जलका शहापूर में अवैध ब्लास्टिंग की तैयारी से हड़कंप!

35 स्थानों पर विस्फोटक लगाने के लिए खोदे गए गड्ढे

प्रशासन की धड़क कार्रवाई, बोर ब्लास्टिंग वाहन, पोकलैंड और ट्रक समेत सामग्री जब्त
अमरावती/दि.7 – जलका शहापूर परिसर में कुरलकर की खदान में मंगलवार सुबह कथित रूप से अनधिकृत बोर ब्लास्टिंग की तैयारी किए जाने का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया. खदान में ब्लास्टिंग के लिए एक-दो नहीं, बल्कि 35 स्थानों पर गड्ढे खोदे जाने की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों ने तत्काल प्रशासन को इसकी सूचना दी. नागरिकों की शिकायत के बाद दोपहर के समय प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की. कार्रवाई के दौरान बोर ब्लास्टिंग वाहन, एक पोकलैंड, एक ट्रक तथा ब्लास्टिंग का अन्य साहित्य जब्त किया गया. जब्त सामग्री को नांदगांव पेठ पुलिस थाने के परिसर में रखा गया है.
परिसर नागरिकों का आरोप है कि जळका शहापूर परिसर में आवश्यक अनुमति के बिना ब्लास्टिंग किए जाने से उन्हें लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मंगलवार सुबह कुरलकर की खदान में 35 स्थानों पर बोर ब्लास्टिंग के लिए गड्ढे तैयार किए जाने की जानकारी मिलने के बाद नांदगांव पेठ के कुछ सामाजिक कार्यकर्ता और जळका शहापूर के नागरिक मौके पर पहुंचे. नागरिकों द्वारा आपत्ति दर्ज कराने और प्रशासन को सूचना दिए जाने के बाद अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की. इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल बन गया है.

* कार्रवाई के दौरान नेताओं के फोन आने की चर्चा
कार्रवाई के दौरान कुछ राजनीतिक नेताओं की ओर से अधिकारियों को फोन किए जाने की चर्चा भी सामने आई है. इसके चलते नागरिकों ने सवाल उठाया है कि क्या बोर ब्लास्टिंग की कार्रवाई पर किसी तरह का दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा था? इन फोन कॉल्स के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था और अधिकारियों पर किसी प्रकार का दबाव डाला गया था या नहीं, इसकी भी जांच की जानी चाहिए, ऐसी मांग स्थानीय नागरिकों की ओर से की जा रही है. हालांकि, इस संबंध में संबंधित राजनीतिक नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है.

* पटवारी की भूमिका पर भी उठे सवाल
पूरे मामले में स्थानीय पटवारी की भूमिका को लेकर भी नागरिकों ने सवाल उठाए हैं. क्षेत्र में चर्चा है कि प्रशासनिक अधिकारियों के कार्रवाई के लिए पहुंचने की जानकारी कथित तौर पर खदान संचालकों को पहले ही मिल जाती थी. नागरिकों ने आरोप लगाया है कि क्या प्रशासन में ही कोई व्यक्ति खदान संचालकों को कार्रवाई की जानकारी पहुंचा रहा था? साथ ही, स्थानीय पटवारी पर खदान संचालकों को कथित रूप से सहयोग करने के आरोप भी लगाए गए हैं. इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग नागरिकों ने की है.

* ‘पटवारी स्कॉर्पियो लेकर चले गए?’
इस बीच, नागरिकों के घटनास्थल पर बड़ी संख्या में जमा होने का पता चलने के बाद पटवारी मनोज धर्माले के स्कॉर्पियो वाहन से घटनास्थल से चले जाने की चर्चा भी सामने आई है. इतना ही नहीं, क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि उक्त स्कॉर्पियो वाहन खदान मालिकों की ओर से ‘गिफ्ट’ किया गया था. हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. इसके बावजूद इस चर्चा के कारण पटवारी और खदान संचालकों के बीच कथित संबंधों को लेकर सवाल उठने लगे हैं. नागरिकों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की गहन जांच कराने की मांग की है.

* 35 गड्ढे कैसे खोदे गए, प्रशासन को भनक क्यों नहीं लगी?
प्रशासन द्वारा ब्लास्टिंग का साहित्य और मशीनरी जब्त किए जाने के बाद भी कई सवालों के जवाब सामने आना बाकी है. यदि संबंधित ब्लास्टिंग के लिए आवश्यक अनुमति नहीं थी, तो 35 स्थानों पर ब्लास्टिंग की तैयारी कैसे की गई? इतने बड़े स्तर पर तैयारी होने के बावजूद प्रशासन को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली? कार्रवाई से पहले संबंधित लोगों तक सूचना कैसे पहुंची?

* इन सवालों की जांच की मांग अब जोर पकड़ रही
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कार्रवाई केवल ब्लास्टिंग मशीनरी और सामग्री जब्त करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. ब्लास्टिंग की तैयारी के लिए जिम्मेदार लोगों, नियमों का उल्लंघन करने वालों तथा संबंधितों को कथित रूप से सहयोग करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए. यह कार्रवाई अमरावती तहसील कार्यालय के मंडल अधिकारी विजय वाघमारे, पटवारी मनोज धर्माले, आदेश गजभिये, राजेश दंदे और धीरज बोबडे की संयुक्त टीम ने की.

Back to top button