एशियाई खेलों के क्वार्टरफाइनल में धमाकेदार एंट्री
अमरावती की 17 साल की कुमकुम मोहोड का कमाल

भारत की इकलौती पदक की उम्मीद बनीं
अमरावती से आइची तक, एक किशोरी का बड़ा सपना
अमरावती/दि.29 – सिर्फ 17 साल की उम्र में, जब ज्यादातर किशोर 12वीं की परीक्षाओं की तैयारी में लगे होते हैं, अमरावती की कुमकुम अनिल मोहोड जापान के ओकाजाकी में तेज हवाओं और कोरियाई दिग्गजों को मात दे रही हैं.
मंगलवार को, एशियाई खेलों में पदार्पण कर रही इस तीरंदाज ने लगातार दो मैचों में 6-0 से शानदार जीत दर्ज कर 20वें एशियाई खेलों की महिला रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा के क्वार्टरफाइनल में धमाकेदार एंट्री की – और इस वर्ग में भारत की इकलौती पदक की उम्मीद बनकर उभरीं. एक हाई-ड्रामा भरे दिन में, भारत की दूसरी महिला रिकर्व तीरंदाज कीर्ति शर्मा प्री-क्वार्टरफाइनल में शीर्ष वरीयता प्राप्त कोरियाई खिलाड़ी कांग चेयॉन्ग से 3-7 से हारकर बाहर हो गईं. इसके बाद अब कुमकुम ही पदक की दौड़ में बची हैं.
* लगातार दो बड़ी जीत
एशियाई खेलों में अपना पहला मुकाबला खेल रही कुमकुम बड़े मंच पर बिल्कुल भी घबराई हुई नहीं दिखीं. 1/16 एलिमिनेशन राउंड में उन्होंने मंगोलिया की बिशिन्दी उरांतुंगलाग को 6-0 से हराया, और उनका प्रदर्शन बेहद सटीक रहा. उन्होंने वही आक्रामकता प्री-क्वार्टरफाइनल में भी जारी रखी, जहां उन्होंने बांग्लादेश की साइमा सलाह उद्दीन को सीधे सेटों में फिर से 6-0 (29-26, 28-26, 27-26) से हराकर अंतिम आठ में अपनी जगह पक्की कर ली. खास बात सिर्फ स्कोरलाइन नहीं, बल्कि उनकी निरंतरता थी. जापान की रेंज में जब हवा तेज हुई, तब भी कुमकुम के तीर लगातार गोल्ड में लगते रहे. अब उनका सबसे कठिन इम्तिहान है. 3 अक्टूबर को क्वार्टरफाइनल में उसी शीर्ष वरीयता प्राप्त कोरियाई खिलाड़ी कांग चेयॉन्ग से मुकाबला होगा, जिसने उनकी साथी खिलाड़ी को हराया था.
* विदर्भ से वर्ल्ड कप गोल्ड तक
जापान में कुमकुम का यह प्रदर्शन कोई इत्तेफाक नहीं है. अमरावती जिलेके खेलो इंडियाकी रेंज में कोच प्रफुल्ल डांगे के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग लेने वाली इस किशोरी ने वर्ल्ड कप सर्किट पर अपने डेब्यू साल में ही दो वर्ल्ड कप गोल्ड मेडल जीत लिए हैं. वह जापान में दो और पदकों की दौड़ में भी हैं. कुमकुम महिला रिकर्व टीम और मिक्स्ड रिकर्व टीम, दोनों का हिस्सा हैं, जो सेमीफाइनल में पहुंच चुकी हैं.
* कोच बोले- उसे पोडियम मैच पसंद हैं
अमरावती से बात करते हुए उनके कोच प्रफुल्ल डांगे ने गर्व के साथ कहा, मैंने अभी उससे बात की है. वह बहुत उत्साहित है और आत्मविश्वास से भरी है और अच्छा शूट कर रही है. कोरियाई टॉप-सीड के खिलाफ क्वार्टरफाइनल के बारे में डांगे ने वही कहा जो कुमकुम को सबसे अच्छी तरह परिभाषित करता है. उसे कड़े प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ खेलना पसंद है क्योंकि यह उसे अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करता है. उसे पोडियम मैच पसंद हैं और उसके मौजूदा फॉर्म को देखते हुए, वह तीनों – टीम, मिक्स्ड और व्यक्तिगत – स्पर्धाओं में पदक लाने के लिए तैयार दिख रही है. अमरावती की छोटी गलियों से लेकर एशिया की सर्वश्रेष्ठ तीरंदाजों का सामना करने तक, कुमकुम मोहोड अब सिर्फ एक उभरती हुई प्रतिभा नहीं रहीं. 17 साल की उम्र में, वह महिला रिकर्व में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद बन गई हैं.





