283 स्कूलों में खेल के मैदान ही नहीं, बच्चे आखिर खेलें तो कहां?

अमरावती जिले के ग्रामीण क्षेत्र की स्थिति चिंताजनक

* 1,571 में से 1,288 स्कूलों के पास ही अपने मैदान
अमरावती/दि.29– बच्चों के सर्वांगीण विकास में पढ़ाई के साथ खेलों का भी महत्वपूर्ण स्थान है. स्कूलों में विद्यार्थियों में खेलों के प्रति रुचि पैदा करने और उनके शारीरिक विकास के लिए खेल मैदान उपलब्ध होना जरूरी है. लेकिन अमरावती जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में जिला परिषद के स्कूलों की स्थिति इस मामले में चिंताजनक सामने आई है. जिले के 14 तहसीलों में जिला परिषद के कुल 1,571 स्कूल हैं, जिनमें से 283 स्कूलों के पास अपना खेल मैदान नहीं है.
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जिला परिषद के 1,571 स्कूलों में से 1,288 स्कूलों में विद्यार्थियों के खेलने के लिए मैदान उपलब्ध हैं. वहीं, 283 स्कूलों के विद्यार्थियों को उचित खेल मैदान के अभाव में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्कूलों के समय-सारणी में प्रत्येक सप्ताह खेलों के लिए दो से चार घंटे का समय निर्धारित रहता है. ऐसे में मैदान उपलब्ध नहीं होने के कारण विद्यार्थियों के सामने यह सवाल खड़ा हो जाता है कि वे खेलें तो कहां? कुछ स्कूलों की ओर से विद्यार्थियों को खेल गतिविधियों के लिए दूसरे उपलब्ध मैदानों पर ले जाया जाता है. कई स्कूल निजी प्लॉट, जिम, सार्वजनिक स्थान अथवा सरकारी जमीन का उपयोग खेल गतिविधियों और प्रतियोगिताओं के लिए कर रहे हैं.
* 14 में से अधिकांश तहसीलों में समस्या
जिला परिषद के स्कूलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो चांदूर रेलवे को छोड़कर लगभग सभी तहसीलों में बड़ी संख्या में स्कूलों के पास अपने खेल मैदान नहीं हैं. इससे ग्रामीण विद्यार्थियों को खेल सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है.
* मान्यता के मानदंड में खेल मैदान भी शामिल
स्कूलों की मान्यता और निरीक्षण प्रक्रिया में खेल मैदान सहित कई आवश्यक सुविधाओं को महत्व दिया जाता है. माध्यमिक स्कूलों का प्रत्येक तीन वर्ष में 11 मानदंडों के आधार पर निरीक्षण किया जाता है. इनमें खेल मैदान, प्रधानाचार्य कक्ष, शौचालय, पेयजल सुविधा, पुस्तकालय, शिक्षण-अधिगम सामग्री और स्कूल की सुरक्षा एवं बाउंड्री जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इसके बावजूद जिला परिषद के 283 स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए अपना खेल मैदान उपलब्ध नहीं होना गंभीर सवाल खड़ा करता है. इन स्कूलों को आखिर कब तक अपने खेल मैदान मिलेंगे, यह सवाल अभिभावकों और विद्यार्थियों के बीच बना हुआ है.
* इन स्कूलों के पास नहीं है उचित खेल मैदान
तहसीलनिहाय आंकड़ों में अचलपुर के 23, अमरावती के 29, अंजनगांव सुर्जी के 15, भातकुली के 21, चांदूर बाजार के 39, चांदूर रेलवे के 3, चिखलदरा के 35, दर्यापुर के 10, धामणगांव रेलवे के 14, धारणी के 32, मोर्शी के 21, नांदगांव खंडेश्वर के 12 और तिवसा के 12 जिला परिषद स्कूलों में उचित खेल मैदान उपलब्ध नहीं होने की जानकारी सामने आई है. वरुड तहसील का आंकड़ा उपलब्ध विवरण में स्पष्ट नहीं है.
* सार्वजनिक स्थानों का सहारा
खेल मैदान नहीं होने के बावजूद विद्यार्थियों की खेल गतिविधियां पूरी तरह बंद नहीं हैं. कई स्कूल आसपास के निजी प्लॉट, जिम, सार्वजनिक स्थान अथवा सरकारी जमीन का उपयोग कर बच्चों को खेल गतिविधियों में शामिल कर रहे हैं. हालांकि, ऐसे स्थान स्थायी और पर्याप्त खेल सुविधाओं का विकल्प नहीं माने जा सकते.
* अंजनगांव सुर्जी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का इंतजार
अंजनगांव सुर्जी तहसील मुख्यालय में भी अब तक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स उपलब्ध नहीं है. स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का प्रस्ताव लंबे समय से लंबित है. इसके लिए शहर के आसपास उपयुक्त जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है. ऐसे में ग्रामीण विद्यार्थियों को बेहतर खेल सुविधाएं कब मिलेंगी, यह सवाल अभी भी अनुत्तरित है.

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