राशन के अनाज में कभी कंकड़ तो कभी कीड़े!

जिले की 1,913 राशन दुकानों की होगी पड़ताल

* अब एफडीए करेगा जांच, एफएसएसएआई पंजीयन अनिवार्य
* भंडारण व्यवस्था भी जांच के घेरे में
अमरावती/दि.10- राशन दुकानों से मिलने वाले अनाज की गुणवत्ता को लेकर लगातार सामने आ रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अब खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने जांच की तैयारी शुरू कर दी है. लाभार्थियों की ओर से राशन के चावल और गेहूं में कभी कंकड़, तो कभी कीड़े तथा चूहे की बीट मिलने की शिकायतें सामने आती रही हैं. कई स्थानों पर घटिया गुणवत्ता का अनाज दिए जाने तथा अच्छे अनाज की कालाबाजारी कर खराब अनाज वितरित करने के आरोप भी लगाए जाते हैं. इन शिकायतों के बीच अब एफडीए अधिकारी राशन दुकानों का प्रत्यक्ष निरीक्षण करेंगे.
बता दें कि, अमरावती जिले में कुल 1,913 राशन दुकानें हैं. इनके माध्यम से अंत्योदय श्रेणी के 1 लाख 30 हजार 721 तथा प्राथमिकता वाले परिवारों के 4 लाख 73 कार्डधारक लाभार्थियों को अनाज वितरित किया जाता है. ऐसे में राशन के अनाज की गुणवत्ता और सुरक्षित भंडारण व्यवस्था का मुद्दा लाखों लाभार्थियों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है.
* अब राशन दुकानों की होगी ‘झाड़ाझड़ती’
लाभार्थियों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण अनाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एफडीए की ओर से राशन दुकानों का निरीक्षण किया जाएगा. अधिकारी दुकानों में पहुंचकर अनाज की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था, साफ-सफाई तथा खाद्य सुरक्षा से संबंधित मानकों की जांच करेंगे. जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि राशन दुकानों में अनाज को किस तरह और किन परिस्थितियों में रखा जाता है. अनाज की बोरियां नमी, गंदगी और चूहों से सुरक्षित हैं या नहीं, इसकी भी पड़ताल महत्वपूर्ण होगी.
* राशन दुकानों के लिए एफएसएसएआई पंजीयन अनिवार्य
अब सामान्य खाद्य पदार्थ विक्रेताओं की तरह राशन दुकानदारों के लिए भी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के तहत पंजीयन कराना अनिवार्य किया गया है. शासन की ओर से इस संबंध में सोमवार को निर्देश प्राप्त हुए हैं. जिला आपूर्ति अधिकारी प्रज्वल पाथरे ने बताया कि जिले के सभी राशन दुकानदारों को पंजीयन कराकर एफएसएसएआई पंजीयन क्रमांक प्राप्त करना होगा. इसके बाद राशन दुकानों को खाद्य सुरक्षा से संबंधित निर्धारित नियमों का पालन करना होगा.
* अनाज में कंकड़, कीड़े और चूहे की बीट की शिकायतें
राशन के अनाज की गुणवत्ता को लेकर लाभार्थियों की शिकायतें नई नहीं हैं. कई बार चावल या गेहूं में कंकड़, कीड़े और चूहे की बीट मिलने की शिकायतें सामने आती हैं. कुछ लाभार्थियों का कहना है कि उन्हें ऐसा अनाज दिया जाता है, जिसे उपयोग से पहले काफी साफ करना पड़ता है. इसके अलावा अनाज में मिलावट और घटिया गुणवत्ता के अनाज की आपूर्ति को लेकर भी शिकायतें होती रही हैं. कुछ मामलों में अच्छे अनाज को खुले बाजार में बेचकर उसके स्थान पर खराब या निम्न गुणवत्ता का अनाज लाभार्थियों को दिए जाने के आरोप लगाए जाते हैं. हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी.
* कई दुकानों में भंडारण की उचित व्यवस्था नहीं
राशन दुकानों में अनाज के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. कई दुकानों में अनाज रखने के लिए पर्याप्त और हवादार स्थान उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आती है. कोंदट, नम और अस्वच्छ स्थानों पर अनाज की बोरियां रखने से उनमें नमी आने, कीड़े लगने अथवा चूहों से नुकसान होने की आशंका बनी रहती है. ऐसे में एफडीए की जांच केवल अनाज के नमूने तक सीमित न रहकर उसकी भंडारण व्यवस्था पर भी केंद्रित होने की उम्मीद है.
* राशन दुकानदारों ने रखा अपना पक्ष
दूसरी ओर, राशन दुकानदारों का कहना है कि शासन की ओर से जिस स्थिति में अनाज उन्हें प्राप्त होता है, उसी अनाज का वितरण लाभार्थियों को किया जाता है. दुकानदारों के अनुसार वे अपनी दुकानों में साफ-सफाई रखने और अनाज का उचित तरीके से भंडारण करने का प्रयास करते हैं. इसलिए अनाज की गुणवत्ता को लेकर शिकायत होने पर केवल राशन दुकान ही नहीं, बल्कि अनाज की आपूर्ति से लेकर वितरण तक की पूरी व्यवस्था की जांच आवश्यक है.
* लाखों परिवारों से जुड़ा मामला
जिले में 1,913 राशन दुकानों के माध्यम से लाखों लाभार्थियों को अनाज मिलता है. ऐसे में राशन के अनाज की गुणवत्ता में किसी भी तरह की लापरवाही सीधे बड़ी संख्या में परिवारों को प्रभावित कर सकती है. एफडीए की प्रस्तावित जांच और एफएसएसएआई पंजीयन व्यवस्था के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राशन दुकानों में खाद्य सुरक्षा के मानकों का कितना पालन हो रहा है और शिकायतों पर प्रशासन किस स्तर तक कार्रवाई करता है.

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