अब पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमा ढूंढना हुआ आसान
‘माझा बाप्पा मातीचा’ डिजिटल पोर्टल से मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं के कलाकारों और विक्रेताओं की मिलेगी जानकारी

अमरावती/दि.28- गणेशोत्सव के दौरान पर्यावरण अनुकूल मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए अमरावती जिले के नागरिकों के लिए एक उपयोगी डिजिटल पहल शुरू की गई है. अब शहर और जिले में मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं बनाने वाले मूर्तिकारों तथा विक्रेताओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने के लिए ‘माझा बाप्पा मातीचा’ डिजिटल पोर्टल शुरू किया गया है. इस पोर्टल का उद्देश्य अमरावती सहित पूरे विदर्भ क्षेत्र के पारंपरिक मूर्तिकारों और मिट्टी की प्रतिमाएं बेचने वाले विक्रेताओं को एक साझा मंच प्रदान करना है, ताकि नागरिकों को पर्यावरण अनुकूल गणेश प्रतिमा खरीदने के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े.
* पीओपी प्रतिमाओं के बीच मिट्टी की प्रतिमाओं को बढ़ावा
बता दे कि, हर वर्ष गणेशोत्सव के दौरान बाजार में प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की प्रतिमाओं की भरमार रहती है. ऐसे में असली मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं कहां उपलब्ध हैं, इसकी जानकारी आम नागरिकों को आसानी से नहीं मिल पाती. इसी समस्या के समाधान के लिए यह डिजिटल पोर्टल विकसित किया गया है. पर्यावरणविदों और प्रशासन द्वारा लगातार मिट्टी की प्रतिमाओं को प्रोत्साहन दिए जाने के बावजूद कई श्रद्धालुओं को उपयुक्त मूर्तिकारों तक पहुंचने में कठिनाई होती है. अब यह पोर्टल उस कमी को दूर करेगा.
* पोर्टल पर मिलेगी पूरी जानकारी
‘माझा बाप्पा मातीचा’ पोर्टल पर पंजीकृत मूर्तिकारों और विक्रेताओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध रहेगी. इसमें मिट्टी की गणेश प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकारों की सूची, अधिकृत विक्रेताओं की जानकारी, उपलब्ध प्रतिमाओं के फोटो और वीडियो, संपर्क नंबर, दुकान या कार्यशाला का गूगल मैप लोकेशन, सत्यापित कलाकारों और विक्रेताओं का विवरण जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं. इसके अलावा पोर्टल को फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है, जिससे नागरिक सीधे मूर्तिकारों से संपर्क कर सकेंगे.
* 250 से अधिक मूर्तिकार पहले से जुड़े
पोर्टल से फिलहाल विदर्भ क्षेत्र के करीब 250 पंजीकृत मूर्तिकार जुड़े हुए हैं. आने वाले दिनों में अमरावती जिले के अधिकाधिक कलाकारों और विक्रेताओं को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा. संस्था की ओर से इच्छुक मूर्तिकारों और विक्रेताओं से पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण कराने का आह्वान किया गया है.
* सत्यापन के बाद ही मिलेगी मान्यता
पोर्टल संचालकों ने स्पष्ट किया है कि यह कोई खुली ऑनलाइन निर्देशिका नहीं है, जहां कोई भी स्वयं को विक्रेता या मूर्तिकार घोषित कर सके. पंजीकरण आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित दुकान या कार्यशाला का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया जाएगा. जांच और सत्यापन पूर्ण होने के बाद ही पंजीकरण को अंतिम मंजूरी दी जाएगी तथा संबंधित व्यक्ति को पहचान क्रमांक प्रदान किया जाएगा.
* पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
प्राकृतिक जलस्रोतों में पीओपी प्रतिमाओं के विसर्जन से होने वाले प्रदूषण को देखते हुए इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. गणेशोत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और पारंपरिक मिट्टी के मूर्तिकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया यह पोर्टल अमरावती के नागरिकों के लिए उपयोगी साबित होगा. सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने नागरिकों से इस वर्ष मिट्टी की गणेश प्रतिमा स्थापित कर पर्यावरण अनुकूल गणेशोत्सव मनाने की अपील की है. उनका कहना है कि ऐसे प्रयासों से न केवल नदियों और जलाशयों को प्रदूषण से बचाया जा सकेगा, बल्कि स्थानीय मूर्तिकारों को भी आर्थिक संबल मिलेगा.





