अगस्त बीता सूखा, बारिश का 82 प्रतिशत घाटा

अमरावती जिला जल संकट की कगार पर

* ओवरऑल 26 प्रतिशत बरसात कम
* फसलों के उत्पादन पर असर की आशंका
अमरावती/दि.1 – विदर्भ में अमरावती और अकोला सूखे की कगार पर आ गए हैं. अगस्त माह की सबसे बरसात यहां दर्ज की गई है. अमरावती में 82, तो अकोला में 84 प्रतिशत बारिश का घाटा गत माह रहा. जिससे न केवल फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बलवती हुई है. वहीं जनवरी माह से ही जल संकट का सामना जिले के कई भागों को करना पड सकता है, इस प्रकार के संकेत जानकारों ने अमरावती मंडल से चर्चा में दिए.
* धारणी और चिखलदरा भी सूखे
अमरावती जिले की ही बात करें, तो पहली बार धारणी और चिखलदरा जैसी तहसीलों में काफी कम बरसात इस सीजन में पंजीकृत हुई है. केवल दर्यापुर, अंजनगांव और नांदगांव खंडेश्वर तहसीले इस वर्ष बरसात के मामले में बेहतर कहे जा सकते है. उसमें भी नांदगांव खंडेश्वर में सर्वाधिक 96 प्रतिशत मेघ बरसे हैं. वहां औसतन 615 मिमी बारिश होती है. इस साल अब तक 593 मिमी बारिश खंडेश्वर तहसील में दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई.
* दशक का सबसे सूखा अगस्त
जिले में 618 मिमी औसत बारिश होती है. इस बार यह आंकडा मात्र 459 मिमी तक पहुंच पाया है. अर्थात मोटे तौर पर केवल 74 फीसद बारिश हो सकी है. उसमें भी अगस्त माह की बात करें, तो हाल के अनेक वर्षों का यह सबसे सूखा अगस्त कहा जा सकता है. जानकार इसे अलनीनों का इफेक्ट बता रहे हैं. वहीं कई जगह अलनीनों के कारण ही भारी बारिश हुई है और न आनेवाले क्षेत्र में भी बाढ के हालात पैदा हो गए थे. अगस्त में अमरावती में 261 मिमी बारिश होती है. इस साल केवल 6.4 मिमी बारिश समस्त जिले में दर्ज की गई. अकोला का भी हाल लगभग ऐसा ही रहा. जहां 212 मिमी का औसत रहने पर भी अगस्त माह में मात्र 3.5 मिमी बारिश रही.
* सोयाबीन हो या कपास, उत्पादन पर असर
कम बारिश के कारण अमरावती जिले की कपास, सोयाबीन, तुअर, मूंग जैसी फसलों के प्रति एकड पैदावार पर भारी असर पडने की आशंका है. मार्केट में इन आशंकाओं कारण अधिकांश जीन्स के रेट बढने शुरु हो गए हैं. अनाज हो या दालें सभी के दाम बढने का अंदेशा देखा जा रहा है. उधर सूखे खेत देखकर किसानों का कलेजा मुंह को आ रहा है. इस बार क्या होगा, कैसे होगा, इस आशंका ने अमरावती ही नहीं बल्कि पश्चिम विदर्भ के अधिकांश जिलों को घेर रखा है.
* जल संकट का अंदेशा
जल संकट भी मुंह बाए खडा है. बांधों में पानी संग्रह कम हुआ है. अमरावती का सबसे बडा नल-दमयंती सागर अर्थात मोर्शी का सिंभोरा डैम इस बार केवल 56 प्रतिशत भर पाया है. जिले में काफी हद तक सिंचाई और अमरावती-बडनेरा शहर सहित अनेक नगरों का पेयजल इस बांध पर निर्भर है. जिससे अभी से ही कहना शुरु हो गया है कि, अगले बरस जनवरी आरंभ से ही जिले के कई भांगों में जल संकट का सामना करना पडेगा. वहीं बुलढाणा में बांधों में समुचित पानी रहने की जानकारी दी गई.
* तहसीलनिहाय बरसात और घाटा
तहसील बारिश घाटा
धारणी            555.3     37%
चिखलदरा      560        51%
अमरावती      429        34%
भातकुली       299        47%
नांदगांव खंडे. 615        3.6%
चांदुर रेलवे    491        18%
तिवसा          307        42%
मोर्शी            383        37%
वरुड            329       50%
दर्यापुर          354       27%
अंजनगांव       351      27%
अचलपुर        297      56%
चांदुर बाजार   363      30%
धामणगांव       513      29%
* अगस्त में अमरावती संभाग
जिला           औसत    घाटा
अमरावती       261    82%
अकोला         212    84%
यवतमाल       244    78%
वाशिम          216    71%
बुलढाणा       195    61%

Back to top button