जिलेभर में चलेगा फायर सेफ्टी महाअभियान
डफरिन हादसे के बाद प्रशासन का बड़ा एक्शन

* आठ दिनों में होगा व्यापक निरीक्षण
* 100 टीमें करेंगी अस्पतालों और बड़े प्रतिष्ठानों की जांच
* अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और भीड़भाड़ वाले प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था खंगालेगा प्रशासन
अमरावती/दि.26- डफरिन अस्पताल के एसएनसीयू में हुए भीषण अग्निकांड और तीन नवजात शिशुओं की मौत के बाद जिला प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रहा है. जिलेभर के अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच का निर्णय लिया गया है. प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी.
जिलाधिकारी आशीष येरेकर की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया कि डफरिन जैसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिलेभर में विशेष फायर सेफ्टी अभियान चलाया जाएगा. बैठक में महानगरपालिका आयुक्त डॉ. मंगेश गोंदावले, निवासी उपजिलाधिकारी संतोष काकड़े तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.
* आठ दिनों में सभी बड़े प्रतिष्ठानों की होगी जांच
जिलाधिकारी आशीष येरेकर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आगामी आठ दिनों के भीतर जिले के सभी बड़े प्रतिष्ठानों, सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों और सार्वजनिक उपयोग के भवनों का निरीक्षण पूरा किया जाए. निरीक्षण के दौरान अग्निशमन व्यवस्था, आपातकालीन निकास मार्ग, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और उनकी कार्यक्षमता की जांच की जाएगी. जिन प्रतिष्ठानों में सुरक्षा संबंधी कमियां पाई जाएंगी, उन्हें तत्काल सुधारात्मक उपाय करने के निर्देश दिए जाएंगे. साथ ही निर्धारित समयावधि में उन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पुनः निरीक्षण भी किया जाएगा.
* शहर और ग्रामीण क्षेत्र में गठित होंगी 100 टीमें
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर निरीक्षण दल गठित करने का निर्णय लिया है. इसके तहत शहरी क्षेत्र में 50 और ग्रामीण क्षेत्र में 50 विशेष टीमें बनाई जाएंगी. ये टीमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ संयुक्त रूप से निरीक्षण करेंगी. टीमों को विशेष रूप से अस्पतालों, कोचिंग क्लासेस, शैक्षणिक संस्थानों, मंगल कार्यालयों, मॉल, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और सरकारी भवनों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने का जिम्मा सौंपा जाएगा.
* अस्पतालों में स्टेबलाइजर और स्मोक डिटेक्टर की होगी नियमित जांच
डफरिन हादसे के बाद अस्पतालों में चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है. जिलाधिकारी आशीष येरेकर ने निर्देश दिए हैं कि बिजली आधारित संवेदनशील चिकित्सा उपकरणों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्टेबलाइजर अनिवार्य रूप से लगाए जाएं. साथ ही सभी अस्पतालों में स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म और अन्य सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच एवं रखरखाव सुनिश्चित किया जाए. अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि अस्पतालों में स्थापित सुरक्षा प्रणाली केवल कागजों पर नहीं, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से कार्य करने योग्य होनी चाहिए.
* फायर सिलेंडर, होज पाइप और स्प्रिंकलर सिस्टम पर रहेगा विशेष फोकस
निरीक्षण अभियान के दौरान यह देखा जाएगा कि प्रतिष्ठानों में पर्याप्त संख्या में फायर सिलेंडर उपलब्ध हैं या नहीं. साथ ही होज पाइप, स्प्रिंकलर सिस्टम, जल भंडारण व्यवस्था और अन्य अग्निशमन उपकरण कार्यरत स्थिति में हैं या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जहां नई अग्निशमन व्यवस्था की आवश्यकता होगी, वहां संबंधित प्रतिष्ठानों को तत्काल नए उपकरण लगाने होंगे. इसके अलावा पहले से स्थापित उपकरणों की मरम्मत और नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी भी प्रतिष्ठान प्रबंधन की होगी.
* हर माह होगा कर्मचारियों का अग्निशमन प्रशिक्षण
जिलाधिकारी आशीष येरेकर ने कहा कि केवल उपकरण स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं है. आपात स्थिति में उनका सही उपयोग करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. इसलिए सभी बड़े प्रतिष्ठानों, अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों को प्रत्येक माह अग्निशमन संबंधी प्रशिक्षण दिया जाएगा. प्रशिक्षण के दौरान फायर एक्सटिंग्विशर के उपयोग, आपातकालीन निकासी प्रक्रिया, धुएं की स्थिति में बचाव कार्य और आग लगने की स्थिति में प्रारंभिक प्रतिक्रिया जैसे विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी जाएगी. इसके लिए मॉक ड्रिल और प्रायोगिक प्रदर्शन भी आयोजित किए जाएंगे.
* ऑटोमैटिक फायर सिस्टम को लेकर सख्त निर्देश
प्रशासन ने जोखिम वाले स्थानों पर स्थापित ऑटोमैटिक फायर सेफ्टी सिस्टम को हमेशा सक्रिय और कार्यशील रखने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों को नियमित रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि स्वचालित अग्निशमन प्रणाली आपात स्थिति में तुरंत सक्रिय हो सके. डफरिन हादसे के बाद यह मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि कई स्थानों पर सुरक्षा उपकरण तो लगाए जाते हैं, लेकिन उनकी समय-समय पर जांच और देखभाल नहीं होती.
* सुरक्षा में लापरवाही अब नहीं होगी बर्दाश्त
बैठक में जिलाधिकारी आशीष येरेकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी. यदि किसी प्रतिष्ठान में गंभीर सुरक्षा खामियां पाई जाती हैं और समय रहते उनका निराकरण नहीं किया जाता, तो संबंधित प्रबंधन के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
* डफरिन हादसे ने जगाया प्रशासन को
डफरिन अस्पताल में तीन नवजात शिशुओं की मौत ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर दिया है. इसी के बाद अब जिलेभर में सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा शुरू की जा रही है. हालांकि नागरिकों का कहना है कि यदि ऐसी जांच और निगरानी पहले से नियमित रूप से होती रहती, तो शायद इस तरह की त्रासदी से बचा जा सकता था. फिलहाल प्रशासन का दावा है कि आगामी दिनों में चलने वाला यह विशेष अभियान केवल औपचारिकता नहीं होगा, बल्कि जिले के प्रत्येक बड़े प्रतिष्ठान की सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक जांच कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित किए जाएंगे, ताकि भविष्य में किसी भी अस्पताल, कार्यालय या सार्वजनिक स्थान पर डफरिन जैसी दर्दनाक घटना दोबारा न दोहराई जाए.





