ये जनता के प्रतिनिधि है या जनता के दुश्मन?

अमरावती शहर की बदहाली पर भडके पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख

* पत्रवार्ता में शहर के चारों विधायकों पर लगाए बेहद गंभीर आरोप
* बोले – जनता को भगवान भरोसे छोड शहर लूटने में लगे है जनप्रतिनिधि
* नेताओं व प्रशासन की मिलीभगत से शहर के बर्बाद होने की बात भी कही
अमरावती/दि.22 – अमरावती महानगर क्षेत्र में यू तो चार-चार विधायक है. जिसमें से दो विधायक अमरावती व बडनेरा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के नागरिकों द्वारा चुनकर विधानसभा में भेजे गए है. वहीं एक विधायक को स्थानीय निकाय के जनता द्वारा निर्वाचित सदस्यों यानी पार्षदों व नगरसेवकों द्वारा चुनकर अपने प्रतिनिधि के तौर पर विधान परिषद में भेजा गया है. जबकि चौथे विधायक को विधान परिषद में विधायकों के प्रतिनिधि के तौर पर चुना गया है. अमरावती महानगर जनप्रतिनिधियों के मामले में पूरी तरह से परिपूर्ण है. इसके बावजूद भी अमरावती महानगर बदहाली एवं दुरावस्था का शिकार है. जिसके लिए पूरी तरह से विधायकों की अनास्था, अनदेखी व अकर्मण्यता को जिम्मेदार कहा जा सकता है. क्योंकि इन विधायकों द्वारा आम जनता से जुडे विषयों पर कोई ध्यान ही नहीं दिया जा रहा. बल्कि आम जनता को भगवान भरोसे छोड कर रख दिया गया है. जिसका खामियाजा अमरावती महानगर के 7 से 8 लाख नागरिकों को भुगतना पड रहा है. वहीं दूसरी ओर कुछ मुठ्ठीभर लोगों द्वारा अमरावती शहर के हिस्से में आनेवाली निधि की जबरदस्त लूट खसोट की जा रही है और जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों के बीच साफ तौर पर आपसी मिलीभगत के साथ कमिशन की बंदरबांट चल रही है. यहीं वजह है कि, मनपा सहित पुलिस प्रशासन के अधिकारी अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों की एक भी बात को नहीं सुनते. जिसके चलते शहर में मनपा सहित सभी महकमों के अधिकारियों की एक तरह से मनमानी चल रही है. इस आशय का आरोप कांग्रेस नेता व पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने आज यहां बुलाई गई पत्रवार्ता में लगाया.
इस पत्रवार्ता में पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने कहा कि अमरावती महानगर क्षेत्र में विधानसभा और विधान परिषद मिलाकर चार-चार विधायक होने के बावजूद शहर की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है. सड़कें टूटी हुई हैं, सफाई व्यवस्था ध्वस्त है, अपराध बढ़ रहे हैं, अवैध धंधे फल-फूल रहे हैं, यातायात व्यवस्था अस्त-व्यस्त है और नागरिक सुविधाएं लगातार प्रभावित हो रही हैं. इसके बावजूद शहर के जनप्रतिनिधि इन मुद्दों पर मौन साधे हुए हैं. उन्होंने कहा कि आज अमरावती के 7 से 8 लाख नागरिकों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है. जनता से जुड़े मूलभूत प्रश्नों की अनदेखी की जा रही है, जबकि दूसरी ओर विकास निधियों और ठेकों के माध्यम से कुछ चुनिंदा लोगों के हित साधे जा रहे हैं.
* जनप्रतिनिधियों की पकड़ खत्म, अधिकारी चला रहे मनमानी
पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि आज प्रशासन पर जनप्रतिनिधियों का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है. परिणामस्वरूप अधिकारी मनमाने ढंग से निर्णय ले रहे हैं और जनता की सुनवाई नहीं हो रही. उन्होंने कहा कि नगर निगम में हर नया आयुक्त आते ही सबसे पहले सफाई ठेकों और बड़े आर्थिक ठेकों की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. करोड़ों रुपये के इन ठेकों पर सवाल उठने के बावजूद स्थानीय विधायक चुप्पी साधे रहते हैं. पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि जनप्रतिनिधि इतने बड़े मामलों पर कुछ नहीं बोल रहे हैं तो आम नागरिकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर उनकी चुप्पी के पीछे क्या कारण है. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की खब्बूगिरी और आर्थिक हितों का खामियाजा पूरे अमरावती शहर को भुगतना पड़ रहा है.
