गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ियों के ठंडे स्वागत को लेकर सवालों के घेरे में जिला प्रशासन एवं क्रीडा विभाग
कुमकुम मोहोड़, भारती फुलमाली व यशदीप भोगे के सम्मान में शहरवासियों की अपेक्षित भागीदारी नहीं दिखी

* आयोजन में खेल क्षेत्र के किसी बड़े चेहरे की मौजूदगी भी नहीं रही
* औपचारिकता तक सीमित स्वागत समारोह और रैली से खेलप्रेमियों में नाराजगी
अमरावती/दि.6- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए एशियन गेम्स 2026 से स्वर्ण पदक जीतकर लौटे अमरावती के खिलाड़ियों के स्वागत की तस्वीर शहर की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रही. कुमकुम मोहोड़, भारती फुलमाली और यशदीप भोगे की उपलब्धियां जहां अमरावती के लिए गौरव का विषय हैं, वहीं उनके स्वागत समारोह और रैली में अपेक्षित जनभागीदारी नहीं दिखाई देने से जिला खेल विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है. खेलप्रेमियों का सवाल है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमरावती का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों के लिए शहर को जोड़कर भव्य आयोजन क्यों नहीं किया जा सका. सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि स्वागत समारोह में प्रशासनिक अधिकारियों और कुछ जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद खेल क्षेत्र के ऐसे प्रमुख और चर्चित चेहरे दिखाई नहीं दिए, जिनकी उपस्थिति खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायी हो सकती थी. खेल संगठनों के कुछ पदाधिकारी जरूर मौजूद रहे, लेकिन आयोजन को जिस व्यापक खेल समुदाय से जोड़ने की अपेक्षा थी, उसका प्रभाव नजर नहीं आया.
* उपलब्धि स्वर्णिम, स्वागत फीका क्यों?
कुमकुम मोहोड़ ने एशियाई स्पर्धा में दो स्वर्ण और एक रजत पदक हासिल कर उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है. भारती फुलमाली और यशदीप भोगे ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया. ऐसे खिलाड़ियों के गृहनगर लौटने पर स्वागत केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न होकर अमरावती के युवाओं और खेल प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा का अवसर बन सकता था. लेकिन राजकमल चौक पर आयोजित समारोह और उसके बाद निकली स्वागत रैली में शहर की वह व्यापक भागीदारी दिखाई नहीं दी, जिसकी उम्मीद इन उपलब्धियों को देखते हुए की जा रही थी. यही वजह है कि खेलप्रेमियों के बीच यह चर्चा तेज है कि आयोजन का प्रचार-प्रसार और नियोजन पर्याप्त था या नहीं.
* स्कूल-कॉलेजों को जोड़ने का अवसर भी हाथ से गया?
खेलप्रेमियों का कहना है कि कुमकुम की उपलब्धि विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी है. ऐसे में शहर और जिले के स्कूलों, महाविद्यालयों, खेल अकादमियों तथा विभिन्न क्रीड़ा संगठनों को पहले से जोड़कर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और युवा खिलाड़ियों की सहभागिता सुनिश्चित की जा सकती थी. सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जिला खेल विभाग के पास अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं के स्वागत के लिए कोई पूर्व निर्धारित प्रोटोकॉल है? यदि नहीं है तो ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई, ताकि भविष्य में किसी खिलाड़ी की उपलब्धि के समय अंतिम समय की भागदौड़ के बजाय व्यापक स्तर पर आयोजन किया जा सके?
* ‘खानापूर्ति’ की चर्चा से नाराजगी
स्वागत मंच पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी, ढोल-ताशे और आतिशबाजी के बावजूद खेलप्रेमियों के एक वर्ग को आयोजन अपेक्षित स्तर का नहीं लगा. कुछ खेलप्रेमियों ने इसे केवल औपचारिकता और खानापूर्ति तक सीमित रहने वाला आयोजन बताया. हालांकि, आयोजन की वास्तविक परिस्थितियों और उपलब्ध समय को देखते हुए इस आकलन पर भी मतभेद हैं. इसी बीच यह सवाल अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है कि खिलाड़ियों के सम्मान का केंद्र स्वयं खिलाड़ी और उनकी उपलब्धि थी या केवल एक तत्काल कार्यक्रम पूरा करना. अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं के स्वागत को शहर की खेल संस्कृति से जोड़ने का अवसर कितना प्रभावी ढंग से इस्तेमाल हुआ, इसका जवाब खेल विभाग को देना होगा.
* खेल विभाग का जवाब – ‘शॉर्ट नोटिस’ में किया बेहतर आयोजन
इन सवालों के बीच दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने विभागीय खेल उपसंचालक अविनाश पुंड और जिला खेल अधिकारी गणेश जाधव से बात की. दोनों अधिकारियों ने आयोजन में लापरवाही या खानापूर्ति के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि खिलाड़ियों के अमरावती आगमन की निश्चित जानकारी अंतिम समय में मिली थी. अधिकारियों के अनुसार, खिलाड़ियों के स्वदेश लौटने के बाद दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की संभावना थी. इसलिए उनके गृहनगर पहुंचने की तारीख और समय पहले से निश्चित नहीं था. खिलाड़ी रविवार शाम नागपुर होते हुए अमरावती पहुंचे. इसके बाद सोमवार सुबह स्वागत रैली आयोजित करने का निर्णय लिया गया.
* अब अगली कसौटी बड़े सत्कार की
खेल विभाग का ‘शॉर्ट नोटिस’ वाला स्पष्टीकरण सामने आने के बाद भी स्वागत को लेकर उठे सवाल पूरी तरह खत्म नहीं होते. क्योंकि खिलाड़ियों का आगमन भले ही अंतिम समय में तय हुआ हो, लेकिन उनकी उपलब्धियां देश लौटने से पहले ही सामने आ चुकी थीं. इसलिए भविष्य में ऐसे अवसरों के लिए पूर्व नियोजन और स्पष्ट समन्वय व्यवस्था की जरूरत सामने आती है. कुमकुम मोहोड़, भारती फुलमाली और यशदीप भोगे ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी भूमिका निभा दी है. अब खेल विभाग और अमरावती की जिम्मेदारी है कि इन उपलब्धियों को केवल एक स्वागत रैली की तस्वीरों तक सीमित न रहने दिया जाए. विभाग द्वारा प्रस्तावित भव्य सत्कार में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि शहर अपने खिलाड़ियों की उपलब्धियों को किस तरह सम्मान, प्रोत्साहन और मजबूत खेल संस्कृति में बदलने जा रहा है.

