पहले अपने बच्चों को खिलाओ, फिर प्रचार करो
गुटखा का प्रचार करनेवाले कलाकारों पर एफडीए आयुक्त मुंढे की तीखी टिप्पणी

मुंबई/दि.29 – महाराष्ट्र अन्न एवं औषध प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने पान मसाला और गुटखा उत्पादों के प्रचार-प्रसार में शामिल फिल्मी हस्तियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जो लोग ऐसे उत्पादों का विज्ञापन करते हैं, उन्हें अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी समझनी चाहिए. उन्होंने टिप्पणी की कि यदि कोई व्यक्ति गुटखे या पान मसाले को अच्छा बताकर उसका प्रचार कर रहा है, तो उसे पहले स्वयं उसका सेवन करना चाहिए और अपने बच्चों को भी उसकी आदत डालनी चाहिए, उसके बाद ही दूसरों को ऐसा करने की सलाह देनी चाहिए.
मुंढे ने यह टिप्पणी एक कार्यक्रम में गुटखा एवं पान मसाला विज्ञापनों पर एफडीए की हालिया कार्रवाई के संदर्भ में की. उल्लेखनीय है कि विभाग ने हाल ही में अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी कर ऐसे उत्पादों के प्रचार संबंधी सामग्री हटाने के निर्देश दिए थे.
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि उन्हें चापलूसी और दोहरे मापदंडों से सख्त आपत्ति है. उनका मानना है कि सार्वजनिक जीवन और निजी जीवन के लिए अलग-अलग नैतिक मानदंड नहीं हो सकते. यदि कोई प्रसिद्ध व्यक्ति किसी उत्पाद का समर्थन करता है, तो उसे उस उत्पाद के प्रभावों और समाज पर पड़ने वाले परिणामों की जिम्मेदारी भी स्वीकार करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि लोग अक्सर यह तर्क देते हैं कि अभिनेता या सेलिब्रिटी केवल विज्ञापन का चेहरा होते हैं और उत्पाद की जिम्मेदारी निर्माता की होती है, लेकिन यह दृष्टिकोण पूरी तरह सही नहीं है. किसी उत्पाद के प्रचार में शामिल व्यक्ति का प्रभाव लाखों लोगों तक पहुंचता है, इसलिए उसकी जवाबदेही भी बनती है.
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, अभिनेता और अन्य सार्वजनिक हस्तियां केवल यह कहकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं कि विज्ञापन करना उनका पेशा है. जब कोई प्रसिद्ध व्यक्ति किसी उत्पाद का समर्थन करता है, तो वह अप्रत्यक्ष रूप से लोगों को उस उत्पाद के उपयोग के लिए प्रेरित भी करता है. उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में प्रसिद्ध व्यक्तियों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए. लोगों के बीच उनकी विश्वसनीयता और लोकप्रियता को देखते हुए उनके संदेश का व्यापक प्रभाव पड़ता है.
गुटखा और पान मसाला विज्ञापनों को लेकर एफडीए द्वारा जारी नोटिसों के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है. विभाग का मानना है कि ऐसे उत्पादों के प्रचार से विशेष रूप से युवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. इसी पृष्ठभूमि में तुकाराम मुंढे का यह बयान सामने आया है, जिसने विज्ञापन जगत और मनोरंजन उद्योग में नई बहस छेड़ दी है. मुंढे के बयान के बाद यह प्रश्न फिर से प्रमुखता से उठने लगा है कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिम वाले उत्पादों के प्रचार में सेलिब्रिटीज की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी कितनी होनी चाहिए.