* कभी देश के श्रेष्ठ शहरों में था अमरावती
अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने कहा कि वर्ष 1999 से 2009 तथा 2014 से 2019 के दौरान विधायक, वित्त राज्यमंत्री और पालकमंत्री रहते हुए उन्होंने प्रशासन पर प्रभावी नियंत्रण रखा था और शहर के विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए थे. उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2018 में केंद्र सरकार के ‘ईज ऑफ लिविंग इंडेक्स’ सर्वेक्षण में अमरावती देश के 111 शहरों में 16वें स्थान पर था तथा महाराष्ट्र में पांचवें क्रमांक पर पहुंचा था. उस समय शहर नागपुर, नाशिक और सोलापुर जैसे बड़े शहरों से भी आगे था. उनके अनुसार उस दौर में अमरावती स्वच्छ, व्यवस्थित और विकासशील शहर के रूप में पहचाना जाता था, लेकिन वर्तमान में स्थिति पूरी तरह उलट चुकी है. उन्होंने कहा कि आज शहर की पहचान विकास के बजाय अव्यवस्था, गंदगी और अपराधों के कारण हो रही है.
* एनिमी ऑफ द पीपल की अवधारणा से जोड़ा अमरावती का हाल
पत्रकार परिषद में पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने प्रसिद्ध नॉर्वेजियन नाटककार हेनरिक इब्सेन के चर्चित नाटक एनिमी ऑफ द पीपल का उल्लेख करते हुए कहा कि जब सत्ता और प्रशासन जनता के हितों की उपेक्षा करने लगते हैं, तब वही जनता के सबसे बड़े शत्रु बन जाते हैं. उन्होंने कहा कि अमरावती में भी आज यही स्थिति दिखाई दे रही है. जनता के मूलभूत प्रश्नों को नजरअंदाज किया जा रहा है, जबकि राजनीतिक लाभ और ठेकेदारी व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है.
* विधानमंडल में नहीं उठी अमरावती की आवाज
पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने आरोप लगाया कि हाल ही में संपन्न हुए विधानमंडल के पावस सत्र में अमरावती के चारों सत्ताधारी विधायकों में से किसी ने भी शहर की प्रमुख समस्याओं को विधानसभा या विधान परिषद में प्रभावी ढंग से नहीं उठाया. उन्होंने कहा कि विडंबना यह है कि अमरावती के बाहर के नेता शहर के प्रश्न उठा रहे हैं. कांग्रेस के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधायक धीरज लिंगाडे ने विधान परिषद में अमरावती की सफाई व्यवस्था और कोणार्क कंपनी को दिए गए ठेके में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया, जबकि स्थानीय जनप्रतिनिधि मौन रहे. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मामले में तीन महीने के भीतर जांच का आश्वासन दिया था, लेकिन एक माह बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही. बडनेरा विधायक रवि राणा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वे स्वयं विधानमंडल आश्वासन समिति के अध्यक्ष हैं, लेकिन सरकार का दिया गया आश्वासन भी पूरा नहीं हो पाया.
* कोणार्क स्वच्छता ठेका बना निशाने पर
पत्रकार परिषद का सबसे बड़ा मुद्दा नगर निगम का बहुचर्चित कोणार्क स्वच्छता ठेका रहा. पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने आरोप लगाया कि प्रभाग आधारित सफाई व्यवस्था समाप्त कर पहले झोन आधारित और बाद में पूरे शहर का एकल सफाई ठेका कोणार्क कंपनी को देकर शहर को गंदगी के हवाले कर दिया गया. उन्होंने कहा कि कंपनी पर लगाए गए लगभग दो करोड़ रुपये के दंड को घटाकर केवल 15 लाख रुपये कर दिया गया. यह निर्णय किन दबावों में लिया गया और इसके पीछे कौन-सी शक्तियां काम कर रही थीं, इसका जवाब आज तक नहीं मिला. उन्होंने यह भी कहा कि विधान परिषद में मामला उठने और विभागीय जांच के आदेश जारी होने के बावजूद जांच की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही है. इसके बावजूद कंपनी के ठेके के दूसरे भाग को भी मंजूरी दे दी गई. पूर्व मंत्री ने कहा कि नगर निगम आयुक्त निरीक्षण और फोटो सेशन तक सीमित रह गए हैं, जबकि जमीनी स्तर पर शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है.
* सत्ता पक्ष के नेताओं की दोहरी भूमिका पर सवाल
पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने कहा कि एक ओर विधान परिषद में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक संजय खोडके कोणार्क ठेके का विरोध करते हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी ही पार्टी से जुड़े मनपा के स्थायी समिती सभापति भुगतान की फाइलों को मंजूरी देते हैं. उन्होंने इसे राजनीतिक विरोधाभास और दोहरी भूमिका बताते हुए कहा कि जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है.