* 500 के आसपास खेलप्रेमी मौजूद थे
विभागीय खेल उपसंचालक अविनाश पुंड ने कहा कि बहुत कम समय मिलने के बावजूद जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और खेल संगठनों को सूचना दी गई तथा उपलब्ध समय में आयोजन की तैयारियां पूरी की गईं. उनके अनुसार राजकमल चौक पर करीब 500 खेलप्रेमी मौजूद थे. दो सुसज्जित वाहनों में खिलाड़ियों को बिठाकर ढोल-ताशे और आतिशबाजी के साथ रैली निकाली गई. पुंड ने कहा कि ऐसे आयोजन को ‘फ्लॉप शो’ कहना उचित नहीं है. अमरावती का नाम देश और दुनिया में रोशन करने वाले खिलाड़ियों का आगे चलकर और भव्य नागरिक अभिनंदन किया जाएगा तथा इसके लिए नियोजन किया जा सकता है.

* तीनों खिलाड़ी अमरावती ही नहीं, देश की शान
जिला खेल अधिकारी गणेश जाधव ने कहा कि तीनों खिलाड़ियों की सफलता पर उन्हें गर्व है और वे अमरावती के साथ महाराष्ट्र तथा पूरे देश की शान हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे खिलाड़ियों के सम्मान में किसी तरह की कमी रखने का सवाल ही नहीं है. जाधव के अनुसार अमरावती में जिला खेल विभाग की तीरंदाजी रेंज देश की प्रमुख रेंज में शामिल है और यहां 100 से अधिक धनुर्धर प्रशिक्षण ले रहे हैं. विभाग का प्रयास है कि आने वाले वर्षों में इन्हीं सुविधाओं के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जाएं.
* जिला प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं
इस संदर्भ में जानकारी एवं प्रतिक्रिया हेतु दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने जिला प्रशासन से जुडे जिलाधीश आशीष येरेकर एवं निवासी उपजिलाधीश संतोष काकडे से भी प्रत्यक्ष एवं फोन के जरीए संपर्क करने के प्रयास किए. परंतु अमूमन मीडिया से दूरी बनाए रखनेवाले जिलाधीश आशीष येरेकर इस मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया देने हेतु उपलब्ध नहीं हो पाए. वहीं निवासी उपजिलाधीश संतोष काकडे किसी महत्वपूर्ण शासकीय काम में व्यस्त रहने की जानकारी प्राप्त हुई. जिसके चलते उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिल पायी.





