किसान ही नहीं, खेतिहर मजदूर भी होंगे दुर्घटना सुरक्षा योजना में शामिल
‘गोपीनाथ मुंडे किसान दुर्घटना सुरक्षा योजना’ में संशोधन

भूमिहीन मजदूरों और प्रमाणित महिला किसानों को भी मिलेगा लाभ
अमरावती/दि.5 – किसानों के साथ अब भूमिहीन खेतिहर मजदूरों और प्रमाणित महिला किसानों को भी दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिलेगी. राज्य सरकार ने ‘गोपीनाथ मुंडे किसान दुर्घटना सुरक्षा योजना’ में संशोधन करते हुए इसका दायरा बढ़ा दिया है. 10 सितंबर को जारी शासन निर्णय के अनुसार अब सातबारा पर नाम दर्ज होने की शर्त तक सीमित यह योजना भूमिहीन खेतिहर मजदूरों और ‘महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण अधिनियम, 2026’ के तहत प्रमाणित महिला किसानों तक भी विस्तारित की गई है.
खेती के काम में सीधे तौर पर शामिल भूमिहीन मजदूरों को दुर्घटना का जोखिम अधिक रहता है. दुर्घटना में मृत्यु अथवा स्थायी दिव्यांगता होने पर परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इन मजदूरों और महिला किसानों को दुर्घटना सुरक्षा कवच देने का निर्णय लिया है.
* मृत्यु पर दो लाख रुपये की सहायता
संशोधित योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु होने पर अथवा दोनों आंखों, दोनों हाथों या दोनों पैरों के नुकसान की स्थिति में 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. एक आंख और एक अंग के नुकसान पर भी 2 लाख रुपये की सहायता का प्रावधान है. वहीं एक आंख अथवा एक अंग के नुकसान पर 1 लाख रुपये की सहायता सीधे बैंक खाते में जमा की जाएगी.
* परिवार के सदस्यों को भी सुरक्षा कवच
संशोधित नियमों के अनुसार पात्र व्यक्ति के परिवार के 10 से 75 वर्ष आयु वर्ग के सदस्यों को भी दुर्घटना सुरक्षा का लाभ मिलेगा. इसमें माता-पिता, पति या पत्नी, पुत्र तथा अविवाहित, तलाकशुदा और विधवा बेटियों को शामिल किया गया है.
* ई-श्रम पंजीयन अनिवार्य
भूमिहीन खेतिहर मजदूरों के लिए योजना का लाभ लेने हेतु ई-श्रम पोर्टल पर असंगठित कामगार के रूप में पंजीयन अनिवार्य किया गया है. संबंधित मजदूरों को एक वर्ष के भीतर अपना पंजीयन कराना होगा. इससे पात्र मजदूरों की पहचान और लाभ वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.
* इन दुर्घटनाओं पर मिलेगा लाभ
योजना में सड़क और रेल दुर्घटना, डूबने, बिजली का झटका लगने, सांप के काटने, बिच्छू के डंक, लू लगने तथा जंगली अथवा अन्य जानवरों के हमले जैसी दुर्घटनाओं को शामिल किया गया है.
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* आठ दिन में जांच, 30 दिन में निर्णय
दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद राजस्व, पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त टीम को आठ दिनों के भीतर निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी. मृतक अथवा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति के वारिसों को दो महीने के भीतर संबंधित तालुका कृषि अधिकारी के कार्यालय में आवश्यक प्रस्ताव जमा करना होगा. इसके बाद तहसीलदार की अध्यक्षता वाली समिति 30 दिनों के भीतर मामले पर निर्णय लेगी.
* अमरावती में बड़ी संख्या में आवेदन
वर्ष 2025-26 में योजना के तहत प्राप्त 43 आवेदनों में से 27 मामलों में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्तर पर पहली किस्त के लिए मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है. वहीं 2026-27 में अब तक 198 आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनमें 102 मामले पहली किस्त की मंजूरी के लिए तथा 42 मामले जांच-पड़ताल के स्तर पर हैं. जिला अधीक्षख कृषि अधिकारी राहुल सतपुते ने पात्र खेतिहर मजदूरों और महिला किसानों से ई-श्रम पोर्टल पर पंजीयन कराने की अपील की है. उन्होंने कहा कि दुर्घटना होने की स्थिति में पात्र लाभार्थियों को संबंधित तहसील कृषि अधिकारी के कार्यालय में तत्काल आवश्यक प्रस्ताव प्रस्तुत करना चाहिए.





