भारतीय परंपराओं के सुदृढ वैज्ञानिक आधार

राधाकृष्ण सेवा समिति के महाआरती उत्सव में बोली रामप्रियाश्री जी

* पुत्रदा एकादशी पर बतलाया पुत्र का सही अर्थ
अमरावती/दि.25– पुत्र का मतलब होता है जो खुद को और अपने पुरखों को तारने वाला. बेटा का अर्थ बंटवारा करने वाला और लड़के का अर्थ होता है लड़ के लेने वाला. इसलिए अपने बच्चों को पुत्र और पुत्री ही संबोधित करने का प्रयास करें. यह आवाहन शहर की प्रसिध्द मनीषी और प्रवक्ता रामप्रियाश्री जी ने किया. वे गत रविवार राधाकृष्ण सेवा समिति द्वारा धनराज लेन स्थित राधाकृष्ण मंदिर में एकादशी उत्सव के आयोजन में सावन माह के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी के दिन महाआरती उपलक्ष्य प्रवचन कर रही थी. माई ने बडे ही सारगर्भित उदबोधन में पुत्रदा एकादशी का महत्व बतलाया और युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन किया.
पुत्रदा एकादशी का व्रत, संस्कारी संतान प्राप्त करने हेतु बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना से यह व्रत किया जाता है. बच्चों को सनातन धर्म के प्रति जागरूक करना भी इस व्रत का अहम हिस्सा है. युवा पीढ़ी के भटकती मन की जिज्ञासा को शांत करने में उन्होंने अपनी अहम भूमिका निभाई. माई ने अपने सुंदर शब्दों में सर्वप्रथम सभी एकादशी को अपने आप में श्रेष्ठ और सब की अपनी महिमा है ऐसा कहा. पुत्रदा एकादशी का महत्व भी बताया. उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया के माध्यम से सभी चीज को सुनते हैं समझते हैं पर उसे अपने जीवन में साधते नहीं है. रसगुल्ला का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे हम उसकी कितनी भी तारीफ करें पर जब तक उसे खाकर नहीं देखेंगे उसका स्वाद नहीं समझेगा. जीवन की सफलता के लिए मेहनत और योजना का होना बहुत जरूरी है. समय के महत्व को समझना जरूरी है समय रहते इस बात को समझना जरूरी है नहीं तो बाद में पछतावा ही रह जाना है. धर्म की सूक्ष्म व्याख्या करते हुए माई ने कहा कि मेरी वजह से किसी को पीड़ा ना हो कष्ट ना हो वही धर्म की सही परिभाषा है. सभी समस्याओं का समाधान धर्म ग्रंथ में मिल जाता है. उस को पढ़ने और समझने की जरूरत है. भागवत मरना सिखाती है रामायण जीना सिखाती है और महाभारत जीतना सिखाती है. माई ने महाभारत के पांडव और कौरवों का उदाहरण देते हुए बहुत अच्छी बात कही कि अपने जीवन में पांडव बनो. युधिष्ठिर से युद्ध की स्थिति में भी स्थिर रहना सीखो, भीम से भक्ति भाव, अर्जुन से अर्जित करना और नकुल सहदेव से संयम और नियम सीखने को मिलता है.
सावन मास के निमित्त राधा कृष्ण के हिंडोली दर्शन रखे गए थे. पुत्रदा एकादशी के यजमान स्वर्गीय विनोद जी सुखदेव जी जाजू, श्रीमती पुष्पा देवी रमेश जी काकाणी, श्रीमती उमा देवी सुरेश चंद्र जी सरवैया, सौ. प्रणाली कमल जी डागा, सौ. शिल्पा जी दिलीप जी गाँधी, श्री शिवा भाई आशा भाई पटेल( बडनेरा), स्वर्गीय सौ. शैला जी काबरा जलगांव, स्वर्गीय नरेश जी रामदयाल जी मंत्री( फुल आमला,) श्री गायलमाता परिवार, सौ. अर्चना जी रमन कुमार झंवर, स्वर्गीय हेमवंती चंपालाल जी हेड़ा, श्री गोपाल दास जी राठी सायत थे.ध्वज यजमान मनमोहन जी रामकिशोर जी गग्गड थे.समिति ने सभी का आभार माना.

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