विधायक बच्चू कडू को गुलाब देकर किसानों का ‘गांधीगिरी’ आंदोलन

आठ दिन में समाधान नहीं हुआ तो आमरण अनशन की चेतावनी
अमरावती/दि.3 – मंजूर फसल ऋण की पूरी राशि वितरित नहीं किए जाने के विरोध में किसानों ने 2 अक्तूबर को महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर ‘गांधीगिरी’ आंदोलन किया. किसानों ने अमरावती जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के अध्यक्ष एवं विधायक बच्चू कडू को गुलाब का फूल देकर अपनी मांगों का निवेदन सौंपा. आंदोलनकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पात्र किसानों को मंजूर फसल ऋण की केवल 50 प्रतिशत राशि वितरित की गई है और शेष राशि का वितरण 30 सितंबर से बंद है.
किसानों के अनुसार, कुछ पात्र किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रुपये यानी मंजूर फसल ऋण की 50 प्रतिशत राशि ही मिली है. शेष 50 प्रतिशत राशि अब तक नहीं मिलने से किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. किसानों ने कहा कि सूखे की स्थिति, बढ़ती उत्पादन लागत, कृषि उपज को मिलने वाला अपर्याप्त भाव और बढ़ते आर्थिक संकट के बीच पूर्ण फसल ऋण की आवश्यकता है. ऐसे में ऋण वितरण बंद किए जाने से उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं.
* सिबिल शुल्क की भी जांच की मांग
आंदोलनकर्ताओं ने कुछ किसानों से सिबिल के नाम पर 236 रुपये शुल्क लिए जाने का दावा करते हुए इस शुल्क की नियमसंगतता और उसके आधार की जांच करने की मांग की. साथ ही नए पात्र किसानों के ऋण प्रस्ताव स्वीकार कर उन्हें नियमानुसार फसल ऋण उपलब्ध कराने की मांग की गई. किसानों ने पात्र किसानों को मंजूर 100 प्रतिशत फसल ऋण वितरित करने, बंद ऋण वितरण तत्काल शुरू करने, नए पात्र किसानों को नियमानुसार ऋण उपलब्ध कराने, सिबिल शुल्क की जांच करने तथा संचालक मंडल के निर्णय की लिखित जानकारी देने की मांग की.
* आठ दिन में समाधान नहीं तो आमरण अनशन
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि आगामी आठ दिनों में उनकी मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो अमरावती जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के अध्यक्ष बच्चू कडू के चांदूर बाजार तहसील अंतर्गत कुरलपूर्णा स्थित निवास के सामने शांतिपूर्ण तरीके से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा. यह चेतावनी अमित पाटील होले, इंजी. अनिकेत वाकपांजर सहित अन्य किसानों ने दी.
* बैंक पदाधिकारियों के कथित वक्तव्य पर भी आपत्ति
बैंक में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अध्यक्ष एवं विधायक बच्चू कडू को अपना निवेदन सौंपा. आंदोलनकर्ताओं का आरोप है कि इस दौरान कुछ बैंक पदाधिकारियों ने किसानों से कथित रूप से अपमानजनक भाषा में बातचीत की. किसानों का दावा है कि उन्हें ‘वेडे’ कहे जाने के साथ ही ‘बैंक किसानों को कर्ज देती है, यही बड़ी बात है’ जैसे कथित वक्तव्य भी किए गए. किसानों ने इन कथित वक्तव्यों का विरोध करते हुए नाराजगी जताई.
आंदोलन में अमित पाटील होले, इंजी. अनिकेत वाकपांजर, प्रमोद पाटील होले, पूर्व उपसरपंच अनिल पाटील होले, विजय पाटील खंडारे, नीलेश राऊत, अनिल घुरडे, अंबादास टापरे, उपसरपंच गौतम वाकपांजर, सुभाष वाकपांजर, अशोक जुंबले, उपसरपंच बालासाहेब वाकपांजर, सतीश चुडे, नागेश होले, देविदास ओलोकार, सुधाकर वाकपांजर, नंदकिशोर टापरे सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे.

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