अब साबुन-टूथपेस्ट पर भी पता चलेगा वेज या नॉन-वेज
कॉस्मेटिक्स और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग पर लगेगा हरा या लाल-भूरा डॉट

* खरीदारी के समय उपभोक्ताओं को मिलेगी पूरी जानकारी
अमरावती/दि.8 – अब तक खाद्य पदार्थों की पैकेजिंग पर ही यह पहचान मिलती थी कि कोई उत्पाद शाकाहारी है या मांसाहारी. लेकिन अब रोजमर्रा की जिंदगी में इस्तेमाल होने वाले साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, क्रीम, लोशन, कॉस्मेटिक्स और अन्य टॉयलेटरी प्रोडक्ट्स को लेकर भी उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी. इन उत्पादों की पैकेजिंग पर यह बताना जरूरी किया गया है कि उनमें इस्तेमाल सामग्री का स्रोत क्या है.
* सरकार ने क्यों लिया फैसला?
कई उपभोक्ता व्यक्तिगत, धार्मिक या अन्य कारणों से जानवरों से प्राप्त सामग्री वाले उत्पादों का इस्तेमाल नहीं करना चाहते. हालांकि, कॉस्मेटिक्स और पर्सनल केयर उत्पाद खरीदते समय उनके लिए यह पता लगाना आसान नहीं होता कि उसमें इस्तेमाल किसी सामग्री का स्रोत क्या है. इसी समस्या को देखते हुए पैकेजिंग पर उत्पाद की प्रकृति को स्पष्ट करने का प्रावधान किया गया है. इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को खरीदारी से पहले पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराना और उत्पादों के संबंध में पारदर्शिता बढ़ाना है.
* हरे और लाल-भूरे डॉट से होगी पहचान
नए प्रावधान के अनुसार पूरी तरह शाकाहारी अथवा पौधों से प्राप्त सामग्री से तैयार उत्पाद पर हरा डॉट लगाया जाएगा. वहीं, जानवरों से प्राप्त सामग्री अथवा जानवरों से प्राप्त किसी सामग्री/घटक का इस्तेमाल होने पर उत्पाद पर लाल या भूरा डॉट प्रदर्शित किया जाएगा. इससे उपभोक्ता बिना पूरी सामग्री सूची को समझे भी पैकेजिंग पर दिए गए निशान के माध्यम से उत्पाद की प्रकृति को आसानी से पहचान सकेंगे.
* पैकेज के सामने वाले हिस्से पर दिखेगा निशान
साबुन, शैम्पू, टूथपेस्ट, क्रीम, लोशन और अन्य कॉस्मेटिक्स जैसे उत्पादों पर यह पहचान पैकेजिंग के मुख्य सामने वाले हिस्से पर स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए, ताकि खरीदारी के दौरान उपभोक्ता इसे आसानी से देख सकें.
* खरीदारी से पहले लेबल जरूर देखें
अब उपभोक्ताओं के लिए केवल खाद्य पदार्थ ही नहीं, बल्कि रोजाना इस्तेमाल होने वाले पर्सनल केयर और कॉस्मेटिक उत्पाद खरीदते समय भी लेबल पर ध्यान देना जरूरी होगा. साबुन या टूथपेस्ट खरीदते समय पैकेज के सामने दिए गए हरे अथवा लाल-भूरे डॉट को देखकर उपभोक्ता यह समझ सकेंगे कि उत्पाद शाकाहारी है या उसमें पशु-आधारित सामग्री का इस्तेमाल हुआ है. यह बदलाव उपभोक्ताओं को उत्पाद चुनने में अधिक स्पष्टता देने के साथ-साथ कंपनियों के लिए पैकेजिंग पर जानकारी को पारदर्शी रखने की जिम्मेदारी भी बढ़ाता है.





