मनोज जरांगे ‘संघर्ष योद्धा’ नहीं, बल्कि 5,000 करोड़ के ‘टेंडर योद्धा’!
विखे पाटील से मिलीभगत

* ठेके हड़पने का अजय बारस्कर का आरोप
* दस्तावेज ईडी को सौंपने का ऐलान
मुंबई /दि.7- मनोज जरांगे अब मराठा समाज के संघर्ष योद्धा नहीं रहे, बल्कि भ्रष्ट ठेकेदारों की टोली चलाने वाले ‘टेंडर योद्धा’ बन गए हैं. जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील के साथ गुप्त मिलीभगत करके जरांगे की टोली ने कुल 5,426 करोड़ रुपये के टेंडर मैनेज किए, जिनमें से 3,770 करोड़ रुपये के काम सीधे हड़प लिए गए. एक तरफ मराठा युवाओं का खून बहाना और दूसरी तरफ समाज को बेचकर अपनी तिजोरी भरना-यह पाप का कारोबार चल रहा है. यह गंभीर और सनसनीखेज आरोप अजय बारस्कर ने लगाया है.
मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बारस्कर ने मनोज जरांगे पाटील, मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील और उनके करीबी लोगों के कथित आर्थिक लेन-देन से जुड़े दस्तावेज दिखाते हुए तीखी आलोचना की. उन्होंने यह भी कहा कि इस कथित बड़े घोटाले से जुड़े सभी दस्तावेज वे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंपेंगे.
* रिश्तेदार रेत चोरी में, ठेकेदारों की टोली
जरांगे के कथित आर्थिक सिंडिकेट का आरोप लगाते हुए अजय बारस्कर ने कहा, जरांगे के घर के लोग रेत चोरी में शामिल हैं. मनोज जरांगे की पत्नी के भाई विलास खेडकर खुले तौर पर रेत चोरी करते हैं. उनका ‘अदृश्य हाथ’ कहे जाने वाले संजय कटारे भी रेत चोरी में शामिल हैं. उन्होंने मार्च 2023 में 4 करोड़ रुपये से अधिक की रेत चोरी की थी. ब्लैकलिस्ट में शामिल और केवल आईटीआई पास इस ठेकेदार को 14 करोड़ रुपये के सरकारी काम कैसे मिल गए? छत्रपति संभाजीनगर में प्रोझोन मॉल के सामने क्रीम एरिया में करोड़ों रुपये का प्लॉट खरीदने के लिए इनके पास पैसा कहां से आया?
* विखे पाटील से कथित आर्थिक मिलीभगत
बारस्कर ने आरोप लगाया, ठेकेदार किशोर बलांडे सीधे मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील की गाड़ी से आंदोलन स्थल पर आया था. इसके बाद उसे आंदोलन के मंच पर भी जगह दी गई. विखे पाटील ने इस सिंडिकेट टोली को टेंडर के लिए 5,426 करोड़ रुपये के काम उपलब्ध कराए. इनमें से 3,770 करोड़ रुपये के टेंडर बलांडे, पाटील, धुमाल सहित पांच-छह ठेकेदारों ने मिलीभगत करके हासिल किए हैं.
* किसानों के 82 करोड़ रुपये डायवर्ट करने का आरोप
बारस्कर ने कहा, जिन कामों की जरूरत नहीं थी, उनकी फर्जी सूची तैयार की गई. अनुमानित लागत को जरूरत से ज्यादा बढ़ाकर टेंडर मैनेज किए गए. किसानों के सूखा राहत अनुदान और सहायता के 82 करोड़ रुपये निकालकर बलांडे और मेंगरे नामक ठेकेदारों को दे दिए गए.
* जमीन खरीद और बंद कमरे में हुई बैठकों पर सवाल
जरांगे के गरीब और साधारण जीवन जीने के दावे पर सवाल उठाते हुए बारस्कर ने संपत्ति का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा, जरांगे हमेशा अपने भाषणों में कहते हैं कि मराठों पर जमीन बेचने की नौबत आ गई है. फिर उनके सगे भतीजे (स्वस्तिक) ने करोड़ों रुपये की जमीन कैसे खरीदी? आप्पासाहेब कुढेकर के नाम पर 98 एकड़ जमीन कैसे खरीदी गई? इतनी बड़ी संपत्ति का स्रोत क्या है?
* अशोक चव्हाण और विखे के साथ बंद कमरे में क्या हुआ?
बारस्कर ने सवाल किया, जो जरांगे यह दिखावा करते हैं कि वे कभी बंद कमरे में चर्चा नहीं करते, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के साथ बंद दरवाजे के पीछे क्या बातचीत की? इसी तरह जब मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील और जरांगे एक साथ थे, तब मीडिया प्रतिनिधियों को कमरे से बाहर क्यों निकाल दिया गया? वहां आखिर कौन-सी सौदेबाजी हुई?
* जरांगे आधुनिक ‘रहमान डकैत’; सभी सबूत एऊ को देने का दावा
जरांगे की भूमिका की कड़ी आलोचना करते हुए बारस्कर ने कहा, अगर कोई कानूनी तरीके से पैसा कमाता है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन मराठा आरक्षण के नाम पर निर्दोष समाज की भावनाओं से खेलकर और समाज को बेचकर खड़ा किया गया यह पाप का साम्राज्य मैं नष्ट किए बिना शांत नहीं बैठूंगा. मनोज जरांगे समाजसेवक नहीं, बल्कि आधुनिक ‘रहमान डकैत’ हैं.
* तनिष्क दुकान के पीछे छिपी कथित टोली
बारस्कर ने आरोप लगाया, कृष्णा खोरे विकास महामंडल के कामों में गड़बड़ी करने वाला हेमंत उर्फ हणमंत धुमाल और उसकी टोली पुणे की बड़ी दुकानों और सर्राफा पेढ़ियों के पीछे छिपी हुई है. जरांगे खुद कहते थे कि उनकी पत्नी भीख मांगती थीं और तीन महीने तक उन्होंने 500 रुपये का नोट नहीं देखा. लेकिन आज उनके लिए इस्तेमाल होने वाली आलीशान गाड़ियां ठेकेदार किशोर बलांडे की हैं. बारस्कर ने अंत में कहा, इस पूरे कथित महाघोटाले से जुड़े बैंक खातों और आर्थिक लेन-देन के दस्तावेज मैं जल्द ही सीधे एऊ को सौंपूंगा. इस कथित घोटाले का खुलासा करने के कारण मेरी जान को गंभीर खतरा पैदा हो गया है. शिकायत करने के बावजूद पुलिस मुझे पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे रही है.





