गणेशोत्सव के मंच से बच्चू कडू ने सरकार को दिखाया आईना
बाल मृत्यु, वन्यजीवों के हमले और किसानों के मुद्दों पर सरकार से किए तीखे सवाल

* ‘क्या बच्चू, तू चुप क्यों है?’ की गूंज
अमरावती/दि.21– गणेशोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान और सजावट तक सीमित न रहकर सामाजिक प्रबोधन और जनजागृति का माध्यम भी बनता रहा है. इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शिवसेना शिंदे गुट के विधायक बच्चू कडू ने कुरलपूर्णा स्थित अपने निवास पर तैयार किए गए गणेशोत्सव के विशेष देखावे के जरिए सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं. ‘क्या बच्चू, तू चुप क्यों है?’ इस केंद्रीय संकल्पना पर आधारित यह देखावा इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है.
* बाल मृत्यु से लेकर वन्यजीवों के हमलों तक मुद्दे उठाए
झांकीे के माध्यम से अमरावती जिला महिला अस्पताल में हुई आग की घटना में नवजात बच्चों की मौत, जिले में बाघ के हमलों में तीन लोगों की जान जाने की घटनाओं तथा जंगली सूअरों से फसलों को हो रहे नुकसान को प्रमुखता से दर्शाया गया है. ‘बाल मृत्यु की पुकार, बाघ का वार, जंगली सूअरों का कहर, गणराया, तू ही बचा हमारे खेत और संसार!’ जैसे संदेशों के माध्यम से व्यवस्थागत संवेदनहीनता पर सवाल उठाया गया है.
* बीज की कमी और किसानों की समस्याओं पर भी निशाना
झांकीे में बीज की कमी, वन्यजीवों के कारण फसलों को हो रहे भारी नुकसान के साथ ही खेत मजदूरों, दिव्यांगों और एकल महिलाओं की लंबित मांगों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया है. विभिन्न फलक और संदेशों के जरिए इन समस्याओं को सरकार और प्रशासन के सामने रखने का प्रयास किया गया है.
* ‘जरूरत पड़ी तो फिर आंदोलन का हथियार उठाएंगे’
गणेश आरती के मंगलमय वातावरण के बीच देखावे के माध्यम से सरकार को आंदोलन का संकेत भी दिया गया है. इसमें स्पष्ट संदेश दिया गया है कि यदि सरकार जनता की समस्याओं का संज्ञान नहीं लेती है, तो दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा. कुरलपूर्णा में गणेश दर्शन के लिए पहुंच रहे नागरिकों के बीच इस सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने वाले अनोखे देखावे की चर्चा हो रही है.
* ‘क्या बच्चू, तू चुप क्यों है?’
झांकी में उठाए गए सवालों में ‘क्या बच्चू, तू चुप क्यों है?’ यह सवाल विशेष रूप से ध्यान आकर्षित कर रहा है. इसके जवाब में संदेश दिया गया है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है तो आवाज उठानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर आंदोलन का हथियार भी उठाना चाहिए. झांकी में यह संदेश भी दिया गया है कि यह केवल गणेशजी का देखावा नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं की आवाज है. बच्चू कडू इससे पहले भी विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर आंदोलन करते रहे हैं. उनके आंदोलन और जनजागृति के तरीके हमेशा चर्चा में रहे हैं. वर्तमान में वे सत्तारूढ़ महायुति का हिस्सा हैं. इसके बावजूद गणेशोत्सव के मंच से सरकार और प्रशासन के समक्ष जनता से जुड़े सवाल उठाए जाने को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है.





