अकोट में रसायनों से केले पकाने का संदेह, एफडीए जांच करेगा?

आकर्षक पीले केले दूसरे ही दिन पड़ रहे नरम

* प्रतिबंधित कैल्शियम कार्बाइड के इस्तेमाल की आशंका
* ग्राहकों ने उठाई जांच की मांग
अकोट/दि. 17 – त्योहारों के मौसम में अकोट शहर के बाजारों में फलों की मांग बढ़ गई है. नवरात्रोत्सव के दौरान व्रत, धार्मिक अनुष्ठानों और रोजमर्रा के आहार के लिए केले की खरीदारी भी बढ़ी है. इसी बीच बाजार से खरीदे गए केले दूसरे ही दिन नरम पड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं. बाहर से चमकीले पीले और आकर्षक दिखाई देने वाले इन केलों को जल्दी पकाने के लिए स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल किए जाने की आशंका ग्राहकों ने जताई है. हालांकि, अकोट के बाजार में प्रतिबंधित रसायनों के इस्तेमाल की अभी तक किसी आधिकारिक जांच से पुष्टि नहीं हुई है.
ग्राहकों का सवाल है कि फलों की बढ़ती मांग का फायदा उठाकर कहीं कुछ व्यापारी केले कृत्रिम तरीके से तो नहीं पका रहे हैं. ऐसे में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) बाजार में बिक रहे केलों की जांच कब करेगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं. त्योहारों के दौरान कम समय में फलों को बाजार में उतारकर अधिक मुनाफा कमाने की कोशिश में खाद्य सुरक्षा के नियमों की अनदेखी होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
ग्राहकों के अनुसार, कुछ केले खरीदने के अगले ही दिन नरम पड़ जाते हैं, जबकि कुछ में असामान्य बदलाव दिखाई देते हैं. इससे यह संदेह पैदा हो रहा है कि फलों को जल्दी पकाने के लिए किस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जा रहा है. नागरिकों ने आशंका जताई है कि केलों को जल्दी पकाने के लिए प्रतिबंधित कैल्शियम कार्बाइड जैसे रसायन का इस्तेमाल हो सकता है. हालांकि, केवल केले के रंग या बाहरी रूप को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि उसे प्राकृतिक रूप से पकाया गया है या किसी अनुचित तरीके से. इसलिए बाजार में उपलब्ध केलों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए संबंधित विभाग की जांच जरूरी है.
ग्राहकों के मुताबिक बाजार से खरीदे गए केले कई बार अगले ही दिन नरम पड़ जाते हैं और उनमें अप्रत्याशित बदलाव दिखाई देते हैं. इसलिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन को केलों को पकाने की प्रक्रिया की जांच करनी चाहिए, ताकि ग्राहकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण फल मिल सकें. खाद्य सुरक्षा के नियमों के अनुसार, कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल करके फलों को पकाना प्रतिबंधित है. यदि जांच में इस तरह की नियमविरुद्ध प्रक्रिया सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए. नागरिकों ने मांग की है कि केवल शिकायतों का इंतजार करने के बजाय प्रशासन बाजार में बिक रहे फलों की गुणवत्ता, उन्हें पकाने के तरीकों और भंडारण व्यवस्था की भी जांच करे.
* नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अधिकारी रवींद्र सोलंके ने कहा कि केले पकाने की प्रक्रिया में किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर नागरिक विभाग को इसकी जानकारी दें. जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. अब देखना यह है कि अकोट के बाजार में बिक्री के लिए लाए जा रहे केलों की जांच कब होती है और ग्राहकों की शिकायतों के आधार पर प्रशासन क्या कदम उठाता है.

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