महाराष्ट्र में कोचिंग क्लासों पर कड़ा शिकंजा प्रस्तावित
13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के प्रवेश पर रोक

* नियम तोड़ने पर 50 लाख रुपये तक जुर्माना
नाशिक /दि.28- महाराष्ट्र सरकार निजी कोचिंग क्लासों को नियमन के दायरे में लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. राज्य सरकार ने महाराष्ट्र कोचिंग क्लास नियमन कानून का प्रारूप (ड्राफ्ट) सार्वजनिक कर दिया है, जिसके तहत 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों के कोचिंग क्लासों में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है. साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर 1 लाख से 50 लाख रुपये तक जुर्माना लगाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है. राज्य के शालेय शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने नागरिकों, अभिभावकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों से 4 सितंबर तक अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने की अपील की है. सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम कानून तैयार किया जाएगा.
जानकारी के मुताबिक, प्रस्तावित नियमों के अनुसार राज्य में संचालित सभी बड़े कोचिंग संस्थानों को पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा. इसके अलावा विद्यार्थियों की सुरक्षा, शैक्षणिक गुणवत्ता और आर्थिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं. जिनके चलते अब 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कोचिंग क्लास में प्रवेश नहीं मिलेगा. 25 से अधिक विद्यार्थियों वाले कोचिंग संस्थानों के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा. स्कूलों और कॉलेजों के साथ कोचिंग संस्थानों के टाई-अप पर प्रतिबंध रहेगा. बेसमेंट (तहखाने) में कोचिंग क्लास चलाने की अनुमति नहीं होगी. किसी भी विद्यार्थी के क्लास छोड़ने पर 10 दिनों के भीतर शेष फीस वापस करनी होगी. एक दिन में 5 घंटे से अधिक कक्षाएं संचालित नहीं की जा सकेंगी. भ्रामक एवं झूठे विज्ञापनों पर रोक लगाई जाएगी. मान्यता प्राप्त स्कूलों और कॉलेजों के शिक्षक निजी कोचिंग क्लासों में अध्यापन नहीं कर सकेंगे. वर्तमान में संचालित कोचिंग संस्थानों को पंजीकरण के लिए 6 महीने की अवधि दी जाएगी.
ड्राफ्ट में विद्यार्थियों की सुरक्षा को विशेष महत्व दिया गया है. इसके तहत प्रत्येक विद्यार्थी के लिए न्यूनतम 1 वर्ग मीटर स्थान अनिवार्य होगा. सीसीटीवी कैमरे लगाना आवश्यक होगा. अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य रहेगा. भवन सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा.
* महाराष्ट्र मॉडल की खासियत
विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र का प्रस्तावित कानून कई मामलों में अन्य राज्यों से अधिक प्रभावी है. 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध. डमी स्कूल, इंटीग्रेटेड कोर्स और स्कूल-कोचिंग गठजोड़ पर रोक. भारी आर्थिक दंड का प्रावधान. फीस वापसी की बाध्यता. सुरक्षा संबंधी कड़े मानक का प्रस्तावित प्रारूप में प्रावधान है.
* किन मामलों में कानून कमजोर माना जा रहा?
हालांकि शिक्षा विशेषज्ञों ने कुछ कमियों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है. नियम उल्लंघन पर कोचिंग संस्थान का पंजीकरण रद्द करने का स्पष्ट प्रावधान नहीं. कक्षाओं के समय की अधिकतम सीमा तय है, लेकिन संचालन का निश्चित समय निर्धारित नहीं. प्रशिक्षित काउंसलर (समुपदेशक) नियुक्त करने की बाध्यता नहीं. शिक्षकों की पुलिस सत्यापन या पृष्ठभूमि जांच का प्रावधान नहीं. दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए विशेष सुविधाओं का उल्लेख नहीं. बैंक गारंटी जैसी वित्तीय सुरक्षा व्यवस्था शामिल नहीं.
* 4 सितंबर तक भेज सकते हैं सुझाव
राज्य सरकार ने मसौदा कानून पर जनता से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं. उपरोक्त जानकारियां देने के साथ ही राज्य के शालेय शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने कहा कि यह नियमावली अभिभावकों और शिक्षा क्षेत्र से प्राप्त सुझावों के आधार पर तैयार की गई है. विद्यार्थियों की सुरक्षा, शिक्षा की गुणवत्ता, फीस संरचना और स्कूल-कोचिंग एकीकरण जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए यह कानून बनाया जा रहा है. सरकार जनता से प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम कानून लागू करेगी.
* देश में सबसे अधिक जुर्माने का प्रस्ताव
विशेषज्ञों के अनुसार प्रस्तावित कानून में दंडात्मक प्रावधान देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे सख्त हैं.
राज्य अधिकतम जुर्माना
महाराष्ट्र (प्रस्तावित) 50 लाख रुपये
झारखंड 10 लाख रुपये
असम 1 लाख रुपये
राजस्थान 2 लाख रुपये
हरियाणा 25 हजार रुपये





