पोहरा बंदी के वाघमाई मंदिर में राहगीर भी शीश नवाकर करते हैं यात्रा
पोहरा बंदी के वाघमाई मंदिर की महिमा

* अमरावती-चांदूर रेलवे मार्ग पर स्थित प्राचीन मंदिर के प्रति गहरी आस्था
* अश्विन और चैत्र नवरात्रि में होते हैं विशेष आयोजन
अमरावती/दि.17 – अमरावती-चांदूर रेलवे मार्ग पर स्थित प्राचीन वाघमाई मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. इस मार्ग से गुजरने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक देवी को नमन करना नहीं भूलते. कई यात्री मंदिर के सामने से गुजरते समय हॉर्न बजाकर देवी का स्मरण करते हैं और इसके बाद अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं.
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मंदिर में विराजमान देवी की मूर्ति जमीन से प्रकट हुई थी. कहा जाता है कि पहले पोहरा के घने जंगलों में रहने वाले धारीदार बाघ यहां आकर देवी के सामने नतमस्तक होते थे. इसी मान्यता के चलते मंदिर का नाम वाघमाई पड़ा.
* घने जंगलों के बीच स्थित है मंदिर
वाघमाई मंदिर के आसपास आज भी जंगल का क्षेत्र मौजूद है. यहां जंगली जानवरों की आवाजाही बनी रहती है. इस मार्ग से यात्रा करने वाले लोगों को कई बार वन्यजीवों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में जंगल से गुजरते समय सावधानी बरतना जरूरी है. स्थानीय लोगों और इस मार्ग पर नियमित रूप से सफर करने वाले यात्रियों के बीच वाघमाई मंदिर के प्रति विशेष श्रद्धा है. कई लोग अपनी यात्रा शुरू करने से पहले या मंदिर के सामने से गुजरते समय देवी का स्मरण करते हैं.
* अश्विन और चैत्र नवरात्रि में विशेष आयोजन
वाघमाई मंदिर में अश्विन और चैत्र नवरात्रि के दौरान विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इन अवसरों पर श्रद्धालु बड़ी संख्या में देवी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ अन्नदान और भोजन वितरण जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं. नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण रहता है. श्रद्धालु परिवार के साथ पहुंचकर देवी के दर्शन करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
* यात्रियों की आस्था का प्रमुख केंद्र
अमरावती-चांदूर रेलवे मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों के लिए वाघमाई मंदिर आस्था और विश्वास का प्रतीक है. वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, लोग देवी को नमन कर अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं. घने जंगलों के बीच स्थित यह प्राचीन मंदिर धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं को संजोए हुए है. नवरात्रि के दौरान यहां होने वाले आयोजनों से मंदिर का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है.





