आंबिया बहर गल जाने से करोडों का नुकसान
प्रतिकूल जलवायु का प्रभाव

* खेती-किसानी के वैज्ञानिकों का कहना
अमरावती/दि.25- संतरा और मौसंबी उत्पादक किसान आंबिया बहर के फल गल जाने से संकट में आ गए है. प्रतिकूल जलवायु का ऐसा असर हुआ है कि, इस क्षेत्र में किसानों का करोडों रुपए का नुकसान हो गया है. वहीं कृषि वैज्ञानिकों ने इसे जलवायु परिवर्तन बताया और किसानों को नैसर्गिक और जैविक उपायों को अपनाने का आवाहन किया है. जिससे पेडों से फलों का गलना, गिरना रोका जा सके.
* फफूंद ने भी किया कबाडा
विदर्भ में मुख्य रुप से तीन कारणों के कारण संतरा और मौसंबी जैसे साइट्रेस फल गलकर गिरते है. बारिश के कारण जमीन से जडों को प्राणवायु नहीं मिलती और वे खराब होती है. जिससे फल पीले होकर गलकर गिर जाते है. फायटोप्थोरा और कोलेटोट्रीकम जैसी फफूंद के कारण भी फलों के तनो पर काले दाग हो जाते है. फल खराब होते है. डॉ. पंजाबराव कृषि विद्यापीठ के संशोधन प्रकल्प के वैज्ञानिकों ने बताया कि, मख्खियों और रस चूसनेवाले पतंगों के उपद्रव के कारण भी फल गल रहे है.
* एक लाख हेक्टेयर में नुकसान
उन्होंने यह भी बताया कि, अमरावती सहित पश्चिम विदर्भ के एक लाख हेक्टेयर में संतरा और मौसंबी के पेडों में समस्या दिखलाई दे रही है. फल पीले हो रहे है. इससे बचाव के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक और जैविक उपायों को अपनाने का आवाहन किया है. उन्होंने बताया कि, फल पीले पड रहे है, तो पांच प्रतिशत निंबोली अर्क अथवा निंबोली तेल का छिडकाव किया जाना चाहिए, इससे फल गलना रुक जाएगा.
* यह उपाय करें किसान
– कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को महत्वपूर्ण टिप्स दिए है. जिसमें संतरा बगीचों के आसपास एकत्र हुए पानी को तत्काल हटा देने कहा है. ऐसे पानी के कारण फफूंद की आशंका बढ जाती है. इसलिए गले हुए फल और पत्ते जमा कर गहरे गड्ढे में डाल देने और गड्ढा बुझा देने कहा है.
– बगीचे में फलों का ढेर न बनने दें. लगातार बारिश शुरु रहने पर कीटनाशक का उपयोग टाले. शाम 7 से 11 बजे के दौरान बगीचे की मेड (बांधा) पर घास जलाकर धुआं होने दें.
– मख्खिया नियंत्रण के लिए प्रति हेक्टेयर 25 जाल झाडों पर लगाने के आवाहन कृषि विभाग ने किया है.