* संपत्ति कर वृद्धि पर सत्ताधारियों को घेरा
मनपा द्वारा लागू की जा रही संपत्ति कर वृद्धि को लेकर भी पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि प्रशासक काल में वर्ष 2022-23 में संपत्ति कर में भारी वृद्धि की गई थी. विधानसभा चुनाव से पहले इस वृद्धि को स्थगित कर जनता को राहत देने का दावा किया गया, लेकिन अब स्थगन हटाकर वही बढ़ा हुआ कर फिर लागू किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि नागरिकों को यह विश्वास दिलाया गया कि कर वृद्धि रद्द कर दी गई है, जबकि वास्तविकता में केवल उसे अस्थायी रूप से रोका गया था. पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने कहा कि मनपा का इरादा केवल नई कर दरें लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले तीन वर्षों का अंतर भी नागरिकों से वसूलने की तैयारी कर रहा है. इससे लाखों नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा. उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले इस मुद्दे पर आवाज उठाने वाले जनप्रतिनिधि अब पूरी तरह मौन हैं.
* व्यापारियों के प्रश्न वर्षों से लंबित
पूर्व पालकमंत्री डॉ. देशमुख ने कहा कि मनपा के व्यावसायिक संकुलों में एक रुपये प्रति वर्गफुट के किराये पर दी गई दुकानों की लीज वर्ष 2018 में समाप्त हो चुकी है. इसके बावजूद 200 से 300 व्यापारियों के मामलों में मनपा कोई ठोस निर्णय नहीं ले पा रहा. वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों पर बढ़ा हुआ संपत्ति कर थोपने की तैयारी की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि मनपा की आय बढ़ाने वाले कई बीओटी आधारित व्यावसायिक संकुलों के किराये भी वर्षों से नहीं बढ़ाए गए, जिससे निगम को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है.
* खुद विधायक मान रहे हैं कि अवैध धंधे चल रहे हैं
पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने भाजपा विधायक प्रवीण पोटे पाटिल के उस बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने वरली मटका और सट्टा कारोबार बंद नहीं होने पर सड़क पर उतरने की चेतावनी दी थी. पूर्व मंत्री देशमुख ने कहा कि यह बयान स्वयं इस बात की स्वीकारोक्ति है कि उनकी ही सरकार के कार्यकाल में अमरावती में अवैध धंधे खुलेआम चल रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब शहर के चारों विधायक सत्ता पक्ष से हैं तो फिर अपराध और अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है.
* क्राइम कैपिटल बनने की ओर अमरावती
पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने कहा कि हत्या, सट्टा, अवैध कारोबार और अन्य अपराधों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. अमरावती की पहचान अब विकासशील शहर के बजाय विदर्भ के क्राइम कैपिटल के रूप में बनने लगी है. उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था पर बयानबाजी तो बहुत हो रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देती.
* सड़क हादसे और यातायात व्यवस्था पर उठाए प्रश्न
राजापेठ क्षेत्र में हुए सड़क हादसे का उल्लेख करते हुए पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने कहा कि घटना में एक युवती और एक महिला की मृत्यु हो गई, लेकिन 20 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी किसी जिम्मेदार यातायात पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी शहर में बिना नंबर प्लेट और बिना पासिंग वाले गिट्टी-बोल्डर से भरे ट्रक खुलेआम दौड़ रहे हैं. उनका आरोप था कि इस पूरे तंत्र में नीचे से ऊपर तक संरक्षण और हिस्सेदारी का खेल चल रहा है, जिसके कारण कार्रवाई नहीं होती.
* हॉकर्स, अतिक्रमण और यातायात व्यवस्था पर चिंता
पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने कहा कि शहर में अतिक्रमण और अनधिकृत हॉकर्स की समस्या लगातार बढ़ रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायकों ने इस विषय पर कभी गंभीरता से नगर निगम प्रशासन के साथ बैठक तक नहीं की. परिणामस्वरूप यातायात व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है और आम नागरिकों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
* अधूरे पड़े विकास कार्यों की लंबी सूची
पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने कहा कि शहर के अनेक महत्वपूर्ण विकास कार्य वर्षों से अधूरे पड़े हैं या बदहाल स्थिति में हैं. उन्होंने जिन प्रमुख परियोजनाओं का उल्लेख किया, उनमें राजकमल रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण, चित्रा चौक से नागपुरी गेट तक प्रस्तावित फ्लाईओवर, अमरावती-मुंबई एक्सप्रेस ट्रेन से जुड़ी सुविधाएं, बेलोरा विमानतल पर नाइट लैंडिंग सुविधा, ऐतिहासिक परकोटे का संरक्षण, फिशरीज हब परियोजना, भूमिगत सीवरेज योजना के गृह कनेक्शन, मेडिकल कॉलेज परियोजना, इर्विन और डफरीन अस्पतालों से जुड़ी योजनाएं, ऑक्सीजन पार्क, रोज गार्डन और अन्य उद्यानों का रखरखाव, साइंसकोर मैदान का संरक्षण शामिल हैं. उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में विकसित किए गए छत्री तालाब, वडाली तालाब, साइंसकोर मैदान और ऑक्सीजन पार्क जैसी परियोजनाएं भी आज उपेक्षा का शिकार हैं. उपरोक्त मुद्दो का उल्लेख करते हुए पूर्व मंत्री देशमुख ने आरोप लगाया कि कई मामलों में विकास कार्य आगे बढ़ाने के लिए नागरिकों और सामाजिक संगठनों को जनहित याचिकाओं का सहारा लेना पड़ रहा है, जो जनप्रतिनिधियों की विफलता को दर्शाता है.
