीकरण नहीं है. इसके अलावा खाद्य तेल में मिलावट, सरसों तेल में अनधिकृत मिश्रण तथा एक्सपायरी के बाद तेल को दोबारा पैक कर बाजार में बेचने जैसे मामले भी सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि खाद्य तेल में मिलावट केवल उपभोक्ता के साथ आर्थिक धोखाधड़ी नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है. ऐसे मामलों को विभाग बेहद गंभीरता से ले रहा है.
* सरसों तेल में किसी प्रकार का मिश्रण नहीं चलेगा
मुंढे ने स्पष्ट किया कि यदि किसी उत्पाद को सरसों तेल के नाम से बेचा जा रहा है तो वह 100 प्रतिशत सरसों तेल होना चाहिए. उसमें किसी अन्य तेल का मिश्रण नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि बाजार में कई स्थानों पर बिना स्रोत और गुणवत्ता की जानकारी वाले खुले तेल की बिक्री हो रही है. उपभोक्ताओं को यह पता नहीं होता कि तेल कहां से आया है, कितने समय से संग्रहित है और उसकी गुणवत्ता क्या है. ऐसे तेलों का सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है.
* खुला तेल बेचने और खरीदने पर रोक की पुनः चेतावनी
एफडीए आयुक्त ने कहा कि खाद्य तेल की बिक्री केवल पैकेजिंग में ही की जा सकती है. खुले तेल की बिक्री पहले से ही नियमों के विरुद्ध है, लेकिन कई स्थानों पर अब भी यह प्रथा जारी है. उन्होंने किराणा व्यापारियों और थोक विक्रेताओं से अपील करते हुए कहा कि वे खुले तेल की खरीद और बिक्री पूरी तरह बंद करें. साथ ही ऑनलाइन विक्रेताओं को भी खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा. मुंढे के अनुसार राज्य में खाद्य तेल क्षेत्र से जुड़े 496 केंद्रीय लाइसेंसधारी प्रतिष्ठान कार्यरत हैं, जिन्हें नए निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा.
* बार-बार इस्तेमाल होने वाले तलने के तेल पर भी कार्रवाई
एफडीए की निगाह अब होटलों, रेस्टोरेंटों और भोजनालयों में उपयोग किए जाने वाले तलने के तेल पर भी है. मुंढे ने कहा कि कई होटल और खाद्य प्रतिष्ठान एक ही तेल का बार-बार उपयोग करते हैं. लगातार गर्म किए गए तेल में रासायनिक परिवर्तन होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हो सकते हैं. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब ऐसे प्रतिष्ठानों की जांच की जाएगी और बार-बार उपयोग किए जा रहे तेल पाए जाने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
* स्वास्थ्य पर पड़ सकते हैं गंभीर दुष्परिणाम
एफडीए आयुक्त ने कहा कि मिलावटी या बार-बार उपयोग किए गए तेल का सेवन अनेक गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है. इनमें कैंसर, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मस्तिष्क संबंधी विकार, पाचन तंत्र की समस्याएं जैसी बीमारियां शामिल हैं. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि लाखों लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा है.
* उपभोक्ताओं के लिए विशेष सलाह
तुकाराम मुंढे ने नागरिकों से अपील की कि वे खाद्य तेल खरीदते समय विशेष सावधानी बरतें. उन्होंने उपभोक्ताओं को सलाह दी कि, केवल सीलबंद पैकेट वाला तेल ही खरीदें. पैकेज पर एफएसएसएआई लाइसेंस और लेबल अवश्य देखें. निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट की जांच करें. बिना ब्रांड और बिना लेबल वाले ढीले तेल से बचें. घरों में भी तलने के तेल का बार-बार उपयोग न करें. यदि किसी होटल या भोजनालय में बार-बार इस्तेमाल किया गया तेल उपयोग होने की आशंका हो तो वहां भोजन करने से बचें.
* नियम तोड़ने वालों पर सख्त दंड
एफडीए के अनुसार खाद्य तेल से संबंधित नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी. प्रावधानों के अनुसार, गंभीर मामलों में 7 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है. मिलावट के मामलों में 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. भ्रामक विज्ञापन या गलत जानकारी देने पर भी 10 लाख रुपये तक का दंड निर्धारित है.
* ‘सेव फूड, सेव ड्रग, सेव महाराष्ट्र’ अभियान का अगला चरण
दूध, पनीर, चीज एनालॉग और अन्य खाद्य पदार्थों पर हाल की बड़ी कार्रवाइयों के बाद अब एफडीए का फोकस खाद्य तेल उद्योग पर है. तुकाराम मुंढे ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में राज्यभर में तेल उत्पादक कंपनियों, पैकेजिंग इकाइयों, थोक विक्रेताओं, किराना दुकानों और होटल व्यवसायों पर विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा. एफडीए का मानना है कि यदि खाद्य तेल क्षेत्र में गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया गया तो उपभोक्ताओं को मिलावटी और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों से बचाया जा सकेगा.





