जिला सामान्य अस्पताल में एजेंटों का बोलबाला!

तत्काल फिटनेस और अन्य प्रमाणपत्र के नाम पर वसूली, 15 मिनट में काम कराने का दावा

अमरावती/दि.28-  अमरावती के जिला सामान्य अस्पताल (इरविन अस्पताल) में मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी का फायदा उठाकर एजेंटों द्वारा खुलेआम वसूली किए जाने का मामला सामने आया है. अस्पताल परिसर में सक्रिय कुछ बाहरी लोग जरूरतमंदों से संपर्क कर विभिन्न प्रमाणपत्र और दस्तावेज जल्द बनवाने के नाम पर पैसे मांग रहे हैं. यह खुलासा एक स्थानीय समाचार पत्र द्वारा किए गए प्रत्यक्ष निरीक्षण में हुआ है. जानकारी के अनुसार अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और नागरिक विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी प्रमाणपत्र, फिटनेस सर्टिफिकेट तथा अन्य दस्तावेजों के लिए पहुंचते हैं. इसी भीड़ के बीच कुछ एजेंट चिंतित और परेशान लोगों को पहचानकर उनसे संपर्क साधते हैं और काम जल्दी कराने का भरोसा देकर पैसे की मांग करते हैं.
* फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए मांगे 1,000 रुपये
निरीक्षण के दौरान एक एजेंट ने फिटनेस प्रमाणपत्र बनवाने की इच्छा जताने वाले व्यक्ति को पहले 600 रुपये में काम कराने का प्रस्ताव दिया. बाद में उसे अस्पताल परिसर के बाहर ले जाकर दूसरे व्यक्ति से मिलवाया गया, जिसने 15 से 20 मिनट में फिटनेस प्रमाणपत्र दिलाने के लिए 1,000 रुपये की मांग की. एजेंट ने यह भी दावा किया कि यदि व्यक्ति स्वयं प्रक्रिया पूरी करना चाहे तो उसे 13 से 14 प्रकार की जांचों और औपचारिकताओं से गुजरना पड़ेगा, जबकि पैसे देने पर पूरा काम तुरंत हो जाएगा.
* मरीजों की मजबूरी का उठाया जा रहा फायदा
अस्पताल में आने वाले कई मरीज और उनके परिजन प्रक्रिया की जानकारी न होने या समय की कमी के कारण ऐसे एजेंटों के झांसे में आ सकते हैं. आरोप है कि ये लोग मरीजों की मानसिक स्थिति और जल्द काम करवाने की आवश्यकता का फायदा उठाकर उनसे अतिरिक्त रकम वसूलते हैं.
* सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
सबसे गंभीर बात यह है कि अस्पताल में महाराष्ट्र सुरक्षा महामंडल और निजी एजेंसियों के सुरक्षाकर्मी तैनात होने के बावजूद एजेंटों की गतिविधियां बेरोकटोक जारी हैं. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुरक्षा कर्मियों को इन बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी की जानकारी होने के बावजूद उन्हें रोकने या पूछताछ करने का प्रयास नहीं किया जाता. इसके विपरीत अस्पताल में वैध कार्य से आने वाले लोगों से पहचान पत्र मांगकर जांच की जाती है.
* प्रशासन की भूमिका पर उठे प्रश्न
अस्पताल परिसर में एजेंटों की खुलेआम आवाजाही और प्रमाणपत्रों के नाम पर कथित वसूली की घटनाओं ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि अस्पताल में सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी और व्यवस्थित हैं, तो फिर ऐसे एजेंटों को काम करने का अवसर कैसे मिल रहा है, यह बड़ा प्रश्न बन गया है. स्थानीय नागरिकों ने अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि परिसर में सक्रिय एजेंटों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा प्रमाणपत्र और अन्य सेवाओं की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए, ताकि मरीजों और आम नागरिकों का आर्थिक शोषण रोका जा सके.

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