देवी पॉइंट मंदिर के अधिकार समेत 11 मांगों को लेकर आदिवासी संगठनों का आंदोलन

अमरावती के अंबादेवी मंदिर पहुंचकर की आरती

* आज से मुंबई के आजाद मैदान में आमरण अनशन का ऐलान
अमरावती/दि.28- चिखलदरा के देवी पॉइंट स्थित मंदिर के प्रबंधन और अधिकार को लेकर आदिवासी एवं गवली समुदाय के विभिन्न संगठनों ने आंदोलन का ऐलान किया है. इसी आंदोलन के तहत रविवार को बड़ी संख्या में आदिवासी और गवली समुदाय के लोग अमरावती स्थित अंबादेवी मंदिर पहुंचे. यहां उन्होंने आरती की और अपनी पारंपरिक भाषा में नारेबाजी करते हुए भारत माता की जय के नारे लगाए. इसके बाद आंदोलनकारी मुंबई के लिए रवाना हुए. संगठन की ओर से 28 सितंबर को मुंबई के आजाद मैदान में आंदोलन करने की घोषणा की गई है.
विद्रोही आदिवासी संगठन के अध्यक्ष रामकिशन गन्नू कास्डेकर तथा विद्रोही संगठन महाराष्ट्र राज्य के अध्यक्ष सचिन गोपाल गोरले की ओर से इस संबंध में प्रशासन को पूर्व सूचना दी गई है. उनके अनुसार, 15 जुलाई को चिखलदरा में तथा 12 अगस्त को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने भूख हड़ताल की गई थी. उनका दावा है कि उस समय प्रशासन की ओर से कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद आंदोलन समाप्त किया गया था, लेकिन अब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
* मंदिर प्रबंधन स्थानीय समुदाय को सौंपने की मांग
आंदोलनकारियों का कहना है कि चिखलदरा का देवी पॉइंट मंदिर आदिवासी समुदाय की आस्था से जुड़ा पुराना धार्मिक स्थल है. उनके अनुसार, पूर्व में मंदिर की देखभाल अंबादेवी संस्थान, अमरावती को सौंपी गई थी, लेकिन अब स्थानीय आदिवासी एवं गवली समुदाय मंदिर की देखभाल करने में सक्षम है. इसलिए मंदिर का प्रबंधन स्थानीय समुदाय को सौंपने, मंदिर से संबंधित पुराने रिकॉर्ड और खातों की जानकारी उपलब्ध कराने तथा मंदिर परिसर में प्रस्तावित कार्यों को लेकर स्थानीय लोगों से चर्चा करने की मांग की गई है. आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया है कि देवी पॉइंट परिसर में इंजीनियर को बुलाकर मंदिर के आसपास बाड़ लगाने की तैयारी की जा रही है. उनका कहना है कि इस तरह के किसी भी कार्य से पहले स्थानीय लोगों और संबंधित समुदाय से चर्चा की जानी चाहिए.
* जंगल की जमीन के हस्तांतरण पर भी सवाल
आंदोलनकारियों ने चिखलदरा क्षेत्र की जमीनों को लेकर भी कई सवाल उठाए हैं. उनका दावा है कि क्षेत्र की कुछ जमीन वन क्षेत्र से संबंधित है और ऐसी जमीन के हस्तांतरण अथवा उपयोग के लिए संबंधित कानूनी एवं प्रशासनिक मंजूरियां आवश्यक हैं. उन्होंने मंदिर और आसपास की जमीन के संबंध में पुराने दस्तावेजों तथा अधिकारों की जांच करने की मांग की है. हालांकि, जमीन के स्वामित्व, वन अधिकार और मंदिर प्रबंधन से जुड़े इन दावों पर संबंधित प्रशासन एवं अंबादेवी संस्थान का पक्ष सामने आना बाकी है. आंदोलनकारियों ने प्रशासन से पूरे मामले की दस्तावेजों के आधार पर जांच कराने की मांग की है.
* 11 मांगों को लेकर आंदोलन
आंदोलनकारियों की ओर से कुल 11 प्रमुख मांगें रखी गई हैं. इनमें देवी मंदिर के लिए आदिवासी गवली एवं मेलघाट के स्थानीय लोगों की संस्था का गठन, वैराट देवी मंदिर को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोलना, राजा पायथी गोंडराजा की समाधि का सौंदर्यीकरण और नगर परिषद की रिक्त जगहों को भरने की मांग शामिल है. इसके अलावा सभी स्कूलों में बीपीएड/बीपीईएस शारीरिक शिक्षकों की नियुक्ति, पात्र लोगों को घरकुल मंजूर करना, नगर परिषद क्षेत्र के अतिक्रमणकारियों को नियमानुसार पीआर कार्ड जारी करना, दिव्यांगों को सरकारी नियमों के अनुसार व्यवसाय के लिए 200 वर्गफुट जगह उपलब्ध कराना तथा मेलघाट में पेसा कानून का प्रभावी पालन करने की मांग की गई है. मेलघाट और नगर परिषद क्षेत्र के स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने तथा आदिवासियों की जमीन उन्हें वापस दिलाने की मांग भी आंदोलनकारियों ने उठाई है.
* आज से मुंबई में आंदोलन
संगठनों की ओर से दी गई सूचना के अनुसार, 28 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे से मुंबई के आजाद मैदान में आमरण अनशन किया जाएगा. किसान अखंडे, अभय वाजपेयी, बाजीलाल बेलसरे, महादेव खड़के, दिनेश टेकाम, दिलीप काकड़े, वासुदेवराव चौधरी, कल्पना बनकर, देवानंद धुर्वे, अर्जुन युवनाटे, रामेश्वर युवनाटे, कल्पना खांडे, गोपाल वाघमारे, दीपक मसराम और ज्योति बेलसरे सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने आंदोलन में शामिल होने की घोषणा की है. आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे. अब मुंबई में होने वाले आंदोलन की ओर प्रशासन और संबंधित विभागों का ध्यान केंद्रित हो गया है.

Back to top button