31,628 करोड़ के पैकेज का क्या हुआ?

विजय वडेट्टीवार ने मुख्यमंत्री से पूछा सवाल

मुंबई./दि.23- महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इन दिनों मराठवाड़ा के लातूर, धाराशिव और पश्चिम महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के सूखाग्रस्त इलाकों के दौरे पर हैं. इसी बीच कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने पिछले साल घोषित 31,628 करोड़ रुपये के राहत पैकेज को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं.
वडेट्टीवार ने पूछा कि 7 अक्टूबर 2025 को मुख्यमंत्री द्वारा घोषित 31,628 करोड़ रुपये के पैकेज में से अब तक किसानों तक कितनी राशि पहुंची? उन्होंने दावा किया कि पिछले साल अतिवृष्टि से राज्य के 29 जिलों के 253 तालुकों में करीब 68.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ था. किसानों की फसलें बर्बाद हुई थीं, लेकिन घोषित पैकेज की पूरी राशि किसानों तक नहीं पहुंची. कांग्रेस नेता के मुताबिक, सरकार ने पिछले राहत पैकेज के तहत करीब 15,661 करोड़ रुपये खर्च किए. उन्होंने कहा कि सरकार को केवल पैकेज की घोषणा करने के बजाय उसकी राशि किसानों के खातों तक पहुंचाना सुनिश्चित करना चाहिए.
वडेट्टीवार ने मौजूदा सूखे की स्थिति को देखते हुए प्रत्येक प्रभावित किसान को कम से कम 50 हजार रुपये की तत्काल सहायता देने की मांग की. उन्होंने कहा कि सरकार को रोजगार गारंटी योजना के काम शुरू करने चाहिए और किसानों के सभी प्रकार के कर्ज माफ किए जाने चाहिए. उन्होंने खेतों में फसल न होने की स्थिति में किसानों की कर्ज चुकाने की क्षमता पर भी सवाल उठाया और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल पंचनामे कराने की मांग की. वडेट्टीवार ने सूखे की स्थिति पर चर्चा और राहत पैकेज की घोषणा के लिए तीन दिन का विशेष विधानसभा सत्र बुलाने की मांग भी की.
वडेट्टीवार ने किसानों की कर्जमाफी के मुद्दे पर भी राज्य सरकार को घेरा. उन्होंने आरोप लगाया कि दो लाख रुपये तक की कर्जमाफी की घोषणा के बावजूद किसानों को इसका पूरा लाभ नहीं मिला है. उनका कहना है कि किसानों का कर्ज पूरी तरह माफ नहीं हुआ और उनके सातबारा रिकॉर्ड अभी भी कर्जमुक्त नहीं हुए हैं. वडेट्टीवार ने वाढवण बंदर परियोजना को लेकर भी सरकार पर आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि परियोजना के लिए करीब 23,500 करोड़ रुपये की निविदा निकाली गई है और इसका ठेका अदाणी समूह को दिया गया है. उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार के खजाने से पैसा खर्च होने के बजाय यही राशि किसानों की मदद के लिए क्यों नहीं इस्तेमाल की जाती. उन्होंने शक्तिपीठ महामार्ग की जरूरत पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस परियोजना पर खर्च होने वाली राशि को सूखा प्रभावित किसानों की सहायता के लिए इस्तेमाल किया जाए तो संकट से निपटने में मदद मिल सकती है.

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