12 साल के दस्तावेज़ सिर पर रखकर सीईओ के पास पहुंचा युवक
न्याय की गुहार ने खींचा सबका ध्यान

अमरावती/दि.6 – अमरावती जिला परिषद में बुधवार को एक युवक की अनोखी एंट्री पूरे दिन चर्चा का विषय बनी. नांदगांव खंडेश्वर तहसील के पाहुर निवासी अमोल ठाकरे अपने 12 वर्षों से लंबित मामले से जुड़े दस्तावेजों का भारी बंडल सिर पर रखकर सीधे जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कार्यालय पहुंच गए. उनका कहना था कि वर्षों से न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बावजूद समाधान नहीं मिला, इसलिए उन्होंने यह अनोखा तरीका अपनाया.
अमोल ठाकरे ने बताया कि उनके परिवार के पास गांव में दो भूखंड थे. इनमें से एक उनके पिता के नाम पर और दूसरा उनकी दादी के नाम पर था. उनका आरोप है कि उनकी दादी के नाम दर्ज भूखंड को गलत तरीके से किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज कर दिया गया. इस संबंध में उन्होंने 11 नवंबर 2014 को ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद में लिखित शिकायत दी थी.
* 12 वर्षों से न्याय की तलाश
अमोल के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में उन्होंने कई बार संबंधित विभागों में आवेदन दिए, अधिकारियों से मुलाकात की और लगातार मामले का पीछा किया. उन्होंने जिलाधिकारी और संभागीय आयुक्त कार्यालय के सामने तीन बार भूख हड़ताल भी की. इसके अलावा राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री, केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी शिकायत पहुंचाई, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला.
* दस्तावेजों का बोझ लेकर पहुंचे उएज कार्यालय
लगातार प्रयासों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से परेशान अमोल 5 अगस्त को सिर पर दस्तावेजों का बोझ लेकर जिला परिषद कार्यालय पहुंचे. उन्होंने अपने मामले से संबंधित सभी दस्तावेज मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्यम गांधी को सौंपे और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की.
* चार घंटे तक किया इंतजार
बताया गया कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्यम गांधी लगातार बैठकों में व्यस्त थे, जिसके कारण अमोल ठाकरे को करीब चार घंटे तक इंतजार करना पड़ा. दोपहर करीब 12 बजे जिला परिषद पहुंचे अमोल की शाम लगभग 4 बजे उएज से मुलाकात हुई. मुलाकात के दौरान उन्हें मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया. अमोल ठाकरे की यह अनोखी पहल जिला परिषद परिसर में दिनभर चर्चा का विषय बनी रही. उनके सिर पर वर्षों से जमा दस्तावेजों का बोझ न्याय की लंबी लड़ाई और प्रशासनिक प्रक्रिया की धीमी गति का प्रतीक बन गया.





