2024 में बढ़ाई थी राहत, एक साल बाद बदले नियम
भीषण सूखे को देखते हुए पुराने प्रावधान बहाल करने की मांग

मुंबई /दि.23– राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति के बीच किसानों को मिलने वाली फसल नुकसान भरपाई की क्षेत्र सीमा और सहायता राशि को लेकर मांग तेज हो गई है. जनवरी 2024 में राज्य सरकार ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के लिए राहत राशि के दर बढ़ाते हुए अधिकतम तीन हेक्टेयर क्षेत्र तक सहायता देने का निर्णय लिया था. हालांकि, 2025 में यह निर्णय बदलकर फिर से दो हेक्टेयर की सीमा और कम दर लागू कर दी गई. मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अब 2024 के प्रावधानों को फिर से लागू करने की मांग उठ रही है.
* 2024 में बढ़ाए गए थे राहत के दर
जनवरी 2024 में सरकार ने प्राकृतिक आपदा से फसल नुकसान झेलने वाले किसानों के लिए सहायता के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए थे. इसके तहत जिरायत फसलों के लिए 13,600 रुपये, बागायती फसलों के लिए 27,000 रुपये और बहुवर्षीय फसलों के लिए 36,000 रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता का प्रावधान किया गया था. साथ ही राहत के लिए अधिकतम क्षेत्र सीमा दो हेक्टेयर से बढ़ाकर तीन हेक्टेयर कर दी गई थी.
* अब दो हेक्टेयर तक ही राहत
2025 में पुराने प्रावधानों को बदलते हुए खरीफ 2025 से फिर पहले के दर और मानदंड लागू कर दिए गए. इसके बाद जिरायत फसलों के लिए 8,500 रुपये, बागायती फसलों के लिए 17,000 रुपये और बहुवर्षीय फसलों के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता निर्धारित की गई. इसके साथ ही अधिकतम सहायता क्षेत्र भी तीन से घटाकर दो हेक्टेयर कर दिया गया. इसका सीधा असर उन किसानों पर पड़ रहा है, जिनकी दो हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई है. भले ही किसान की तीन, चार या उससे अधिक हेक्टेयर फसल खराब हुई हो, वर्तमान सीमा के कारण सहायता केवल दो हेक्टेयर तक ही सीमित रहती है.
* तीन हेक्टेयर नुकसान में सहायता का बड़ा अंतर
उदाहरण के तौर पर तीन हेक्टेयर जिरायत फसल के नुकसान पर 2024 के प्रावधान के अनुसार किसान को 40,800 रुपये सहायता मिल सकती थी. वर्तमान दर और दो हेक्टेयर की सीमा के अनुसार यह राशि घटकर 17,000 रुपये रह जाती है. इसी तरह तीन हेक्टेयर बागायती फसल के लिए 2024 के प्रावधान के अनुसार 81,000 रुपये, जबकि वर्तमान नियमों के तहत दो हेक्टेयर के लिए 34,000 रुपये सहायता मिलती है. बहुवर्षीय फसलों में भी तीन हेक्टेयर के लिए 2024 के अनुसार 1.08 लाख रुपये, जबकि वर्तमान दो हेक्टेयर सीमा के तहत 45,000 रुपये की सहायता ही बनती है.
* सूखे की गंभीरता को देखते हुए नियम बदलने की मांग
कम बारिश, फसलों को हुए व्यापक नुकसान, बढ़ती उत्पादन लागत और पहले से आर्थिक संकट झेल रहे किसानों की स्थिति को देखते हुए 2024 के बढ़े हुए दर और तीन हेक्टेयर की सीमा फिर लागू करने की मांग की जा रही है. किसान संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से कहा जा रहा है कि जब मौजूदा संकट व्यापक क्षेत्र में फसल नुकसान से जुड़ा है, तब सहायता की गणना की सीमा कम रखने से वास्तविक नुकसान और सरकारी मदद के बीच बड़ा अंतर रह जाएगा.
* कई जिलों में किसान सड़कों पर
सूखे की गंभीरता को लेकर राज्य के विभिन्न हिस्सों में किसान आंदोलन भी सामने आ रहे हैं. सोलापुर में संभाजी ब्रिगेड की ओर से चटनी-भाकरी आंदोलन किया गया. बीड जिले के केज में किसानों ने सूखा घोषित करने की मांग को लेकर बैलगाड़ी मोर्चा निकाला. परभणी जिले के जिंतूर तहसील के बोरी गांव में किसानों ने खेत में सोयाबीन की फसल जला कर सूखा घोषित करने की मांग की.
* सरकार को किसानों की मदद की सद्बुद्धि दे
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने राज्य की सूखा स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि खेतों में खड़ी फसलें सूख गई हैं और जो फसल बची है, वह भी बर्बाद होने की स्थिति में है. उन्होंने गणपति बप्पा से सरकार को किसानों को तत्काल मदद देने की सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की. किसानों की मांग अब केवल सहायता राशि बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि 2024 में लागू किए गए तीन हेक्टेयर की अधिकतम क्षेत्र सीमा और बढ़े हुए राहत दरों को मौजूदा सूखा परिस्थितियों में फिर बहाल करने पर केंद्रित होती जा रही है.





