ऐसी घटनाएं होती रहीं, तो सरकारी अस्पतालों पर से लोगों का भरोसा उठ जाएगा

डफरीन अस्पताल अग्निकांड पर भावुक हुईं पूर्व सांसद नवनीत राणा

* मृत नवजातों के परिजनों से मिलते समय छलके आंसू
* हादसे की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग
अमरावती/दि.24 – अमरावती के जिला स्त्री अस्पताल यानी डफरीन अस्पताल की नई इमारत स्थित नवजात शिशु अतिदक्षता विभाग (एनआयसीयू) में सोमवार तड़के लगी भीषण आग में तीन नवजात बच्चों की मौत के बाद पूर्व सांसद एवं भाजपा नेता नवनीत राणा अस्पताल पहुंचीं और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी. इस दौरान शोकाकुल माता-पिता की पीड़ा देखकर नवनीत राणा भावुक हो गईं और उनके आंसू छलक पड़े. अस्पताल परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यदि भविष्य में भी ऐसी घटनाएं होती रहीं, तो गरीब और सामान्य नागरिकों का सरकारी अस्पतालों पर से विश्वास उठ जाएगा.
तीन मासूमों की मौत को बेहद पीड़ादायक बताते हुए पूर्व सांसद नवनीत राणा ने कहा कि तीन नवजात बच्चों की मौत केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का नुकसान है. जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को खोया है, उनके दर्द को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. मृत बच्चों के परिजनों से बातचीत के दौरान उन्होंने उन्हें ढांढस बंधाया और आश्वस्त किया कि सरकार उनके साथ खड़ी है. उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.
पूर्व सांसद नवनीत राणा ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वेंटिलेटर में विस्फोट के बाद आग लगने की बात सामने आ रही है, लेकिन इसकी विस्तृत जांच आवश्यक है. उन्होंने सवाल उठाया कि आग लगने के बाद अस्पताल की अग्निशमन व्यवस्था तत्काल सक्रिय क्यों नहीं हुई? यदि भवन में स्प्रिंकलर सिस्टम लगा था, तो वह क्यों चालू नहीं हुआ? अस्पताल का फायर ऑडिट समय पर हुआ था या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए और यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या कर्तव्य में चूक सामने आती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए.
पूर्व सांसद नवनीत राणा ने कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि दुर्घटना किसी की लापरवाही के कारण हुई है, तो संबंधित अधिकारियों या जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी. ऐसे मामलों में सदोष मनुष्यवध का अपराध दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि मासूम बच्चों की जान जाने जैसी घटनाओं को सामान्य दुर्घटना मानकर नहीं छोड़ा जा सकता और जवाबदेही तय होना आवश्यक है.
भाजपा नेत्री व पूर्व सांसद नवनीत राणा ने कहा कि जिले और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों गरीब परिवारों के लिए जिला स्त्री अस्पताल सबसे बड़ा सहारा है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार निजी अस्पतालों का खर्च वहन नहीं कर सकते, इसलिए वे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर रहते हैं. उन्होंने कहा कि लगभग दो वर्ष पूर्व ही अस्पताल की नई इमारत शुरू हुई थी. ऐसे में इतनी गंभीर दुर्घटना होना कई सवाल खड़े करता है. उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग संबंधित मंत्रियों और सरकार के समक्ष रखी गई है.
पूर्व सांसद नवनीत राणा ने अस्पताल की क्षमता बढ़ाने की मांग उठाते हुए कहा कि अमरावती और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में मरीज डफरीन अस्पताल में उपचार के लिए आते हैं. ऐसे में अस्पताल की खाट क्षमता और चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार समय की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि अस्पताल की क्षमता बढ़ाने और आवश्यक मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए वे स्वयं प्रयास करेंगी. सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए तैयार है, लेकिन प्रशासन को समय पर प्रस्ताव और योजनाएं भेजनी चाहिए. किसी भी प्रकार की प्रशासनिक देरी का खामियाजा मरीजों को नहीं भुगतना चाहिए.
पूर्व सांसद नवनीत राणा ने प्रशासन को मरीजों के जीवन से खिलवाड़ नहीं करने की चेतावनी देते हुए कहा कि आम नागरिक सरकारी अस्पतालों से बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाओं की अपेक्षा रखते हैं. इसलिए प्रशासन की जिम्मेदारी केवल उपचार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन को मरीजों और नवजात बच्चों के जीवन के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ नहीं करना चाहिए. अस्पतालों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए और अग्निसुरक्षा व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए.

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