पोहरा में गवलाऊ गाय-बैलों की नीलामी टली
गोशाला संघ महाराष्ट्र विदर्भ प्रांत की आपत्ति के बाद फैसला

* नीलामी में पशुओं को कसाइयों के हाथों जाने की जताई थी आशंका
अमरावती/दि.1– महाराष्ट्र सरकार द्वारा वर्ष 2015 में गोहत्या पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद अवैध रूप से मवेशियों की हत्या किए जाने के आरोप लगते रहे हैं. इसी बीच पोहरा स्थित बुलमाता संगोपन प्रक्षेत्र में गवलाऊ गायों और बैलों की प्रस्तावित नीलामी को लेकर गोशाला संघ महाराष्ट्र, विदर्भ प्रांत ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई. संघ की आपत्ति के बाद नीलामी टाल दी गई.
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत संचालित पोहरा प्रक्षेत्र में देशी नस्ल के मवेशियों के संरक्षण और संवर्धन का कार्य किया जाता है. यहां तैयार होने वाले गवलाऊ गाय-बैलों को आसपास के क्षेत्रों में पशुपालन और नस्ल सुधार के लिए उपलब्ध कराया जाता है. संघ का आरोप है कि यदि ऐसे मवेशियों की नीलामी खुले तौर पर की गई तो उन्हें पशुपालन के बजाय कटाई के लिए खरीदे जाने की आशंका बनी रहती है. गोशाला संघ ने महाराष्ट्र पशुधन विकास मंडल तथा पशुधन विभाग के आयुक्त को दिए गए निवेदन में मांग की है कि ऐसी नीलामी तत्काल रोकी जाए और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. संघ के मुताबिक राज्य में करीब 10 से 12 केंद्रों पर इस प्रकार की नीलामी प्रस्तावित थी.
* किसानों को प्राथमिकता देने की मांग
संघ ने मांग की है कि नीलामी में केवल वास्तविक किसानों और पशुपालकों को ही बोली लगाने की अनुमति दी जाए. बोली लगाने वालों के पास आधार कार्ड तथा कृषि भूमि का 7/12 उतारा होने की अनिवार्यता रखी जाए. इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि खरीदे गए पशुओं का उपयोग खेती और पशुपालन के लिए ही हो. संघ का कहना है कि अच्छी नस्ल के बैल खरीदकर किसान उन्हें एक-दो वर्ष पालने के बाद अच्छी कीमत पर बेच सकते हैं. इससे ग्रामीण किसानों को अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो सकती है. इसी प्रकार अच्छी नस्ल की गायें और बछड़े दुग्ध व्यवसाय करने वाले किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं.
* गौशालाओं में स्थानांतरित करने की मांग
गोशाला संघ ने यह भी मांग की है कि नीलामी के बजाय पोहरा प्रक्षेत्र में शेष रहने वाले गाय-बैलों को राज्य की गौशालाओं में स्थानांतरित किया जाए, जहां उनकी प्राकृतिक नस्ल वृद्धि और जीवनभर देखभाल की व्यवस्था की जा सके. संघ ने आरोप लगाया है कि बिना व्यापक प्रचार और किसानों को पर्याप्त जानकारी दिए नीलामी करने से मवेशियों के गलत हाथों में जाने का खतरा रहता है. संघ ने गवलाऊ नस्ल के संरक्षण और संवर्धन के लिए अलग से गवलाऊ विकास मंडल गठित करने की भी मांग की है. संघ का कहना है कि गवलाऊ गायों का दूध उच्च गुणवत्ता वाला माना जाता है और इस देशी नस्ल के संरक्षण के लिए सरकार को विशेष योजना बनानी चाहिए. संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मवेशियों की हत्या के लिए बिक्री किए जाने का मामला सामने आता है तो महाराष्ट्र पशुधन विकास मंडल के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.





