23 साल से अटका अमरावती-परतवाड़ा मार्ग अब एमएसआईडीसी के हवाले
मरम्मत खर्च और ठेकेदार के नाम का बोर्ड अचानक लगा

राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर चौपदरीकरण तक की योजनाएं अधर में
अमरावती/दि. 10 – अमरावती-अचलपुर-बरहानपुर अंतरराज्यीय मार्ग के उन्नयन और चौड़ीकरण की योजना पिछले 23 वर्षों से अटकी हुई है. ब्रिटिशकालीन इस सड़क की बदहाल स्थिति से वाहन चालकों और यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है. इसी बीच, अमरावती-परतवाड़ा राज्य महामार्ग का काम अचलपुर सार्वजनिक निर्माण विभाग से हटाकर महाराष्ट्र राज्य बुनियादी ढांचा विकास महामंडल (एमएसआईडीसी) को सौंप दिया गया है. इससे सड़क का काम एक बार फिर अटकने की आशंका जताई जा रही है.
बता दें कि, वर्ष 2002-03 में इस मार्ग को राष्ट्रीय महामार्ग के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव सार्वजनिक निर्माण विभाग ने तैयार किया था. वर्ष 2015 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इसका सर्वेक्षण किया और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी मंजूर हुई. वर्ष 2018 में एशियाई विकास बैंक ने मार्ग के चौपदरीकरण सहित विकास कार्य को सैद्धांतिक मंजूरी दी. इसके बाद वर्ष 2019 में भोपाल की आइकॉन इंजीनियरिंग ने सर्वेक्षण कर चौपदरीकरण के लिए करीब 600 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली डीपीआर तैयार की. हालांकि, यह प्रस्ताव भी आगे नहीं बढ़ सका. बाद में इस मार्ग को हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल के तहत प्रस्तावित कर नई डीपीआर तैयार की गई. करीब 54 किलोमीटर लंबे मार्ग के उन्नयन, चौड़ीकरण, मजबूतीकरण और डामरीकरण की जरूरत है. लेकिन अब काम सार्वजनिक निर्माण विभाग से लेकर एमएसआईडीसी को सौंप दिया गया है.
* ढाई हजार पेड़ों की कटाई की योजना भी अटकी
मार्ग के विकास के लिए करीब ढाई हजार पेड़ों को काटने और इसके बदले साढ़े सात हजार पौधे लगाने की योजना बनाई गई थी. लेकिन यह प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ सकी. सड़क की जर्जर हालत को देखते हुए नागरिकों की कृति समिति लगातार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान इस ओर आकर्षित कर रही है. इस बीच, सड़क की मरम्मत, उस पर होने वाले करोड़ों रुपये के खर्च और संबंधित ठेकेदार का नाम दर्शाने वाला बोर्ड अचानक दिखाई देने लगा है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सड़क के व्यापक उन्नयन की योजना वर्षों से लंबित है, तो मरम्मत के काम और खर्च की वास्तविक स्थिति क्या है.





