स्वर्गरथ मिला, लेकिन शव वाहन धूल खा रहा
सरकारी योजना के तहत मिले वाहनों में वलगांव का शव वाहन बंद

* परिजनों को निजी वाहन का खर्च उठाने की मजबूरी
अमरावती/दि.22– किसी अपने की मौत का दुख परिवार के लिए पहले ही असहनीय होता है. ऐसे समय में शव को अस्पताल से गांव या अंतिम संस्कार स्थल तक ले जाने के लिए वाहन की व्यवस्था करना भी परिवार के सामने बड़ी चुनौती बन जाता है. इसी परेशानी को देखते हुए सरकार ने जिलों में शव वाहनों की सुविधा उपलब्ध कराई है. लेकिन अमरावती जिले में यह सुविधा पूरी तरह प्रभावी ढंग से संचालित नहीं होने की तस्वीर सामने आई है.
जनवरी 2025 में जिले को सरकार की ओर से पांच शव वाहन उपलब्ध कराए गए थे. इनमें से मेलघाट क्षेत्र के लिए चार वाहन बताए जाते हैं, जबकि वलगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को दिया गया शव वाहन लंबे समय से बिना उपयोग के पड़ा होने की जानकारी सामने आई है. वाहन पर धूल जमने से सरकारी सुविधा की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं.
* मेलघाट में चार वाहन चल रहे
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मेलघाट क्षेत्र के टेंब्रुसोंडा, काटकुंभ, हरिसाल और धारणी में उपलब्ध शव वाहन कार्यरत हैं और जरूरत के अनुसार शवों को ले जाने के लिए उनका उपयोग किया जा रहा है. केवल वलगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का शव वाहन बंद है. हालांकि, वहां शव परिवहन के लिए अन्य उपलब्ध वाहनों की मदद ली जाती है.
* गरीब परिवारों पर बढ़ता है आर्थिक बोझ
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में अस्पताल से गांव या अंतिम संस्कार स्थल की दूरी कई बार काफी अधिक होती है. ऐसे में निजी वाहन किराए पर लेने के लिए परिवार को बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह खर्च और भी मुश्किल बन जाता है. सरकारी शव वाहन का उद्देश्य ऐसे परिवारों को निःशुल्क या कम खर्च में शव परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराना है. लेकिन वाहन उपलब्ध होने के बावजूद उसके बंद रहने से योजना के उद्देश्य पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं.
* ड्राइवर और डीजल की समस्या
जिले में शव वाहन उपलब्ध होने के बावजूद इनके संचालन के लिए ड्राइवर और डीजल की व्यवस्था चुनौती बनी हुई है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध एम्बुलेंस चालकों से शव वाहनों का संचालन भी कराया जा रहा है. बताया जा रहा है कि कुछ मामलों में शव वाहन के डीजल का खर्च एम्बुलेंस के बजट-व्यवस्था से पूरा किया जा रहा है. इससे स्वास्थ्य विभाग के सामने दोनों सेवाओं के सुचारु संचालन की चुनौती बनी हुई है.
* स्वास्थ्य विभाग का दावा
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रवीण पारिसे के अनुसार मेलघाट के लिए उपलब्ध चार शव वाहन कार्यरत हैं. वलगांव का वाहन बंद है, लेकिन जरूरत पड़ने पर शव परिवहन के लिए अन्य वाहनों का उपयोग किया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में शव परिवहन जैसी संवेदनशील सुविधा को नियमित और प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराने के लिए बंद पड़े वाहन को तत्काल शुरू करने के साथ ड्राइवर और डीजल की स्थायी व्यवस्था करने की जरूरत है.