* जनता को केवल चुनाव के समय याद किया जाता है
पत्रकार परिषद के समापन पर पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने कहा कि अमरावती के अधिकांश जनप्रतिनिधि केवल चुनावी मौसम में जनता के बीच दिखाई देते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जीत के बाद नागरिकों की समस्याओं से उनका कोई सरोकार नहीं रहता. जनता की समस्याओं को दरकिनार कर ठेकेदारी व्यवस्था, राजनीतिक स्वार्थ और आर्थिक हितों को बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जब शहर की सड़कें टूटी हों, सफाई व्यवस्था चरमरा गई हो, अपराध बढ़ रहे हों, करों का बोझ बढ़ाया जा रहा हो, विकास कार्य अधूरे पड़े हों और जनप्रतिनिधि मौन हों, तब नागरिकों को यह सवाल पूछने का पूरा अधिकार है कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि वास्तव में जनता के हित में काम कर रहे हैं या फिर जनता के सबसे बड़े दुश्मन बन चुके हैं. पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने अंत में कहा कि अब अमरावती की जनता को स्वयं तय करना होगा कि शहर की वर्तमान स्थिति के लिए जिम्मेदार लोगों को वह भविष्य में क्या जवाब देती है.
इलेक्टेड, सिलेक्टेड व नॉमिनेटेड के साथ अमरावती में सेल्फ डिक्लियर्ड विधायक भी
इस पत्रवार्ता के दौरान मीडिया कर्मियों द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में पूर्व मंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने कहा कि, अमरावती में चार की बजाए कुल पांच विधायक है. जिसमें से दो इलेक्टेड यानी जनता द्वारा निर्वाचित, एक सिलेक्टेड यानी जनप्रतिनिधियों द्वारा चुना गया व एक नॉमिनेटेड यानी राज्य सरकार द्वारा नामित ऐसे कुल चार विधायकों के साथ ही एक सेल्फ डिक्लियर्ड यानी स्वयंघोषित विधायक भी है. लेकिन समस्या यह है कि, जब निर्वाचित व नामित विधायकों द्वारा ही कोई काम नहीं किया जा रहा तो स्वयंभू कथित विधायक रहनेवाले व्यक्ति से क्या ही उम्मीद की जा सकती है
* निरंकुश तानाशाह के राज में दिल्ली से लेकर गली तक भ्रष्टाचार
इस पत्रवार्ता में डॉ. सुनील देशमुख ने इशारों ही इशारों में भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि, देश में विगत 12 वर्षों से लगभग निरंकुश तानाशाही चल रही है. जिसमें विपक्षी दलों सहित आम जनता की आवाज के लिए कोई जगह नहीं. पूरे देश को कुछ चुनिंदा औद्योगिक घरानों के हवाले कर दिया गया. जिसके चलते दिल्ली से लेकर गली तक हर ओर भ्रष्टाचार ही चल रहा है. अमरावती मनपा क्षेत्र में अदानी कंपनी को गैस आपूर्ति हेतु भूमिगत पाईप लाईन डालने के संदर्भ में राज्य सरकार द्वारा दी गई अनुमति का उल्लेख करते हुए पूर्व मंत्री डॉ. देशमुख ने कहा कि, कंपनी द्वारा अमरावती मनपा क्षेत्र में खुदाई की जाएगी. जिसके लिए कंपनी को अमरावती मनपा से कोई अनुमति या मंजूरी लेने की जरूरत ही नहीं रखी गई है. यानी अमरावती मनपा के अधिकार पर राज्य सरकार द्वारा सीधे-सीधे अतिक्रमण किया गया है. इसी तरह अमरावती मनपा की साढे सात एकड जमीन को मात्र 12 हजार रूपये प्रति माह के किराये पर बीपीसीएल कंपनी को देने का निर्णय लिया गया है. जाहीर तौर पर दोनों कंपनियां कोई चैरिटी का काम नहीं कर रही, बल्कि लाभदायक व्यवसाय कर रही है. लेकिन इसके बावजूद अमरावती के किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा इसके खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहा जा रहा. जिसके जरीए समझा जा सकता है कि, स्थानीय जनप्रतिनिधि अपने नेताओं के सामने किस हद तक हतबल व मजबूर है.

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