अंबादेवी मंदिर प्रवेश सत्याग्रह की एक सदी लंबी यात्रा
अमरावती विद्यापीठ में राष्ट्रीय संगोष्ठी के लिए 5 लाख रुपये के प्रावधान को मंजूरी

अमरावती/दि.30 -सामाजिक समानता के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले अंबादेवी मंदिर प्रवेश सत्याग्रह की शताब्दी यात्रा और उसकी वर्तमान प्रासंगिकता पर संत गाडगे बाबा अमरावती विद्यापीठ में राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी. विद्यापीठ के अध्ययन केंद्र की ओर से आयोजित होने वाली इस संगोष्ठी के लिए 5 लाख रुपये के विशेष प्रावधान को सीनेट ने मंजूरी दे दी है.
अमरावती में अंबादेवी मंदिर प्रवेश आंदोलन सामाजिक समानता और मंदिर प्रवेश के अधिकार से जुड़ा ऐतिहासिक संघर्ष रहा है. उपलब्ध ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार यह सत्याग्रह 26 जून 1927 को शुरू हुआ था और इसमें डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी.
* सीनेट में प्रस्ताव को मंजूरी
बुधवार को हुई सीनेट की बैठक में सदन के सदस्य डॉ. संतोष बनसोड़ ने इस संबंध में प्रस्ताव रखा. प्रस्ताव में अंबादेवी मंदिर प्रवेश सत्याग्रह की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके सामाजिक प्रभाव और वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा आयोजित करने की मांग की गई थी. सीनेट ने संगोष्ठी के लिए 5 लाख रुपये के प्रावधान को मंजूरी दे दी. इस संगोष्ठी में देशभर के शोधकर्ता, शिक्षाविद और सामाजिक अध्ययन से जुड़े विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे. विभिन्न विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए जाएंगे.
* 100 साल बाद विचारों की प्रासंगिकता पर मंथन
संगोष्ठी में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के सामाजिक आंदोलन, समानता के विचार और बहुजन समाज पर उनके प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा. साथ ही यह चर्चा होगी कि करीब एक सदी पहले शुरू हुए मंदिर प्रवेश और सामाजिक समानता के संघर्ष के विचार आज के सामाजिक और लोकतांत्रिक संदर्भ में किस तरह प्रासंगिक हैं. अंबादेवी मंदिर सत्याग्रह का उद्देश्य केवल मंदिर में प्रवेश प्राप्त करना नहीं था, बल्कि सामाजिक समानता और अधिकारों के प्रश्न को सामने लाना भी था. ऐतिहासिक विवरणों में इसे दलितों के समान धार्मिक एवं सामाजिक अधिकारों के संघर्ष के रूप में वर्णित किया गया है.
* शोधार्थियों को मिलेगा ऐतिहासिक आंदोलन के अध्ययन का अवसर
विद्यापीठ की इस पहल के माध्यम से अंबादेवी मंदिर प्रवेश सत्याग्रह के इतिहास को नए दृष्टिकोण से समझने और उस पर शोध को प्रोत्साहित करने का अवसर मिलेगा. संगोष्ठी में आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सामाजिक प्रभाव, डॉ. आंबेडकर के विचार और वर्तमान समाज में समानता के सवालों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है. इस पहल से अमरावती से जुड़े इस महत्वपूर्ण सामाजिक आंदोलन को राष्ट्रीय अकादमिक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर भी मिलेगा





