फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों के खिलाफ कार्रवाई की मांग
‘प्रहार’ ने पालकमंत्री बावनकुले से की मुलाकात

* 30 जून को कार्रवाई का प्रस्ताव भेजे जाने के बावजूद निर्णय नहीं होने पर दिव्यांग क्रांति आंदोलन ने उठाए सवाल
अमरावती/दि.23– पशुपालन विभाग के सहायक आयुक्त डॉ. पुरुषोत्तम सोलंके के नाम से जुड़े कथित संदिग्ध दिव्यांगता प्रमाणपत्रों की जांच और कार्रवाई की मांग को लेकर दिव्यांग क्रांति आंदोलन तथा ‘प्रहार’ के पदाधिकारियों ने पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले से मुलाकात की. आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि एक ही व्यक्ति के नाम पर 30, 40 और 60 प्रतिशत दिव्यांगता दर्शाने वाले अलग-अलग प्रमाणपत्र होने के साथ ही दो अलग-अलग यूडीआईडी नंबर होने की जानकारी सामने आई है.
आंदोलनकारियों के मुताबिक इस मामले में पशुपालन विभाग की सेल अधिकारी दीपाली पाठक ने 30 जून को ही सरकार को कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा था. इसके बावजूद अब तक सीधे तौर पर कार्रवाई नहीं होने पर दिव्यांग संगठनों ने सवाल उठाया है कि आखिर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई कब होगी.
* जिलाधिकारी को दो बार दिया ज्ञापन
दिव्यांग क्रांति आंदोलन की ओर से इस मामले में 4 सितंबर और 17 सितंबर को जिला जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया. आंदोलनकारियों ने संबंधित दस्तावेज और प्रमाणपत्रों की जानकारी प्रशासन के सामने रखी. इसके बाद अमरावती दौरे पर आए पशुपालन विभाग के सचिव डॉ. रामास्वामी एन. से भी मुलाकात कर पूरे मामले से अवगत कराया गया तथा तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की गई. आंदोलनकारियों का कहना है कि जिलाधिकारी आशीष येरेकर ने पालकमंत्री के निर्देशानुसार पशुपालन आयुक्त को पत्र भेजा है. हालांकि, इसके बाद भी प्रत्यक्ष कार्रवाई नहीं होने से दिव्यांग समुदाय में नाराजगी बढ़ रही है.
* ‘दिव्यांगों का हक मारने वालों को कौन बचा रहा?’
दिव्यांग क्रांति आंदोलन के जिला एवं शहर प्रमुख श्याम राजपूत ने सवाल उठाया कि जब 30 जून को कार्रवाई का प्रस्ताव भेजा जा चुका है और इसके बाद लगातार ज्ञापन तथा अधिकारियों से मुलाकात की जा चुकी है, तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है. उन्होंने पूछा कि संबंधित अधिकारी का समर्थन कौन कर रहा है और दिव्यांगों के अधिकारों पर कथित रूप से चोट पहुंचाने वालों को कौन संरक्षण दे रहा है.
* केवल एक अधिकारी नहीं, सभी संदिग्ध प्रमाणपत्रों की जांच की मांग
आंदोलनकारियों ने मांग की है कि जांच केवल डॉ. पुरुषोत्तम सोलंके तक सीमित न रखी जाए. पशुपालन विभाग में ऐसे सभी कर्मचारियों के दिव्यांगता प्रमाणपत्रों की जांच की जाए, जिन्होंने इन प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी अथवा अन्य लाभ प्राप्त किए हैं. इसके लिए संबंधित व्यक्तियों के यूडीआईडी नंबर, मेडिकल रिकॉर्ड, दिव्यांगता प्रमाणपत्र और सरकारी दस्तावेजों की जांच करने की मांग की गई है, ताकि प्रमाणपत्रों की वास्तविकता स्पष्ट हो सके. महाराष्ट्र के दिव्यांग सशक्तीकरण विभाग के अनुसार, दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों और योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए अलग विभाग कार्यरत है. आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन को आगे तेज किया जाएगा.





