निर्भया सुरक्षा फ्रेमवर्क में गंभीर खामियों पर हाईकोर्ट सख्त
महाराष्ट्र सरकार और ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी को नोटिस

दो सप्ताह में जवाब तलब
मुंबई /दि.1– बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में निर्भया सुरक्षा फ्रेमवर्क के तहत सार्वजनिक एवं कमर्शियल वाहनों में अनिवार्य सुरक्षा उपकरणों की जांच और पंजीयन प्रक्रिया में कथित गंभीर अनियमितताओं को लेकर महाराष्ट्र सरकार और ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी को नोटिस जारी किया है. अदालत ने संबंधित पक्षों को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.
मामला एआईएस-140 व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी पैनिक बटन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य के विभिन्न आरटीओ कार्यालयों में कुछ वाहनों को वास्तविक सुरक्षा उपकरणों की भौतिक जांच, उनकी कार्यप्रणाली तथा बैकएंड डेटा के सत्यापन के बिना ही पंजीयन और फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए गए.
* आधिकारिक डेटा में कथित हेरफेर का आरोप
यह याचिका ओम ऑटो टेक और ओम ऑटोमोबाइल्स, जो संबंधित सुरक्षा उपकरणों के अधिकृत वितरक बताए गए हैं, की ओर से दायर की गई है. न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अटल बिहारी दुबे ने अदालत को बताया कि उनके पास कानूनी रूप से मैप किए गए वास्तविक ट्रैकिंग उपकरणों का डेटाबेस उपलब्ध है. आरोप है कि अनधिकृत लोगों द्वारा इस डेटा में डिजिटल स्तर पर हेरफेर किया गया. आधिकारिक आईएमईआई नंबरों के साथ-साथ इंजन और चेसिस विवरण में कथित रूप से बदलाव कर अन्य वाहनों का पंजीयन कराया गया.
याचिका के अनुसार, इस तरह 10 से अधिक कमर्शियल टूरिस्ट वाहनों को पांच आरटीओ कार्यालयों से कथित तौर पर मंजूरी और पंजीयन दिलाया गया, जबकि जिन वास्तविक उपकरणों के नंबर संबंधित वाहनों से जोड़े गए थे, वे याचिकाकर्ताओं के पास ही मौजूद थे.
* बिना भौतिक जांच फिटनेस प्रमाणपत्र देने का आरोप
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में वाहनों में सुरक्षा उपकरण लगे होने का रिकॉर्ड तैयार कर दिया गया, लेकिन वास्तव में उपकरण की मौजूदगी और कार्यप्रणाली की भौतिक जांच नहीं की गई. इसके बावजूद वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए गए. याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इस तरह की कथित अनियमितताओं से निर्भया सुरक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है. साथ ही नियमों का पालन करने वाले अधिकृत उपकरण वितरकों और वाहन संचालकों के हितों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बात याचिका में कही गई है.
* निर्भया कांड के बाद सुरक्षा उपकरण हुए अनिवार्य
अधिवक्ता अटल बिहारी दुबे ने अदालत को बताया कि दिल्ली में निर्भया कांड के बाद केंद्र सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियमों में नियम 125 (क) के माध्यम से सार्वजनिक सेवा वाहनों के लिए एआईएस-140 मानक वाले व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और इमरजेंसी पैनिक बटन को अनिवार्य किया था. इन उपकरणों का उद्देश्य आपात स्थिति में वाहन की लोकेशन की जानकारी उपलब्ध कराना और यात्रियों को तत्काल सहायता दिलाने के लिए संबंधित नियंत्रण कक्ष को अलर्ट करना है.
* हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से जवाब
मामले में लगाए गए आरोपों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को देखते हुए हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार तथा संबंधित ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी को नोटिस जारी किया है. पीठ ने संबंधित पक्षों से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है. मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि अदालत के अंतिम निर्णय या संबंधित जांच के निष्कर्ष के बाद ही हो सकेगी. फिलहाल हाईकोर्ट के समक्ष मुख्य मुद्दा वाहनों के पंजीयन, फिटनेस प्रमाणपत्र और एआईएस-140 सुरक्षा उपकरणों के सत्यापन की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है.





